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टीवी डिबेट में राजपूत नेता का ऐलान- गांव में खुदवा ली है भंसाली और दीपिका की कब्र, जिंदा दफनाएंगे

वहीं करणी सेना के अध्यक्ष ने भी फिल्म के रिलीज होने पर धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि फिल्म रिलीज नहीं होनी चाहिए। हॉल पर जनता कर्फ्यू लगा दे।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स सोशल मीडिया)

सुप्रीम कोर्ट द्वारा रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पद्मावत’ की रिलीज को हरी झंडी देने के बाद विवाद धमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ लोगों ने देश में फिल्म रिलीज होने पर बुरे हालात पैदा करने की धमकी दी है। गुरुवार (18 जनवरी, 2017) को बिहार के कुछ सिनेमाघरों में प्रदर्शनकारियों द्वारा तोड़फोड़ की खबरें भी सामने आईं हैं। वहीं न्यूज चैनल एबीपी की लाइव डिबेट में मेरठ के स्थानीय राजपूत नेता ने फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की हत्या तक करने की धमकी दी है। डिबेट का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें कथित क्षत्रिय युवा महासभा का अध्यक्ष अभिषेक सोम कह रहा है कि मेरठ में उसने भंसाली और दीपिका पादुकोण की कब्रें खुदवा ली हैं। उन कब्रों में उन्हें (पद्मावत कलाकारों और निर्देशक) जिंदा दफनाएगा या मुर्दा दफनाएगा। हालांकि राजपूत नेता के इस बयान पर टीवी पत्रकार ने कड़ी फटकार लगाते हुए उसपर संविधान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है।

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बता दें कि गुरुवार को ‘पद्मावत’ पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम ने कहा कि जब सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिल गया है तो इस फिल्म को रिलीज होने से क्यों रोका जा रहा है। पद्मावत फिल्म को 25 जनवरी को रिलीज किया जाएगा। फिल्म को तमिल, तेलुगु और हिंदी में रिलीज किया जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है। फिल्म को रिलीज होने से नहीं रोका जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने एमपी, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान के आदेश पर रोक लगा दी है। यह राज्य अपने यहां फिल्म को रिलीज करने के खिलाफ हैं।

फिल्म निर्माताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने पद्मावत की कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि, ‘केंद्र सरकार से गुजारिश है कि वह राज्य सरकारों को एक बेहतर और प्रभावी कदम और समाधान के लिए निर्देश दे। यदि राज्य एक फिल्म पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, तो यह संघीय ढांचे को नष्ट कर रहे हैं। यह गंभीर मुद्दा है। अगर किसी को कोई समस्या है, तो वह राहत के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल में अप्रोच कर सकता है। राज्य को किसी फिल्म की सामग्री को छूने का हक नहीं है।’

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