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दो दिनों के दौरे पर कश्मीर पहुंचे राजनाथ, मुलाकात और बहिष्कार के साथ शुरू हुई बात

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अशांत कश्मीर के घावों पर मरहम लगाने लिए शनिवार को घाटी का दो दिवसीय अपना दौरा शुरू किया। दो कारोबारी संगठनों ने उनका बहिष्कार किया।

Author श्रीनगर | July 24, 2016 3:20 AM
राजनाथ सिंह। (फाइल फोटो)

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अशांत कश्मीर के घावों पर मरहम लगाने लिए शनिवार को घाटी का दो दिवसीय अपना दौरा शुरू किया। दो कारोबारी संगठनों ने उनका बहिष्कार किया। चार जिलों और श्रीनगर के कुछ हिस्सों से कर्फ्यू हटा लिया गया। लेकिन ऐहतियाती कदम के तौर पर अन्य क्षेत्रों में यह लागू रहा। पथराव की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर दिन शांतिपूर्ण बीता। अशांत घाटी में स्थिति में कुछ सुधार के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य का अपना दौरा शुरू किया। पिछली आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद यहां कई दिनों तक तनाव की स्थिति रही। सिंह ने उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह के अलावा राज्य की महबूबा मुफ्ती सरकार में शामिल भाजपा के कई मंत्रियों से भी मुलाकात की। मुसलिम मौलवियों के एक समूह ने भी उच्च सुरक्षा वाले नेहरू गेस्ट हाउस में सिंह से मुलाकात की। शिकारावाला और हाउसबोट मालिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी गृह मंत्री से मुलाकात की और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सिंह राज्यपाल एनएन वोहरा और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात करेंगे। सिंह जब यहां पहुंचे तो महबूबा नहीं थीं। वे सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए व्यक्तियों के परिवारों से मुलाकात करने गई हुई थीं। घाटी के दो प्रमुख व्यापारिक संगठनों कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआइ) और कश्मीर इकोनामिक्स अलायंस (केईए) ने यह कहते हुए गृह मंत्री से मुलाकात नहीं करने का फैसला किया कि पूर्व में ऐसे प्रयास निरर्थक रहे हैं। इस बीच पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि कर्फ्यू बांदीपुरा, बारामुला, बडगाम और गंदेरबल जिलों और श्रीनगर के कुछ हिस्सों से इन क्षेत्रों में स्थिति में सुधार के मद्देनजर हटा लिया गया। अधिकारी ने यद्यपि कहा कि जहां से कर्फ्यू हटाया गया है वहां धारा 144 के तहत चार या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर रोक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि घाटी के अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा और शोपियां जिलों और शहर के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू है।

सिंह अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों, नेताओं और अन्य से मुलाकात करेंगे। यद्यपि दोनों व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनका बहिष्कार करने का फैसला किया। दोनों व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों का शुक्रवार को सिंह से मुलाकात करने का कार्यक्रम था। इस बीच दक्षिण कश्मीर रेंज से दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है जो हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर वानी के मारे जाने के बाद से हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित रहा था। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी गुलाम हसन भट को नीतीश कुमार के स्थान पर डीआइजी, दक्षिण कश्मीर रेंज तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि एसएसपी अनंतनाग अब्दुल जब्बार का भी स्थानांतरण कर दिया गया है और उनके स्थान पर एसएसपी यातायात (ग्रामीण) जुबैर को भेजा गया है।

केईए ने गृह मंत्री को लिखे एक खुले पत्र में कहा कि वह स्थिति का जायजा लेने के लिए उनकी कश्मीर यात्रा की जरूरत नहीं समझ पा रहा है, ‘हम इस कवायद की निरर्थकता निश्चित कर सकते हैं’। व्यापारिक संगठन ने अपने पत्र में केंद्रीय मंत्रियों पर घाटी के लोगों के प्रति ‘अहंकार एवं दुश्मनी’ दिखाने का आरोप लगाया जिनकी समस्याओं के बारे में उन्हें ‘कोई वास्तविक जानकारी नहीं है’। केईए ने पत्र में लिखा, ‘आपके पूर्ववर्तियों ने ऐसी ही स्थितियों में इसी तरह की रणनीति का इस्तेमाल किया है। जब आप कुछ संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करके वापस जाएंगे तो यहां के लोगों से जुड़े सभी मुद्दे ठंडे बस्ते में चले जाएंगे और जमीनी हकीकत का समाधान किए बिना बयान जारी करेंगे। इसलिए श्रीमान सिंह हमने आपसे मुलाकात नहीं करने का फैसला किया है’।

केईए ने वानी के मारे जाने के बाद हिंसा के दिनों का उल्लेख किया जिसमें अभी तक 45 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। उसने सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनों को दबाने के लिए ‘अनुपातहीन बल’ प्रयोग करने का आरोप लगाया। कश्मीर चैंबर आॅफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआइ) ने कहा कि उसने भी सिंह से उनके दौरे के दौरान मुलाकात नहीं करने का फैसला किया। ऐसा इसलिए कि ‘मुलाकात करने का तब कोई मतलब नहीं जब बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं और पैलेट या गोलियां से बड़ी संख्या में लोग घायल हो रहे हैं’।
गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि सिंह ने अपने दौरे के पहले दिन करीब 15 प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इनमें सिख समुदाय, कश्मीरी पंडित, युवा, पर्यटन एवं होटल उद्योग एवं उद्यमियों के प्रतिनिधिमंडलों के अलावा कई व्यक्ति भी शामिल थे। सिंह रविवार को केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा एजंसियों के अलावा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात करेंगे।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘पूरे कश्मीर में स्थिति कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रही और कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की जानकारी नहीं मिली’। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों से पथराव की छिटपुट घटनाएं सामने आर्इं लेकिन उपद्रवियों को सुरक्षा बलों ने खदेड़ दिया। शनिवार देर शाम अधिकारियों ने पुराने शहर के हिस्सों में कर्फ्यू में ढील दी। लेकिन हाल में घाटी में लोगों के मारे जाने के खिलाफ कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। मोबाइल और टेलीफोन इंटरनेट सेवाएं शनिवार 15वें दिन भी निलंबित रहीं।

हाई कोर्ट ने दिया पैलेट गन बंद करने का सुझाव-

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने शनिवार को कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल को बंद कर देना चाहिए। न्यायालय ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान को देखते हुए यह सुझाव दिया। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा, ‘गृह मंत्री ने लोकसभा में कहा है कि पैलेट गन का विकल्प ढूंढने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी। पैलेट गन के इस्तेमाल को बंद करने के लिए यह बयान पर्याप्त होना चाहिए’। मुख्य न्यायाधीश एन पॉल वसंत कुमार और न्यायमूर्ति मुजफ्फर हुसैन अतहर के खंडपीठ ने कहा कि सिंह के बयान का यह भी मतलब है कि पैलेट गन घातक हैं। अदालत ने कहा कि गृह मंत्री के बयान का मतलब है कि कश्मीर में यह गैर घातक हथियार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को उचित, निष्पक्ष होना चाहिए। इसने कहा, ‘सुनिश्चित किया जाए कि रोगियों को चिकित्सा दी जाए। उन लोगों को दूसरे अस्पताल में भेजा जाए जिन्हें विशेष चिकित्सा की जरूरत है’।

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