भारत-अमेरिका ट्रेड डील को किसान नेता राकेश टिकैत ने भारत की 70% आबादी पर सरकार का सबसे बड़ा प्रहार बताया है। उन्होंने फेसबुक के पोस्ट में कहा कि भारत-अमेरिका के बीच एग्रीकल्चर ट्रेड डील लगभग अब हो चुकी है लेकिन इसके दूरगामी परिणामों को लेकर भारतीय किसानों की चिंताएं और गहरी हो गई हैं।

राकेश टिकैत ने इसी पोस्ट में आगे कहा कि अमेरिकी कृषि को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत का किसान लागत, कर्ज और अनिश्चित बाजार से पहले ही जूझ रहा है। अब सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत आएंगे तो देशी फसलों के दाम गिरेंगे, MSP कमजोर होगी और सबसे बड़ा नुकसान छोटे व सीमांत किसानों को होगा।

इस ट्रेड डील को ग्रामीण अर्थव्यवस्था बताते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि यह डील आयात निर्भरता, कॉरपोरेट नियंत्रण और किसान की सौदेबाजी शक्ति को कमजोर करने की दिशा में कदम है। इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी खतरा बढ़ेगा, किसान विकास के विरोधी नहीं हैं।

ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र क्यों चिंतित?

अभी तक भारत अमेरिका ट्रेड डील का पूरा विवरण सामने नहीं आया लेकिन सोमवार शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में भारत द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की बात कही गई थी। इसी वजह से भारत में ट्रेड डील को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी बड़े स्तर पर अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद शामिल है।

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