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शंखघोष और जयकारे के साथ भाव विभोर हुई अवधपुरी

शृंगार हाट स्थित सर्राफा की दुकान पर टीवी पर कार्यक्रम देख रही 60 वर्षीय शांति ने बताया कि वह इस ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण की गवाह बनकर बेहद खुश हैं।

भूमि पूजन के प्रति उत्साहित लोगों ने अपने घरों की बालकनी, बरामदों और छतों पर भगवान राम और हनुमान की तस्वीरों के साथ भगवा झंडे भी फहराए।

राम मंदिर के भूमि पूजन के दौरान हनुमानगढ़ी के पास का शृंगार हाट इलाका बेहद गहमागहमी भरा रहा। यहां दुकानदारों, आम लोगों, सुरक्षाकर्मियों और यहां तक कि मीडियाकर्मियों को भी राम जन्मभूमि पर होने रहे अनुष्ठान का साक्षी बनने का अवसर मिला।

अयोध्या में उमड़ा हुजूम भूमि पूजन के पलों का गवाह बनने के लिए बेताब था लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे और कोविड-19 को लेकर लागू नियम के मद्देनजर चुनिंदा लोगों को ही कार्यक्रम स्थल पर जाने की इजाजत थी। मीडिया को भी काफी दूर रोक दिया गया था। ऐसे में शृंगार हाट स्थित सर्राफा की दुकानों पर लगे टेलीविजन सेट ने लोगों को खासी राहत दी। इन दुकानों पर खड़े होकर लोगों ने कार्यक्रम देखा। इनमें मीडियाकर्मी भी शामिल थे। जैसे ही एक समाचार चैनल के पत्रकार ने प्रधानमंत्री अयोध्या आगमन की खबर सुनाई, भास्कर सिंह नामक उत्साही व्यक्ति ने शंख बजाया और आसपास खड़े लोगों ने जय श्रीराम का नारा लगाना शुरू कर दिया।

भूमि पूजन के हर पल को आंखों में बसाना चाह रहे लोगों की भीड़ के बीच भौतिक दूरी जैसी कोई चीज नजर नहीं आई। अनेक लोग अपने-अपने घर की छतों पर भी खड़े नजर आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब हनुमानगढ़ी पहुंचे तो उनके काफिले की गाड़ियों को देखकर उत्साहित लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए।

शृंगार हाट स्थित सर्राफा की दुकान पर टीवी पर कार्यक्रम देख रही 60 वर्षीय शांति ने बताया कि वह इस ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण की गवाह बनकर बेहद खुश हैं। ऐसा पल किसी व्यक्ति के जीवन में एक ही बार आता है। बेहद भावुक हुए महेंद्र यादव ने कहा कि यह उनकी जिंदगी का बेहद महत्त्वपूर्ण लम्हा है। अगर मौका मिला तो वह अपने नाती-पोतों को आज के दिन के बारे में बताएंगे। भाषण के दौरान मोदी ने जब सियावर रामचंद्र की जय का उद्घोष किया तो बाकी पेज 8 पर शृंगार हाट में मौजूद लोगों ने भी जयघोष किया और शंख बजाया। मगर जैसे ही प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन शुरू किया, पूरा मजमा खामोश होकर उनकी बात सुनने लगा। उनमें से कई लोगों ने उनके भाषण की अपने मोबाइल फोन में रिकार्डिंग शुरू कर दी। प्रधानमंत्री ने जब चौपाई पढ़ी तो लोगों ने भी उसे दोहराया।

हाट में सर्राफा कारोबारी शिव दयाल सोनी ने कहा, मेरी दुकान पर पहली बार ऐसे लोगों की भीड़ जुटी जो कोई आभूषण खरीदने नहीं आए थे। आज कोई ग्राहक नहीं आया, बल्कि केवल श्रद्धालु जुटे। इस मौके पर कुछ दुकानदार लोगों के बीच लड्डू बांटते नजर आए। इनमें से एक सावित्री सोनी ने कहा, मुझे इस क्षण पर बहुत गौरव का अनुभव हो रहा है। लोग मेरी दुकान पर सिर्फ टीवी देखने आ रहे हैं, मगर मुझे बुरा नहीं लग रहा है बल्कि इससे मुझे बेहद संतोष हो रहा है। आज मुझे रामायण धारावाहिक के प्रसारण के वक्त का माहौल याद आ रहा है, जब लोग मुहल्ले के किसी एक घर में टीवी पर रामायण देखने के लिए जुटते थे। भूमि पूजन के प्रति उत्साहित लोगों ने अपने घरों की बालकनी, बरामदों और छतों पर भगवान राम और हनुमान की तस्वीरों के साथ भगवा झंडे भी फहराए।

कुछ को पूजन में शामिल न हो पाने का मलाल

भगवान राम को मानने वाले कुछ मुसलिम श्रद्धालु अयोध्या में राम मंदिर के ऐतिहासिक भूमि पूजन कार्यक्रम को प्रत्यक्ष रूप से देखना चाहते थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों की वजह से उनके मन की मुराद पूरी न हो सकी और उन्हें यह पूरा आयोजन अपने घर पर टेलीविजन पर देखना पड़ा। इनमें से अधिकतर का कहना है कि वे भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए कारसेवा करेंगे।

मुसलिमों की संस्था ‘सुन्नी सोशल फोरम’ के अध्यक्ष राजा रईस ने कहा, हम कारसेवक हैं और भगवान राम को मानते हैं। आज हम लोगों के लिए खुशियां मनाने का दिन है।

इसलिए हम ढोल और हारमोनियम बजा कर अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं। पूरे देश में हर्षोल्लास का माहौल है, श्रीराम हमारे पैगम्बर हैं और यह सच है कि हमारे पुरखे हिंदू थे। इसीलिए देश के मुसलमान काफी प्रसन्न हैं। हमारे संगठन के लोगों ने भूमिपूजन के आयोजन को टीवी पर सीधे प्रसारण के जरिए देखा, इसके अलावा हम लोगों ने दीए भी जलाए।

राम मंदिर आंदोलन को हिंदू-मुसलमानों के बीच संघर्ष बताने वालों पर करारा प्रहार करते हुए लखनऊ के सन्नी अब्बास ने कहा, भूमिपूजन उन लोगों के गाल पर करारा तमाचा है जो राम मंदिर आंदोलन को हिंदू-मुसलिम मुद्दा बनाते थे। अधिकतर मुसलमानों का मानना है कि राम मंदिर हिंदुओं की भावना का प्रतीक है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए। अब राम मंदिर दोनों समुदायों के बीच भाईचारे की एक मिसाल बनेगा। बरेली के जमीर रजा का मानना है कि पांच अगस्त का यह शुभ दिन काफी प्रयासों के बाद आया है। उन्होंने कहा, ह्यकाफी प्रयासों के बाद आज यह दिन आया है। मेरा मानना है कि यह हम लोगों के लिए दोहरी ईद की खुशी है।

कानपुर की शन्नो खान का कहना है, जब कोविड-19 महामारी समाप्त हो जाएगी और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा तब मैं अपने परिवार के लोगों और दोस्तों के साथ वहां जाऊंगी और कारसेवा में भागीदारी करूंगी।

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