अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सुर्खियों में है। इस मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि अब कथित तौर पर उनके एक पत्र ने हलचल मचा दी है। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की 3 सितंबर को मीटिंग भी है। ऐसे में वायरल हो रहा पत्र कई सवाल खड़े कर रहा है। ट्रस्ट में चंदा चोरी मामले के बाद अपना पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुनने की उम्मीद है। कई लोग इस लेटर का क्रेडिट चंपत राय को दे रहे हैं, जिन्हें चंदा चोरी कांड के बाद मंदिर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
चंदा चोरी के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की बनाई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने कथित तौर पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि चंपत राय (जो 3 सितंबर की मीटिंग से पहले अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं और साधु-संतों से मिल रहे हैं) मंदिर ट्रस्ट में अपनी वापसी की कोशिश कर रहे होंगे।
चंपत राय का कथित पत्र वायरल
18 अगस्त का यह पत्र पब्लिक नहीं किया गया है। चंपत राय के करीबी लोगों ने दावा किया कि उन्होंने इसे लिखा है। लेकिन चंपत राय ने खुद न तो इसकी पुष्टि की है और न ही इनकार किया है। लेकिन, मंदिर निर्माण कमिटी के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा पर 33 पॉइंट वाले लेटर के एक हिस्से ने लोगों को हैरान कर दिया है। लेटर में नृपेंद्र मिश्रा को वह व्यक्ति बताया गया है जिसने निर्माण समिति और 70 एकड़ के मंदिर कॉम्प्लेक्स के मैनेजमेंट के अहम फैसले लिए।
पत्र में कहा गया है कि मंदिर निर्माण के बारे में कोई भी फैसला नृपेंद्र मिश्रा की लीडरशिप वाली कमिटी की मंज़ूरी के बिना नहीं लिया गया था, और मंदिर निर्माण के बारे में वही आखिरी अथॉरिटी थे। पत्र में उन्हें अहम फैसले लेने और कोविड और उसके बाद इसके पूरा होने के दौरान प्रोजेक्ट की देखरेख करने का क्रेडिट दिया गया है, लेकिन यह भी आरोप लगाया गया है कि नृपेंद्र मिश्रा कंस्ट्रक्शन कमिटी में अपनी पसंद के कुछ लोगों को लाए थे। पत्र में दावा किया गया है कि उनमें से एक ने छह साल में सिर्फ एक या दो बार अयोध्या का दौरा किया, जबकि दूसरे से सिक्योरिटी से जुड़े मामलों पर सलाह ली गई थी।
मंदिर निर्माण पर नृपेंद्र मिश्रा ने लिया फैसला
पत्र के मुताबिक नृपेंद्र मिश्रा के सुझाव पर मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को चुना गया, जबकि दूसरी बिल्डिंग्स के डिजाइन और कंस्ट्रक्शन के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट को चुना गया। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने उन अंदाज़ों को खारिज कर दिया कि चंपत राय के कथित नोट में उन्हें दोषी ठहराने की कोशिश की गई थी या राम मंदिर ट्रस्ट के अंदर मतभेदों को दिखाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो ऐसा कोई पत्र मिला है और न ही उन्हें इसकी जानकारी है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई दस्तावेज होता भी, तो भी वह किसी पर इल्ज़ाम नहीं लगाते और आरोप लगाया कि ट्रस्ट के अंदर मतभेदों का इंप्रेशन बनाने की कोशिश की जा रही है।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, “मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा है, और जब तक मुझे कोई लेटर नहीं दिखता, मैं कहूंगा कि यह आपकी कल्पना होगी। भले ही यह 9 पेज लंबा हो, तब भी उन्होंने (चंपत राय) कोई आलोचना नहीं की होगी। आप सिर्फ़ विवाद खड़ा करना चाहते हैं। इसीलिए आप ऐसी चीज़ें कर रहे हैं।”
ट्रस्ट की मीटिंग कब?
यह पत्र और इसके आस-पास का विवाद राम मंदिर ट्रस्ट के लिए एक अहम मोड़ पर आया है। 3 सितंबर की मीटिंग में इसके पहले CEO की नियुक्ति पर चर्चा होने की उम्मीद है, यह कदम मंदिर के लिए एक ज़्यादा फॉर्मल एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर बनाने की दिशा में एक अहम कदम होगा, क्योंकि चंदा चोरी के मामले में UP पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि फाइनल सिलेक्शन के लिए तीन कैंडिडेट्स के नाम, नाम सुझाने के लिए बनी स्पेशल कमेटी तय कर रही है। सूत्रों ने आगे कहा कि ट्रस्ट के काम के तरीके को देखते हुए एक रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट को प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि इसी समय ट्रस्ट के अंदर और अयोध्या में साधुओं के एक ग्रुप के बीच चर्चाओं ने चंपत राय की ट्रस्ट में पॉसिबल वापसी के सवाल को भी फिर से उठा दिया है। उनकी वापसी का सपोर्ट करने वाले लोग ट्रस्ट के सामने पेश की गई SIT रिपोर्ट की ओर इशारा कर रहे हैं, और उनका कहना है कि इसमें राय को सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया गया है। उनके एक करीबी अधिकारी ने कहा, “चंपत राय ने कहा था कि SIT के ट्रस्ट को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने के बाद वह लिखेंगे और अब उन्होंने लिख दिया है।” फिलहाल, चंपत राय ने चुप्पी साध रखी है।
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राम मंदिर दान मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने SIT से कहा कि वह जल्द जांच पूरी करे और उसे तार्किक नतीजे तक पहुंचाए। सुप्रीम कोर्ट ने SIT को मामले की जांच में हुई प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने के लिए कहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
