ताज़ा खबर
 

राकेश टिकैत बोले, उत्तर प्रदेश में इनको निपटाएंगे, ये नहीं तो 2024 में दूसरी सरकार वापस लेगी कानून

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन शुरू किए 7 महीने से ज्यादा वक्त बीत गया है लेकिन बात जहां की तहां है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत। फोटो- पीटीआई

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन शुरू किए 7 महीने से ज्यादा वक्त बीत गया है लेकिन बात जहां की तहां है। सरकार और किसानों के बीच कोई बात बनती नजर नहीं आ रही है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि सरकार कृषि कानूनों की वापसी को छोड़कर किसी भी मुद्दे पर बात करने को तैयार है। मामले पर किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि हमने भी साफ कर दिया है कि कानून वापसी जब तक नहीं होगी किसान भी वापस अपने घर नहीं जाएंगे। टिकैत ने कहा कि हमें उम्मीद है कि ये आंदोलन 2024 तक चलेगा। चुनाव में बीजेपी को निपटाएंगे । ये सरकार नहीं तो अगली सरकार कानून वापिस लेगी। टिकैत ने कहा कि अब आमने-सामने की बात है। यूपी चुनाव में भी बीजेपी को निपटाएंगे।

मालूम हो कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिये जाने से इनकार किया है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि सरकार इन कानूनों के विभिन्न प्रावधानों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ बातचीत फिर शुरू करने को तैयार है। सरकार और किसान यूनियनों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है। आखिरी बार बातचीत 22 जनवरी को हुई थी। 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान व्यापक हिंसा के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत रुक गई थी।

मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान पिछले छह महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुये हैं। किसान तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद बंद हो जाएगी।

उच्चतम न्यायालय ने अगले आदेश तक इन कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है। न्यायालय ने इस मुद्दे के समाधान के लिए एक समिति का भी गठन किया है। कृषि मंत्री तोमर ने ट्विटर पर शेयर किए वीडियो में कहा, ‘‘भारत सरकार किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। कानूनों को वापस लेने की मांग को छोड़कर कानून के किसी भी प्रावधान पर यदि कोई भी किसान संगठन बातचीत करना चाहता है तो वह आधी रात को भी बातचीत के लिये तैयार हैं।

इससे पहले तोमर और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल सहित तीन केंद्रीय मंत्रियों ने आंदोलन कर रही किसान यूनियनों के साथ 11 दौर की बातचीत की थी। आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी जिसमें किसान यूनियनों ने सरकार के कानूनों को फिलहाल निलंबित करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

20 जनवरी को हुई दसवें दौर की बातचीत में केंद्र ने इन कानूनों को एक से डेढ़ साल तक स्थगित करने और संयुक्त समिति के गठन का प्रस्ताव किया था। केंद्र का प्रस्ताव था कि इसके लिए किसानों को दिल्ली सीमाओं से अपने घर लौटना होगा।

Next Stories
1 7th Pay Commission: सरकार का न्यूनतम वेतन तय करने में देरी का कोई इरादा नहीं : श्रम मंत्रालय
2 नेहरू के कहने पर गए थे PAK, देखी थीं कई पीढ़ियां, जानें- मोदी पर क्या थे मिल्खा के विचार?
3 भारतीय नौसेना की चिंता- लंका में चीन की मौजूदगी बढ़ा सकती है भारत के लिए खतरा
ये पढ़ा क्या?
X