ताज़ा खबर
 

जरूरत पड़ी तो संसद पहुंचेंगे ट्रैक्टरों पर लाखों किसान- टिकैत ने किया आगाह; तोमर को बताया बगैर अधिकार का कृषि मंत्री

बीकेयू नेता ने कहा, ‘‘आप ने जिस नेता (स्थानीय भाजपा सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर) को चुना है। वह अपने से जवाब नहीं दे सकते हैं। वह फाइलों के साथ वापस जाते थे और जवाब के साथ वापस आते थे।’’

Author Edited By सचिन शेखर March 9, 2021 9:07 AM
Rakesh Tikait, Agricultural Law, Farmer Movementराकेश टिकैत ने कहा कि लूट की सरकार अब सत्ता में आ गई है ( सोर्स – एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश सिंह टिकैत ने सोमवार को कहा कि आवश्यकता पड़ी तो तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिये लाखों की संख्या में किसान ट्रैक्टरों पर संसद पहुंचेगें। टिकैत ने नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम लिये बिना उन्हें बिना अधिकार का केन्द्रीय कृषि मंत्री बताया।

केन्द्र के तीन कृषि कानूनों को वापस करने की मांग को लेकर दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के प्रमुख किसान नेता टिकैत ने सोमवार को यहां किसान रैली में कहा, ‘‘यदि जरूरत पड़ी तो हम तीन काले कानूनों को रद्द कराने के लिये लाखों की संख्या में ट्रैक्टरों पर संसद में पहुंचेगे। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में 3,500 ट्रैक्टर आए थे, ये कोई किराये के ट्रैक्टर नहीं थे।’’बीकेयू नेता ने कहा, ‘‘आप ने जिस नेता (स्थानीय भाजपा सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर) को चुना है। वह अपने से जवाब नहीं दे सकते हैं। वह फाइलों के साथ वापस जाते थे और जवाब के साथ वापस आते थे।’’

टिकैत ने कहा कि लूट की सरकार अब सत्ता में आ गई है, हमें इससे सावधान रहना होगा।उन्होंने किसानों से कहा कि श्योपुर से ही बैरिकेडिंग तोड़ना शुरू करें। उन्होंने हल क्रांति शुरू करने का आह्वान किया। हालांकि उन्होंने इस पर अधिक कुछ न कहा। बीकेयू के प्रदेश सचिव अनिल यादव ने रविवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि टिकैत इस पखवाड़े 14 और 15 मार्च को रीवा और जबलपुर में दो और किसान रैलियों को संबोधित करेंगें।

टिकैत ने किसानों को जागरूक करने तथा किसानों आंदोलन का समर्थन हासिल करने के लिये पांच राज्यों– मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, कर्नाटक और तेलंगाना का दौरा करने की योजना बनाई है।

यूपी के किसान परेशान, ये हैं कारणः किसान नेता नरेश और राकेश टिकैत की वजह से जहां एक ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश दिल्ली से लगी सीमाओं पर जारी किसान के विरोध प्रदर्शनों का केन्द्र बन गया है, वहीं दूसरी ओर ‘भारत का चीनी का कटोरा’ कहे जाने वाले इस राज्य के किसान गन्ने की कीमतें नहीं बढ़ने, डीज़ल के बढ़ते दाम और आवारा पशुओं समेत इससे भी बड़ी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।

Next Stories
1 कोरोनाः ये महामारी के अंत की शुरुआत- बोले थे स्वास्थ्य मंत्री; IMA ने सरकार-नेताओं को चेताया- खुद पर गर्व या तंज न करें
2 बंगाल के “विभीषण” बने मुकुल रॉय! घपले में फंसने पर तृणमूल ने किया था सस्पेंड, बीजेपी ने तुरंत था अपनाया
3 कृषि कानूनः बरसे टिकैत- मोदी सरकार ने किसान की पगड़ी उछालने का किया है काम, गोली खाएंगे, पर पीछे न हटेंगे
ये पढ़ा क्या?
X