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राज्‍यसभा उपसभापति चुनाव: विपक्षी एकता की होगी कड़ी परीक्षा, पीजे. कुरियन 1 जुलाई को हो रहे रिटायर, चार दशकों से कांग्रेस के पास है यह पद

राज्‍यसभा के उपसभापति पीजे. कुरियन 1 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में संसद के मानसून सत्र के दौरान इस पद के लिए चुनाव होना है। भाजपा और कांग्रेस के साथ ही तृणमूल कांग्रेस भी इसे अपने पास रखना चाहती है।

Author नई दिल्‍ली | June 19, 2018 6:29 PM
Rajya Sabha DY Chairman Election 2018: पी.जे. कुरियन के जुलाई में रिटायर होने के बाद उप सभापति का पद खाली हुआ है।

संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर से विपक्षी एकता की कड़ी परीक्षा होगी। संसद के ऊपरी सदन राज्‍यसभा के उपसभापति पीजे. कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को खत्‍म होने जा रहा है। अगले साल लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में राज्‍यसभा उपसभापति का पद बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण है। कांग्रेस के पास यह पद चार दशकों से भी ज्‍यादा समय से है, ऐसे में प्रमुख विपक्षी पार्टी फिर से इस पद पर अपने उम्‍मीदवार को बिठाने की जुगत में है। हाल में रज्‍यसभा के हुए चुनावों के बाद भाजपा ऊपरी सदन में भी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, लेकिन साधारण बहुमत से दूर है। एनडीए के घटक दलों को मिलाकर भी केंद्र में सत्‍तारूढ़ दल साधारण बहुमत से दूर है। वहीं, कांग्रेस की राह में भी कई रोड़े हैं। कांग्रेस के अलावा कुछ अन्‍य विपक्षी दल भी राज्‍यसभा उपसभापति का पद चाहते हैं। इसमें पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस सबसे आगे है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं का मानना है कि टीएमसी भी इस पद को पाने के लिए उत्‍सुक है। ऐसे में इस मसले पर विपक्षी एकता में दरार उभरती दिख रही है। हालांकि, 10-जनपथ के करीबी अहमद पटेल ने 17 जून को ममता से मिलकर विपक्ष की एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश जरूर की थी।

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गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी उपसभापति चाहते हैं कुछ विपक्षी दल: कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्‍या सत्‍तारूढ़ दल के बजाय विपक्षी खेमा ही है। ‘मिंट’ के अुनसार, कुछ प्रमुख विपक्षी दल गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी उपाध्‍यक्ष चाहते हैं। उनका मानना है कि राज्‍यसभा का उपसभापति इन दोनों प्रमुख दलों का नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के एक वरिष्‍ठ नेता ने बताया कि पार्टी के पास यह पद पिछले चार दशकों से भी ज्‍यादा समय से है। ऐसे में कांग्रेस इसे अपने पास रखना चाहती है। उनके मुताबिक, कुछ विपक्षी दलों की चाहत से वोटों काविभाजन होगा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा। कांग्रेस के एक वरिष्‍ठ राज्‍यसभा सदस्‍य ने इस पर तस्‍वीर साफ करने की कोशिश की। उन्‍होंने कहा, ‘पार्टी के वरिष्‍ठ नेता अन्‍य दलों के शीर्ष नेतृत्‍व से इस मसले पर बातचीत कर रहे हैं। सवाल नहीं है कि उम्‍मीदवार कांग्रेसी हो या गैर कांग्रेसी। हमलोग सभी विपक्षी दलों की ओर से सर्वमान्‍य प्रत्‍याशी तय करने पर चर्चा कर रहे हैं।’ हालांकि, कांग्रेस में इस बात को लेकर आमराय बढ़ती जा रही है कि जरूरत पड़ने पर पार्टी विपक्ष के सर्वमान्‍य उम्‍मीदवार को समर्थन देगी। वहीं, भाजपा के नेताओं का कहना है कि राज्‍यसभा में पार्टी के उम्‍मीदवार के जीतने पर विपक्ष को तगड़ा झटका लगेगा।

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