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मुगलों को भी पता था गोवध व्यावहारिक नहीं: राजनाथ सिंह

गोरक्षा पर जोर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि मुगलों तक को पता था कि यदि उन्हें शासन करना है तो ‘गोवध को खुला समर्थन’ व्यावहारिक नहीं होगा..

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह (पीटीआई फोटो)

गोरक्षा पर जोर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि मुगलों तक को पता था कि अगर उन्हें शासन करना है तो गोवध को खुला समर्थन व्यावहारिक नहीं होगा। जबकि ब्रितानी हुकूमत इस पहलू को समझने में नाकाम रही।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि गृह मंत्री के रूप में उन्होंने तय किया है कि बांग्लादेश को होने वाली मवेशियों की तस्करी रुके। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने इसके लिए लगातार प्रयास किए। राजनाथ ने कहा कि मेरे पास मुगल शासकों के बारे में जो भी अल्प जानकारी है, मैं कह सकता हूं कि मुगल शासकों को यह बात पता थी। वे समझते थे कि गोवध कर और गोवध को खुला समर्थन कर, वे लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि बाबर ने भी अपनी वसीयत में लिखा कि हम एक बार में दो चीजें नहीं कर सकते। या तो जनता के दिलों पर राज करो या गोमांस खाओ। केवल एक बात हो सकती है। साथ-साथ ये दोनों काम नहीं हो सकते। वे राष्ट्रीय गोधन महासंघ द्वारा कृषि मंत्रालय के सहयोग से आयोजित गोरक्षा पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे। राजनाथ सिंह ने कहा कि जब ब्रिटिश भारत आए, भारतीय परंपरा का जिस तरह आदर होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ। वस्तुत: यह और खराब हो गई। आजादी की पहली लड़ाई (1857) की वजहों में से एक मुख्य वजह गाय की चर्बी थी, जो कारतूस में इस्तेमाल होती थी। इससे गाय के प्रति जनता की आस्था का पता चलता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि गाय से जुड़े सभी वैज्ञानिक, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहलुओं पर भलीभांति विचार करने की जरूरत है। गृह मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद सरकार की ओर से गोरक्षा के लिए किए गए उपायों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बीएसएफ कर्मियों के प्रयासों की बदौलत बांग्लादेश को मवेशियों की तस्करी कम हुई है।

उन्होंने कहा कि जब मैंने कार्यभार संभाला, महीने भर के भीतर तय किया कि मैं गाय की तस्करी का भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौके पर जाकर जायजा लूंगा। तस्करी रोकना अत्यंत मुश्किल था। नदियां, दुर्गम जगह। आपको तस्करों से लड़ना है। मैं बीएसएफ जवानों के पास गया और कहा कि जब हम तस्करी रोक लें तभी इस बैठक को सफल माना जाएगा। सरकार ने गोरक्षा के लिए 500 करोड रुपए का आबंटन किया। भारतीय नस्ल की गायों पर अनुसंधान के लिए दो केंद्र बनाए गए हैं।

राजनाथ ने कहा कि बीएसएफ के कर्मियों ने बड़ी सफलता हासिल की है। बांग्लादेश के उच्चायुक्त और सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक मुझसे मिलने आए। जब मैंने तस्करी की बात उठाई तो उन्होंने सूचित किया कि जब से हमने गाय की तस्करी बंद की है, बांग्लादेश में ‘बीफ’ की कीमतें 50 फीसद बढ़ गई हैं। इससे मुझे कुछ हद तक संतोष पहुंचा। कीमतें बढ़ने से कुछ लोगों को चिंता हो सकती है। लेकिन मैं संतुष्ट हूं कि गाय की तस्करी काफी हद तक रुक गई। हम सीमा पर तस्करी बंद करने के लिए प्रयास करते रहेंगे। बीएसएफ ने सैकड़ों गाय तस्करों को गिरफ्तार किया है। मैं इसके लिए उन्हें बधाई देता हूं।

गो संरक्षण को जलवायु संकट और पारिस्थितिकी से जोड़ते हुए राजनाथ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिहाज से गो संरक्षण किसी भी कीमत पर किया जाना चाहिए। उन्होंने मांस निर्यात प्रतिबंधित करने के कानून लागू करने के लिए महाराष्ट्र और हरियाणा सरकारों की तारीफ की। गो संरक्षण के लिए जन जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने दावा किया कि विदेश में भारतीय गायों की काफी मांग है।

वहीं, केंद्रीय वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि दूध देना बंद कर देने वाली गायों को बेचने से किसानों को रोकने के लिए सरकार गाय रखने वालों को मुफ्त चारा मुहैया कराने की योजना पर विचार कर रही है। यह योजना ऐसी गायों की देखभाल के लिए तैयार की जा रही है जो दूध देना बंद कर देती हैं। इससे चारे के लिए मवेशियों को जंगल ले जाने से वन क्षेत्र को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकेगा। गाय द्वारा दूध देना बंद करने की स्थिति में गो संरक्षण के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना बड़ी चुनौती है। किसान गायों को तभी तक चारा खिलाते हैं, जब तक वह दूध देती है। लेकिन जब दूध देना बंद कर देती है तो वे आर्थिक मजबूरियों के कारण उसे कसाई को सौंप देते हैं। सरकार मनरेगा के तहत आने वाले वन क्षेत्र में घास उगाने का इरादा कर रही है। यह घास आसपास के किसानों को बिना कोई राशि लिए दी जाएगी।

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