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Farmer protest: केंद्र सरकार न सोचे कि हम अपनी फसल काटने लौट जाएंगे, जबरदस्ती की तो हम जला देंगे पैदावार, राकेश टिकैत ने हरियाणा से दी धमकी

Farmer protest: टिकैत ने कहा कि अगर केंद्र सरकार का रवैया यही रहा तो वो अपने ट्रैक्टर लेकर बंगाल जाने से भी गुरेज नहीं करेंगे। वहां भी एमएसपी नहीं मिल रहा है।

Rakesh Tikait in meetingकिसान नेता राकेश टिकैत एक जनसभा को संबोधित करते हुए (फोटो सोर्सःट्विटर/@rakeshtikaitbku)

किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्र से दो टूक कहा है कि सरकार न सोचे कि हम अपनी फसल काटने लौट जाएंगे। अगर जबरदस्ती की तो हम फसल को ही जला देंगे। हरियाणा के खरक पूनिया में टिकैत ने कहा कि किसान खेती भी करेगा और आंदोलन भी चलाएगा। जो लोग सोचते हैं कि दो महीने में आंदोलन खत्म हो जाएगा, वो गलत हैं।

एक जनसभा में टिकैत ने कहा कि अगर केंद्र सरकार का रवैया यही रहा तो वो अपने ट्रैक्टर लेकर बंगाल जाने में भी गुरेज नहीं करेंगे। वहां भी किसानों को एमएसपी नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि फसल के दाम तो बढ़ नहीं रहे अलबत्ता तेल की कीमतें दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जा रही हैं। टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों की बात को तवज्जो नहीं दे रही है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश गाजियाबाद में गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने जिस जगह कीलें लगवाई थीं, वहां पर किसान नेता राकेश टिकैत जौ बोएंगे। टिकैत ने गुरुवार को बाकायदा हल चलाकर जुताई भी शुरू कर दी। हल के लिए राकेश टिकैत ने भैंसा मंगवाया था। उन्होंने बताया कि सरकार को सचेत करने के लिए वह यहां पर जौ बोएंगे। साथ ही यहां मिट्टी रखकर क्रांति पार्क बनाया जाएगा।

गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने सड़क पर कीलें लगवा दी थीं। साथ ही सख्त बैरिकेडिंग कर लोहे के तार भी लगवाए थे। टिकैत ने कील वाली जगह पर खुदाई करके इससे पहले फूल लगाने का काम भी किया था। बकौल किसान नेता दिल्ली की सारी कीलें निकालने के बाद ही किसान अपने घरों को लौटेंगे। किसान किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटने जा रहा है। वो अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करता रहेगा।

गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत तिरंगा झंडा लगाने के इंतजाम में भी जुटे हैं। बता दें कि दो महीनों से किसान गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सबसे पहले किसानों का आंदोलन टिकरी और सिंघू बार्डर पर शुरू हुआ था। पंजाब के किसानों ने यहां आकर अपना डेरा डाला था। पंजाब के किसान अभी भी दोनों सीमाओं पर जमे हुए हैं।

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