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राज्यसभा सदस्यों ने जताई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती पर सहमति

राज्यसभा में गुरुवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने पर सहमति जताई। सदस्यों ने संबंधित कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू किए जाने पर बल दिया..

Author नई दिल्ली | December 4, 2015 12:39 AM
राज्यसभा (पीटीआई फोटो)

राज्यसभा में गुरुवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने पर सहमति जताई। सदस्यों ने संबंधित कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू किए जाने पर बल दिया और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि कानूनों के प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं हो। भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक 2013 पर हुई चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद सहित कुछ सदस्यों ने यह सुझाव भी दिया कि इसे पारित करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले इसके विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा करने की जरूरत है।

कांग्रेस के शांताराम नाइक ने कहा कि भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए इस कानून के साथ धनशोधन निवारण कानून को भी प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने काले धन से जुड़े कानून को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की। मौजूदा भ्रष्टाचार निवारण कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत मौजूदा सरकार अपने मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के मामले में अलग मापदंड अपना रही है। एक तरफ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री व गोवा के एक पूर्व मुख्यमंत्री को निशाना बनाया गया। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले और छत्तीसगढ़ के पीडीएस घोटाले में यह कानून प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है।

नाइक ने दावा किया कि निचले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तो की गई लेकिन उच्च पदस्थ जिन लोगों का नाम सुर्खियों में आया, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। नाइक ने कहा कि लोग कई बार रिश्वत देने के लिए बाध्य हो सकते हैं और सरकार को विधेयक में इस बात पर गौर करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अस्पताल में आपात स्थिति में मरीज को रिश्वत देने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

उन्होंने रिश्वत से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने का सुझाव भी दिया और कहा कि विदेशी कंपनियों पर भी देश का कानून लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा प्रायोजित भ्रष्टाचार पर भी रोक लगनी चाहिए। उन्होंने राज्य द्वारा प्रायोजित भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए कहा कि उच्च पदस्थ अधिकारियों और न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद विभिन्न आकर्षक पदों पर नियुक्त किया जाता है।

भाजपा के मनसुख लाल मंडाविया ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार काला धन वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। सवाल यह है कि काला धन पैदा कैसे हुआ, अगर भ्रष्टाचार नहीं होता तो काले धन की समस्या नहीं होती। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए भ्रष्टाचार पर काबू पाने में मदद मिलेगी। चर्चा में सपा के नरेश अग्रवाल, जद (एकी) के केसी त्यागी व तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता ने भी हिस्सा लिया। गुरुवार को चर्चा अधूरी रही।

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