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26 जनवरी को सरकार ने दिया धोखा, राकेश टिकैत बोले- 26 तारीख़ माफ नहीं करेगी, यही करेगी सरकार का इलाज

राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को जो ट्रैक्टर आए थे वे यहीं के थे ना कि अफगानिस्तान से आए थे और 25 लाख लोग भी यहीं के हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। 26 तारीख इनको माफ़ नहीं करेगी। (एक्सप्रेस फोटो: प्रेम नाथ पांडेय)

देशभर से आए किसान पिछले छह महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार ने 26 जनवरी को किसानों के साथ धोखा किया है। इसलिए 26 तारीख सरकार को माफ़ नहीं करेगी और यही इसका इलाज करेगी।

मीडिया से बात करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। 26 तारीख इनको माफ़ नहीं करेगी। 26 तारीख को ही आंदोलन शुरू हुआ। इसलिए 26 तारीख ही सरकार का इलाज करेगी। साथ ही राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार के दिमाग में से 26 तारीख नहीं निकलनी चाहिए।

इसके अलावा राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को जो ट्रैक्टर आए थे वे यहीं के थे ना कि अफगानिस्तान से आए थे और 25 लाख लोग भी यहीं के हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि क्या सरकार को शर्म नहीं आती है कि पिछले सात महीने से यह आंदोलन चल रहा है। शांति पूर्ण तरीके से यह आंदोलन चल रहा है..आप उनकी बात सुन लो। या सरकार सोच रही है कि ये शांति से बैठे हैं इसलिए इन्हें बैठे रहने दो. लोकतांत्रिक देश में ये चीजें नहीं चलती हैं।

इस दौरान राकेश टिकैत ने पत्रकारों के द्वारा कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सवाल पूछे जाने पर कहा कि जब तीसरी लहर आ जाएगी तो लोगों की संख्या घटा देंगें। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कोरोना की तीसरी लहर आ जाए या बारह दौर की लहर आ जाए लेकिन हम नहीं जाएंगे। अगर जिंदा हैं तो दिल्ली में ही रहेंगे। बीमार आदमी का इलाज दिल्ली में होगा और किसानों का इलाज संसद में होगा।

बता दें कि 22 जनवरी के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है और दोनों के बीच गतिरोध जारी है। 22 जनवरी को हुई मीटिंग में सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया था। किसान संगठनों ने साफ़ कर दिया था कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा कोई और प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा। वहीं केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कह दिया है कि वे किसी भी प्रावधानों पर बातचीत करने को तैयार हैं लेकिन इन कानूनों को वापस लेने पर कोई बात नहीं होगी।

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