झारखंड में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार को लेकर इंडिया ब्लॉक के भीतर तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने CPI(ML) के दो विधायकों पर क्रॉस-वोटिंग का आरोप लगाया था। जिसके बाद सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
CPI(ML) के महासचिव और इंडिया ब्लॉक के प्रमुख चेहरे दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर आरोपों को पूरी तरह गलत और दर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में वोट किया था।
दीपांकर भट्टाचार्य ने पत्र में लिखा, “हमें यह देखकर हैरानी हुई है कि कांग्रेस 18 जून को झारखंड से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के लिए झारखंड के हमारे विधायकों को दोषी ठहरा रही है। यह एक दुर्भावनापूर्ण झूठ है। विपक्षी विधायकों की बैठक में तय योजना के अनुसार हमारे दोनों विधायकों ने प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया। मतदान एजेंटों ने भी वोट डालने से पहले इसकी पुष्टि की थी।”
भट्टाचार्य ने कहा, “मैं आपको अपने विधायकों के खिलाफ पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार और हमारी पार्टी की छवि धूमिल करने के प्रयासों के प्रति अपना कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। बिहार और झारखंड में हमारे विधायकों ने राज्यसभा चुनावों में लगातार विपक्षी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया है। जैसा कि आप जानते हैं, हमारी पार्टी इंडिया ब्लॉक के गठन के बाद से ही इसकी सबसे प्रतिबद्ध घटक पार्टियों में से एक रही है।”
उन्होंने आगे लिखा, “हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप कांग्रेस नेताओं से कहें कि वे सहयोगी दलों के खिलाफ निराधार आरोप लगाना बंद करें, क्योंकि इससे इंडिया ब्लॉक की पार्टियों के बीच आपसी विश्वास कमजोर होता है। मीडिया में इस दुर्भावनापूर्ण झूठ को मिली व्यापक पब्लिसिटी को देखते हुए, हम इस पत्र को सार्वजनिक करने के लिए विवश हैं।”
कांग्रेस को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों में से एक पर कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम ने जीती। दूसरी सीट एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने हासिल की, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक हैं। नथवानी ने कांग्रेस के प्रणव झा को हराया, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव हैं और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय से जुड़े हुए हैं।
आंकड़ों का खेल
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोट चाहिए थे। झामुमो (JMM) के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 56 विधायक हैं, इसलिए यदि क्रॉस-वोटिंग नहीं होती तो उसके दोनों उम्मीदवार आसानी से जीत जाते।
सूत्रों के अनुसार, राम को 30 वोट मिले और नथवानी को भी 30 वोट मिले, लेकिन दो वोट अमान्य पाए गए। झा को केवल 21 वोट मिले, जिनमें से एक वोट अमान्य घोषित किया गया।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आरजेडी के चार विधायकों और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के दो विधायकों ने झा के पक्ष में वोट नहीं दिया। एआईसीसी के झारखंड प्रभारी के. राजू ने आरजेडी और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन पर गठबंधन के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए नतीजों में हेरफेर करने का आरोप लगाया।
इंडिया ब्लॉक में चौड़ी होती दरार
भट्टाचार्य के पत्र में एक महत्वपूर्ण बात कही गई है। भट्टाचार्य ने लिखा, “हम कांग्रेस से अपील करते हैं कि उसके नेता इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों पर बिना सबूत औप बेवजह आरोप लगाना बंद करें। क्योंकि इस तरह के आरोप इंडिया ब्लॉक के दलों के बीच आपसी भरोसे को कमजोर करते हैं।
उनका यह बयान इंडिया गठबंधन के भीतर चल रहे मतभेदों के बीच आया। खासकर इस साल हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कई सहयोगी दलों में नाराजगी देखी रही है। 8 जून को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में भी कांग्रेस की आलोचना की हुई थी। जिसके पीछे वजह थी कि कांग्रेस ने DMK (Dravida Munnetra Kazhagam) से दूरी बनाकर अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया। जिस पर सहयोगी दलों ने आपत्ति जताई थी।
झारखंड राज्यसभा चुनाव: कम वोट के बावजूद एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत
झारखंड में दो सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ ‘खेल’ हो गया है। दूसरी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब झा की हार हो गई है। वहीं एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत हुई है। परिमल नाथवानी के पास तय वोट से कम वोट था। उसके बावजूद उनकी जीत हुई है। वहीं एक सीट पर जेएमएम उम्मीदवार की जीत हुई है। पढ़ें पूरी खबर।
