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रास में उठा आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल का मुद्दा

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा के भूपेन्द्र यादव ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा उठाया

Author नई दिल्ली | July 21, 2016 6:26 PM
राज्यसभा की कार्यवाही। (PTI Photo / TV GRAB)

राज्यसभा में गुरुवार (21 जुलाई) को विभिन्न दलों के सदस्यों ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किए जाने पर चिंता जताते हुए सरकार से ऐसी वेबसाइटों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा के भूपेन्द्र यादव ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल ही में खबरें आई हैं कि आतंकी गुट सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार कर रहे हैं और खास तौर पर सीमाई इलाकों के नौजवानों को हिंसा के प्रति उन्मुख करने की कोशिश कर रहे हैं। यह दुष्प्रचार सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों के खिलाफ भी किया जा रहा है।

यादव ने कहा कि एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर में कहा गया है कि सरकार ने इस तरह का दुष्प्रचार करने वाली 268 वेबसाइटों की पहचान की है। इन वेबसाइटों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद समूची मानवता के लिए खतरा है और इसे किसी भी रूप में बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे देश के खिलाफ कोई भी कुचक्र न रचा जा सके और पड़ोसी देश को करारा जवाब दिया जा सके। लगभग सभी दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

शून्यकाल में ही जदयू के अली अनवर अंसारी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा 9 छात्रों को दो साल के लिए निष्कासित किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इनमें निष्कासित छात्रों में से आठ उत्तरप्रदेश के और एक पश्चिम बंगाल का है। अंसारी ने कहा कि ये छात्र मांग कर रहे थे कि संस्थान की डिजिटल पुस्तकालय को 24 घंटे चलाया जाए। उनके प्रॉस्पेक्टस में भी कहा गया है कि संस्थान में 24 घंटे चलने वाली एक डिजिटल पुस्तकालय है जबकि विश्वविद्यालय 24 घंटे इस पुस्तकालय का संचालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान की डिजिटल पुस्तकालय को 24 घंटे चलाने की मांग को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे थे लेकिन आधी रात को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मुद्दा छात्रों से संबद्ध है इसलिए सरकार को इस पर अविलंब ध्यान देना चाहिए।

राकांपा के डी पी त्रिपाठी ने गुजरात में सिलिकोसिस बीमारी की वजह से मध्यप्रदेश के कई मजदूरों की जान जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गुजरात, झारखंड और ओडिशा की क्वार्ट्ज कटिंग फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूर जब श्वास लेते हैं तो वायु के साथ साथ सिलिका भी उनके शरीर में प्रवेश कर जाती है। यह सिलिका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल और गंभीर असर डालती है। द्रमुक की कनिमोई ने एम्स में स्नातकोत्तर के एक छात्र की कथित आत्महत्या का मुद्दा उठाया और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। कनिमोई ने कहा कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कहा गया है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं है। इसलिए इसकी सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए। भाकपा के डी राजा ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि मंत्रालय ने इस मामले पर संज्ञान लिया और मृतक की ‘टॉक्सिकोलॉजी’ रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माकपा के तपन कुमार सेन ने तमिलनाडु स्थित सलेम इस्पात संयत्र और विश्वेश्वरैया इस्पात एवं लौह संयंत्र के निजीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को इन संयंत्रों की जरूरतें पूरी करनी चाहिए न कि ‘मेक इन इंडिया’ के नाम पर राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचा जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता ने सरकार का ध्यान व्हीट ब्लास्ट और राइस ब्लास्ट बीमारियों की ओर आकृष्ट किया। इन बीमारियों का देश के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बीमारी की रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाने और किसानों को इसके बारे में जानकारी देने की जरूरत है। द्रमुक के तिरूचि शिवा ने तमिलनाडु में कुछ वकीलों को निलंबित किए जाने का मुद्दा उठाया।

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