राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों ने शुक्रवार को पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की। राघव चड्ढा ने दो अन्य सांसदों के साथ प्रेस वार्ता करके यह जानकारी मीडिाय को दी। चड्ढा ने बताया कि उनके पास सात सांसदों के हस्ताक्षरित सहमति पत्र हैं। चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ने का सहमति पत्र उसी दिन राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्र्पति सीपी राधाकृष्णन को सौंप दिया।
आम आदमी पार्टी छोड़ने वालों में पद्मश्री से सम्मानित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक विक्रमजीत सिंह साहनी भी शामिल हैं। 2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा के लिए विक्रमजीत सिंह साहनी को नॉमिनेट किया था। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ इस इंटरव्यू में विक्रमजीत साहनी ने बताया कि उन्होंने AAP से हाथ क्यों मिलाया, उनके बाहर निकलने की क्या वजह थी। साथ ही उन्होंने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनके रिश्ते कैसे थे और पंजाब की दिशा को लेकर उनकी चिंताएं क्या थीं।
सवाल: भाजपा और कांग्रेस दोनों से आपकी नजदीकी जगजाहिर होने के बावजूद आपने 2022 में आम आदमी पार्टी का राज्यसभा नामांकन क्यों स्वीकार किया?
जवाब: AAP की ओर से राघव चड्ढा मेरे पास यह प्रपोजल लेकर आने वाले पहले व्यक्ति थे, और मैं मान गया। मैंने उन्हें पहले ही BJP और कांग्रेस दोनों के साथ अपने लिंक के बारे में साफ-साफ बता दिया था। AAP ने मुझे सिर्फ़ पंजाब के लिए काम करने और संसद में राज्य के मुद्दे उठाने का मैन्डेट दिया था, इसलिए मैं मान गया। उन्होंने मुझसे कभी फॉर्मल तौर पर पार्टी जॉइन करने के लिए नहीं कहा और मैंने कभी जॉइन नहीं किया। मैंने उन्हें यह भी बताया था कि अपने समाज सेवा के काम के तौर पर मैंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे केंद्र सरकार के कई कामों को प्रमोट किया है, लेकिन उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं थी। 2022 में राघव चड्ढा मुझसे दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मिले और कहा कि अरविंद केजरीवाल राज्यसभा सीटों के लिए भरोसेमंद पंजाबी चेहरों की तलाश कर रहे हैं, भले ही वे पार्टी लाइन से अलग हों।
जब मैं केजरीवाल से मिला, तो उन्होंने इस बात की तारीफ़ की कि मेरे सभी पार्टियों से लिंक हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि वे दो पद्म श्री अवॉर्डी, संत बलबीर सिंह सीचेवाल और मुझे राज्यसभा भेज रहे हैं। हम दोनों में से कोई भी फॉर्मल तौर पर AAP में शामिल नहीं हुआ। मुझे राज्यसभा भेजने के लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। वे जानते थे कि राजनीति कभी मेरी खासियत नहीं रही, और कैंपेनिंग और चुनावी पॉलिटिक्स कभी मेरा काम नहीं रही। मेरा मैन्डेट पंजाब राज्य के लिए काम करना और उसकी चिंताओं को उठाना था। मैं अब पंजाब में 6 वर्ल्ड-क्लास यूथ स्किल ट्रेनिंग सेंटर चला रहा हूँ, जिसमें लुधियाना का सबसे बड़ा सेंटर भी शामिल है। साथ ही ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर और दूसरी कोशिशें भी कर रहा हूं। मैं AAP के सत्ता में आने से पहले भी पंजाब के लिए काम कर रहा था। कोविड के दौरान, जब कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे, तो हमने पंजाब के अस्पतालों के लिए हज़ारों ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतज़ाम किया था। मेरा हमेशा से एक ही मकसद रहा है कि पंजाब तरक्की करे, चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो। बदकिस्मती से ऐसा नहीं हो रहा है।
सवाल: क्या BJP में जाने का आपका फैसला राघव चड्ढा की वजह से हुआ?
जवाब: यह हम सातों लोगों का मिलकर लिया गया फैसला था, जिसमें राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता शामिल थे। AAP के साथ मेरा जुड़ाव सिर्फ संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने तक ही सीमित था। BJP की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार से अपने कनेक्शन की वजह से मैंने विदेश में फंसे पंजाब सरकार के युवाओं को निकालने में भी मदद की। मेरी प्राथमिकता कभी कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं रही, चाहे AAP हो या BJP, बल्कि पंजाब के लोग रहे। मैं हमेशा AAP और केजरीवाल का शुक्रगुजार रहूंगा कि उन्होंने मुझे पंजाब के लिए काम करने के लिए राज्यसभा भेजा।
सवाल: मामले इतने बिगड़े कि आपको पार्टी छोड़नी पड़ी?
जवाब: गिरावट तब शुरू हुई जब AAP के तीन कोर मेंबर राघव चड्ढा, संदीप पाठक और स्वाति मालीवाल को साइडलाइन कर दिया गया। वे पार्टी की रीढ़ थे। 2022 के पंजाब असेंबली चुनावों में संदीप पाठक ने पंजाब में 94 टिकट बांटे। उन्होंने और राघव चड्ढा ने पंजाब चुनाव कैंपेन का असल में नेतृत्व किया था और पार्टी को भारी बहुमत दिलाने में मदद की। स्वाति मालीवाल दिल्ली में एक अहम पिलर थीं। मैं कभी AAP के पॉलिटिकल ब्यूरो का हिस्सा नहीं था, लेकिन यह साफ़ था कि पार्टी अपने कुछ सबसे भरोसेमंद लोगों से अलग हो गई थी।
सबसे पहले स्वाति मालीवाल के साथ अनबन हुई। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP की हार के बाद संदीप पाठक बहुत निराश हो गए। राघव चड्ढा ने फिर भी चीज़ों को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन उस हार के बाद, उनके भी पर काट दिए गए। उन्हें पंजाब छोड़ने के लिए कहा गया और एक एडवाइज़री बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया जो कभी काम नहीं कर पाया। आखिरी झटका तब लगा जब उनसे राज्यसभा में डिप्टी लीडर का पद छीन लिया गया। इसका असर हम सभी पर पड़ा। हमने खुद से यह सवाल पूछा- इस पार्टी के साथ पंजाब का भविष्य क्या है?
सवाल: AAP का आरोप है कि सात सांसदों को BJP ने तोड़ लिया और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल प्रेशर टैक्टिक्स के तौर पर किया गया। आपका क्या जवाब?
जवाब: यह पूरी तरह से झूठ है। इसकी शुरुआत राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक के पार्टी के साथ अपने मसलों की वजह से पार्टी छोड़ने के फ़ैसले से हुई। फिर उन्होंने हम बाकी लोगों से संपर्क किया। अगर अशोक मित्तल ED के दबाव की वजह से चले भी गए, और मैं यह नहीं कह रहा कि उन्होंने ऐसा किया, तो दूसरों का क्या? कम से कम मेरे मामले में BJP ने मुझसे कभी संपर्क नहीं किया।
सवाल: आपने अक्सर पंजाब के मुफ़्त/सब्सिडी वाले वेलफेयर मॉडल की आलोचना की है।
जवाब: हां, क्योंकि बैलेंस होना चाहिए। आप पंजाब को भीख का कटोरा नहीं बना सकते। राज्य का कर्ज़ पहले ही बढ़कर 4.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। पंजाब खाने का कटोरा है, भीख का कटोरा नहीं। हर महिला को 1,000 रुपये देने के बजाय, सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स को बढ़ावा क्यों नहीं देते और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद क्यों नहीं करते? BPL परिवारों को सिलाई मशीन या फ़ूड-प्रोसेसिंग इक्विपमेंट दें ताकि वे कमाना शुरू कर सकें। इनकम के सोर्स बनाएँ।मैं यह नहीं कह रहा कि मुफ़्त/सब्सिडी पूरी तरह से बंद कर देनी चाहिए। लेकिन मदद उन लोगों तक पहुँचनी चाहिए जिन्हें सच में इसकी ज़रूरत है। मैं ज़रूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के लिए सिख्या लंगर चलाता हूँ। अगर मैं अपनी सांसदी की सैलरी से 48 बच्चों को पढ़ा सकता हूं, तो सरकार और भी बहुत कुछ कर सकती है। हम कम संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
सवाल: क्या पंजाब के लिए आपके सुझावों को नजरअंदाज़ किया गया?
जवाब: ज़्यादातर, हां। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान हमेशा इतने बिज़ी रहते हैं कि किसी से नहीं मिल पाते, यहां तक कि अपने सांसदों से भी नहीं। वह न तो पंजाब की बेहतरी के लिए सुझावों को महत्व देते हैं और न ही उन्होंने कभी हमें यह गाइड किया है कि पंजाब से जुड़े कौन से मुद्दे संसद में उठाए जाने चाहिए। मैं मुख्यमंत्री के तौर पर उनका सम्मान करता हूं, लेकिन कोई आउटपुट नहीं है और कोई दिखने वाला काम नहीं है।पंजाब लगातार गिरावट की ओर है, लॉ एंड ऑर्डर, खेती, कर्ज़, ड्रग्स, ग्राउंडवाटर की कमी, कोई भी सेक्टर ले लो। ऐसा एक भी एरिया नहीं है जहां हम कह सकें कि पंजाब अच्छा कर रहा है। बस कोई विजन नहीं है। उनकी एकमात्र चिंता 2027 लगती है, पंजाब या पंजाबियों की नहीं।
सवाल: आपने कहा है कि आपके और भगवंत मान के बीच बहुत कम इक्वेशन था।
जवाब: यह सच है क्योंकि वह कभी लोगों से नहीं मिलते और सुझावों को महत्व नहीं देते। मैं हार्वर्ड का एल्युम्नस हूं। अगर मैं अपने राज्य के लिए कुछ सुझाव देता हूं, तो वह काफी सोच-समझकर देता हूं। फिर भी कभी कोई एंगेजमेंट नहीं हुआ। अगर वह सांसदों को सीरियसली लेते, तो संसद सत्र से पहले हमसे मिलते, उठाए जाने वाले मुद्दों पर हमें बताते और पंजाब की चिंताओं पर सेंटर से बात करते। हमने कई पत्र लिखे, लेकिन उन्होंने कभी संपर्क नहीं किया। अक्सर हमें पंजाब के मुद्दों के बारे में अपने मुख्यमंत्री से ज़्यादा अखबारों से पता चलता था।मैंने खुद राजस्थान के साथ पंजाब के पेंडिंग पानी के बकाए का मुद्दा उठाया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर मुझसे कभी संपर्क नहीं किया। इसके बावजूद हरपाल चीमा, हरजोत बैंस और डॉ. बलबीर सिंह जैसे मंत्री विनम्र लोग हैं, और मैंने उनके साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। लेकिन टॉप पर वह स्पिरिट नहीं है।
सवाल: आपका क्या मतलब है?
जवाब: स्टेज पर जोक्स सुनाकर लोगों को हंसाना एक बात है, जबकि मुख्यमंत्री के तौर पर राज करना दूसरी बात है। एक मुख्यमंत्री की 90 परसेंट स्पीच फैक्ट्स, किए गए काम और पंजाब के लिए विज़न के बारे में होनी चाहिए। उन्हें इस बारे में बात करनी चाहिए कि पंजाब को इस संकट से कैसे निकाला जा सकता है, न कि पुरानी कॉलेज की कहानियों, शेरो-शायरी और मज़ाक पर ध्यान देना चाहिए। थोड़ा ह्यूमर ठीक है। लेकिन चुटकले और गपशप से गवर्नेंस नहीं बन सकती। ये कुछ समय की बातें हैं। पंजाब वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। हम यह बर्दाश्त नहीं कर सकते।मुख्यमंत्री के साथ भरोसे और बातचीत में भी बहुत कमी है।
सवाल: AAP ने राज्यसभा छोड़ने वाले सात सदस्यों को गद्दार कहा है। आपका क्या कहना है?
जवाब: हमने पंजाब या पंजाबियों के साथ कोई धोखा नहीं किया है। मेरा चुनाव क्षेत्र पूरा पंजाब है। मैंने एक सांसद के तौर पर अपना रिपोर्ट कार्ड खुद जारी किया है, और लोग खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मैंने संसद में लगातार पंजाब के हक की बात उठाई है। मैं अब भी AAP को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे राज्यसभा भेजा। लेकिन हालात ने मेरे पास कोई और रास्ता नहीं छोड़ा। BJP में शामिल होने का फैसला करने से पहले, मैं केजरीवाल से मिला और उनसे बात की। उन्होंने मुझसे राज्यसभा सदस्य के तौर पर इस्तीफा देने को कहा। लेकिन क्या मेरे इस्तीफे से AAP के अंदर कुछ हल होता? उन्हें खुद यकीन नहीं हो रहा था कि संदीप पाठक भी जा रहे हैं। जब पार्टी के तीन सबसे भरोसेमंद लोग नाखुश थे, तो मुझसे क्या उम्मीद की जा सकती थी? सांसद बनने से पहले मैंने पंजाब के लिए काम किया है और अगर कल मैं सांसद नहीं भी रहा, तो भी मैं ऐसा करता रहूंगा। मेरा एक ही सपना है: पंजाब के हर जिले में युवाओं के लिए एक वर्ल्ड-क्लास स्किल सेंटर, और एक ड्रग-फ्री पंजाब।
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राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी। अगर चार साल पहले राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के तौर पर राघव चड्ढा ने जो पहला बिल पेश किया था, वह कानून बन जाता, तो वह AAP छोड़कर BJP में मर्ज नहीं कर पाते। पढ़ें पूरी खबर
