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‘मुस्लिमों के मालिकाना हक से ऊपर है हिन्दुओं का मौलिक अधिकार’, BJP MP ने बताया- कैसे हिन्दुओं के पक्ष में आएगा अयोध्या पर फैसला?

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट नवंबर तक राम जन्मभूमि विवाद में फैसला हिन्दुओं के पक्ष में देगा और उसके बाद भव्य मंदिर बनेगा।" 80 साल के स्वामी लंबे समय से अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने की वकालत करते रहे हैं और विवादित स्थल पर राम मंदिर के होने की बात करते रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: September 15, 2019 8:27 PM
बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी।(फाइल फोटो)

बीजेपी के राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मुस्लिमों के मालिकाना हक से ऊपर है हिन्दुओं का मौलिक अधिकार। उन्होंने कहा कि इस साल नवंबर में अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनना शुरू हो जाएगा। अपने 80वें जन्मदिन पर अयोध्या में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। स्वामी ने मीडिया से कहा, “हिंदू का मौलिक अधिकार मुसलमानों के संपत्ति अधिकारों से ऊपर है। जब भी दोनों के बीच कोई विवाद होता है, तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा मौलिक अधिकारों के पक्ष में फैसला सुनाता है।”

उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट नवंबर तक राम जन्मभूमि विवाद में फैसला हिन्दुओं के पक्ष में देगा और उसके बाद भव्य मंदिर बनेगा।” 80 साल के स्वामी लंबे समय से अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने की वकालत करते रहे हैं और विवादित स्थल पर राम मंदिर के होने की बात करते रहे हैं। 6 दिसंबर 1992 को इस स्थान पर बनाए गए 16वीं सदी के बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था।

स्वामी ने कहा कि वो लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि राम जन्मभूमि विवाद में हिन्दुओं की जीत होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी उनके मौलिक अधिकार को छीन नहीं सकता। स्वामी ने कहा कि संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता और पूजा करने का अधिकार देता है। बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है। अयोध्या में 2.77 एकड़ जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई चल रही है।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 30 सितंबर 2010 को अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था। जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने राम लला विराजमान वाला हिस्सा हिंदू महासभा को दिया था। विवादित जमीन का दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।

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