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पूर्वोत्तर के सीमाई गांवों में उग्रवादियों का राज: राजनाथ सिंह

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि म्यांमा और भूटान की सीमा पर गंभीर सुरक्षा हालात हैं जहां उग्रवाद, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी की खबरें हैं...

Author July 12, 2015 08:44 am
उग्रवाद के बारे में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कई छोटे उग्रवादी समूह सीमा पर सुरक्षित शरणस्थलियों से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि म्यांमा और भूटान की सीमा पर गंभीर सुरक्षा हालात हैं जहां उग्रवाद, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी की खबरें हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के प्रबंधन के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है।

उन्होंने सुरक्षा व विकास पर पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-म्यांमा सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में 240 गांव हैं जहां दो लाख से ज्यादा की आबादी है। इनको कोई सुरक्षा कवर नहीं मिला है। ये गांव और यहां के ग्रामीण उग्रवादियों के रहमोकरम पर हैं। भारत-भूटान सीमा पर भी इसी तरह के हालात हैं।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय सीमा के प्रभावी प्रबंधन के लिए कदम उठा रहा है। मैं मुख्यमंत्रियों से आग्रह करना चाहता हूं कि वे सुरक्षा के इस निर्णायक क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करें। हमें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ विकास का भी ख्याल करना होगा। आप यह जानकार खुश होंगे कि सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत हमने क्षेत्र की हिस्सेदारी को 30 से 40 फीसद बढ़ा दिया है।

सिंह ने कहा कि भारत-म्यांमा सीमा पर हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों के बढ़ने की खबरें थीं। मैंने संयुक्त खुफिया समिति के अध्यक्ष आरएन रवि की अगुआई में समिति का गठन किया जो भारत-म्यांमा सीमा के प्रभावी प्रबंधन के कदम सुझाएगी। उन्होंने कहा कि सीमाई इलाकों में थाने खोलने और उनको मजबूती प्रदान करने से लोगों के बीच सुरक्षा का भाव पैदा होगा जो केंद्र की ‘लुक ईस्ट नीति’ के सफल कार्यान्वयन के लिए जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्रियों से सीमा पर बाड़ लगाने के लिए तत्काल जमीन देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अवैध हथियारों का भारी जमावड़ा है जो सीमा पार से तस्करी के जरिए लाए जाते हैं। अवैध हथियारों की मौजूदगी से अपराध बढ़ेंगे और क्षेत्र का सुरक्षा माहौल बिगड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अवैध हथियारों के खिलाफ तुरंत अभियान चलाने की अपील की।

सिंह ने पूर्वोत्तर में सुधरे सुरक्षा हालात को देखते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती में कमी की पैरवी की है। उन्होंने पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों से कहा कि सुरक्षा परिदृश्य में सुधार के मद्देनजर इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की समीक्षा करने की जरूरत है। मौजूदा समय में तैनाती उस समय के मुकाबले ज्यादा है जब उग्रवाद अपने चरम पर था। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्रियों से आग्रह करना चाहूंगा कि वे इन राज्यों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती का वास्तविक आॅडिट कराएं। बहरहाल, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती में आपके प्रयास में मदद मिलेगी।

सिंह ने मुख्यमंत्रियों को विकास पर ध्यान केंद्रित करके सुरक्षा हालात में सुधार के लिए उनके प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि मिजोरम, त्रिपुरा, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से उग्रवाद से मुक्त हैं। नगालैंड और मणिपुर में भी शांति के लिए मजबूत आकांक्षा है।

उग्रवाद के बारे में गृह मंत्री ने कहा कि कई छोटे उग्रवादी समूह सीमा पर सुरक्षित शरणस्थलियों से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। मेघालय के गारो पर्वतीय जिले में कुछ समूह फिरौती के लिए लोगों का अपहरण व लूटपाट कर रहे हैं। मैं यह पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता हूं कि केंद्र सरकार ऐसे आपराधिक तत्वों से बात नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि उग्रवादी समूहों में शामिल युवाओं का का मुख्य धारा में स्वागत है। लेकिन जिन्होंने जघन्य अपराध किया है, उन्हें न्याय की जद में आना होगा। विभिन्न समूहों के साथ मौजूदा शांति वार्ता के बारे में सिंह ने कहा कि बातचीत सही रास्ते पर है और सरकार को उम्मीद है कि बातचीत तार्किक नतीजे तक पहुंचेगी।

गृह मंत्री ने असम को भरोसा दिलाया कि ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन’ (एनआरसी) को अद्यतन करते समय सभी ‘वास्तविक’ भारतीय नागरिकों के हितों की हिफाजत की जाएगी। उन्होंने पूर्वोत्तर के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ सुरक्षा से जुड़ी एक बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मैं असम के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि सभी वास्तविक भारतीयों को एनआरसी में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनआरएसी के अद्यतन की प्रक्रिया सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है और केंद्र सरकार का इसमें कोई दखल नहीं है।

पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के बीच अंतरराज्यीय सीमा विवाद के बारे में सिंह ने कहा कि केंद्र ने सभी पक्षों को यथास्थिति कायम रखने का सुझाव दिया है क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। क्षेत्र में, खासतौर पर इस्लामिक चरमपंथ के बढ़ने के बारे में उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य को इस पर संयुक्त रूप से काम करना होगा। यह सिर्फ एक राज्य के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि यह देश के लिए भी है। हम इसे रोकने के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे।

मणिपुर ने आइएलपी की मांग उठाई:

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में इस क्षेत्र के पिछड़ेपन के लिए केंद्र सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जबकि मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने अपने राज्य के लिए केंद्र से इनर लाइन परमिट (आइएलपी) प्रणाली की मांग की ताकि स्थानीय लोगों का संरक्षण किया जा सके। गोगोई ने अंतरराज्यीय आतंकवाद निरोधक खुफिया प्रणाली बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया जबकि तुकी ने सीमा विवाद का मुद्दा उठाया।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री सरकार ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोही गतिविधियां बने रहने का प्रमुख कारण कम विकास और पिछड़ापन है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस क्षेत्र के विकास के लिए शायद ही कोई ध्यान दिया गया। दुखद यह है कि आजादी के बाद पिछले 68 सालों में केंद्र सरकार का रवैया भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पूर्वोत्तर के सभी मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भले ही विद्रोही गतिविधियां ऊपरी तौर पर एक सुरक्षा समस्या नजर आएं लेकिन इसकी जड़े गरीबी, असंतोष और वंचना में पैबस्त हैं। साथ ही विभिन्न ऐतिहासिक और राजनीतिक कारण भी हैं।

सम्मेलन में मणिपुर के मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि उनके राज्य में स्थानीय लोगों के सरंक्षण के लिए उपयुक्त कानून बनाने की मांग बढ़ रही है। मेघालय जैसे कुछ अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मांग है। इस मांग को लोगों का समर्थन मिल रहा है क्योंकि नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में आइएलपी प्रणाली है। सिंह ने कहा कि केंद्र को सभी पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आइएलपी की तर्ज पर एकसमान कानून लाना चाहिए…केंद्र सरकार को इस मुद्दे का कोई समाधान निकालना चाहिए।

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि पूर्वोत्तर में विद्रोह की समस्या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए अंतरराज्यीय आतंकवाद निरोधक खुफिया प्रणाली बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराज्यीय ढांचे की जरूरत है ताकि खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान और संयुक्त अभियानों में समन्वय को बेहतर किया जा सके और पड़ोस के राज्यों व देशों में घटनाक्रमों की निगरानी की जा सके।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने कहा कि उनके राज्य में असम के साथ अंतरराज्यीय सीमा विवाद और बाहर के भूमिगत समूहों की गतिविधियों सहित विभिन्न मुद्दों पर चुनौतियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर सहमति है कि यथास्थिति को बरकरार रखा जाए।

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