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राज्‍यसभा उपसभापति चुनाव: हरिवंश बने उम्मीदवार तो NDA में तकरार? अकाली दल ने किया नाराजगी से इनकार

विपक्षी खेमे के पास मात्र 113 सांसदों का समर्थन हासिल है। अकाली दल के मात्र तीन सांसद हैं।

राज्यसभा। (Photo: ANI/8 दिसंबर)

राज्य सभा के उप सभापति का चुनाव गुरूवार (9 अगस्त) को होगा। राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सोमवार (06 अगस्त) को इसका एलान किया। जेडीयू के सांसद और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश एनडीए की तरफ से उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं, जबकि विपक्ष की तरफ से डीएमके के तिरुचि शिवा या एनसीपी की वंदना चह्वाण को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। हरिवंश को उम्मीदवार बनाए जाने की खबरों के बीच एनडीए में तकरार की भी खबरें आने लगीं। खबर थी कि बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल नाराज बताई जा रही है क्योंकि पहले इस पद के लिए अकाली सांसद नरेश गुजराल को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी लेकिन अब हरिवंश का नाम गुजराल पर भारी पड़ चुका है। कहा जा रहा है कि चुनाव के दिन अकाली सांसद राज्यसभा से बाहर रह सकते हैं लेकिन शिरोमणि अकाली दल के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी एनडीए से अलग नहीं है।

सूत्र बता रहे हैं कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पहले से ही इसकी रणनीति बना ली है। माना जा रहा है कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके (अन्नाद्रमुक) एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करेगी। इनके अलावा ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल, तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस और वहीं की विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस भी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करेगी। बता दें कि राज्यसभा के उप सभापति की जीत के लिए कुल 123 सांसदों के वोट की जरूरत होगी जबकि एनडीए के पास फिलहाल 110 सांसदों का ही समर्थन है। लिहाजा, अन्नाद्रमुक के 13, बीजद के 9, टीआरएस के 6 और वाईएसआर कांग्रेस के 2 सांसदों का साथ अगर एनडीए को मिल गया तो बंपर जीत हो सकती है। उधर, विपक्षी खेमे के पास मात्र 113 सांसदों का समर्थन हासिल है। अकाली दल के मात्र तीन सांसद हैं।

अन्नाद्रमुक पिछले लंबे समय से बीजेपी का साथ देती रही है। पिछले महीने मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी अन्नाद्रमुक ने मोदी सरकार का साथ दिया था। इसके अलावा हाल के दिनों में टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच उपसभापति चुनाव में समर्थन और 2019 के चुनावों के मद्देनजर चर्चा हुई है। बता दें कि बीजेपी ने हरिवंश को आगे कर नाराज नीतीश कुमार को मनाने की एक सार्थक पहल की है क्योंकि बिहार में नीतीश का साथ नहीं मिलने से बीजेपी को 2019 के चुनावों में हार का खतरा मंडराने लगा था।

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