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राजनाथ ने पूछा, विदेश दौरों पर क्या छिपाना चाहते हैं राहुल

देश यह जानना चाहता है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष छह मौकों पर 72 दिन विदेश में रहे और इस दौरान उन्होंने एसपीजी सुरक्षा नहीं ली और कानून का उल्लंघन करके खुद की सुरक्षा को खतरे में डाला।
Author नई दिल्ली | August 9, 2017 03:25 am
कांग्रेस के हंगामें के बाद लोकसभा में बोलते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह। (Photo: LSTV/PTI)

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को देश की अनमोल धरोहर बताते हुए कहा कि उन पर हुई पथराव की घटना को किसी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी किया कि देश यह जानना चाहता है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष छह मौकों पर 72 दिन विदेश में रहे और इस दौरान उन्होंने एसपीजी सुरक्षा नहीं ली और कानून का उल्लंघन करके खुद की सुरक्षा को खतरे में डाला। देश जानना चाहता है कि राहुल गांधी विदेश यात्रा के बारे में क्या छिपाना चाहते हैं? उन्होंने यहां तक कटाक्ष किया कि ऐसा लगता है कि राहुल गांधी आपदा राहत का जायजा लेने के बजाय वहां आपदा पर्यटन करने गए थे। गृह मंत्री ने यह बयान मंगलवार को लोकसभा में तब दिया जब गुजरात दौरे के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष के काफिले पर पथराव की घटना को लेकर कांग्रेस सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। सदस्यों बाकी ने इस घटना को राहुल गांधी की जान लेने का प्रयास बताया।

कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहली बार साढ़े ग्यारह बजे आधे घंटे के लिए और फिर 12 बजकर 20 मिनट पर दिनभर के लिए स्थगित हो गई। इस कारण मंगलवार को लोकसभा में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका। लोकसभा में मंगलवार को कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि गुजरात में बाढ़ पीड़ितों से मिलने गए राहुल गांधी पर जानलेवा हमला हुआ और अगर पत्थर कार की अगली सीट पर लगता तो उनकी जान जा सकती थी। गांधी परिवार से दो लोगों की जान गई है, वे शहीद के बेटे हैं, उनकी जान लेने की कोशिश हुई है, लेकिन हम डरने वाले नहीं है। हम महात्मा गांधी के अंहिसा के पथ पर चलने वाले हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आप हिंसा और घृणा की बातें करते हैं, हम अहिंसा की बात करते हैं। इस मामले में दोषियों को दंडित किया जाए और भाजपा माफी मांगे। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने 121 बार देश के विभिन्न स्थानों का दौरा किया और 100 बार एसपीजी कानून का उल्लंघन किया और सुरक्षा नहीं ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष छह दौरे पर 72 दिन विदेश में रहे और इस दौरान एसपीजी सुरक्षा नहीं ली और कानून का उल्लंघन करके अपनी सुरक्षा को खतरे में डाला। एसपीजी सुरक्षा संसद के कानून के तहत प्रदान की जाती है। लेकिन राहुल गांधी ने यह सुरक्षा नहीं लेकर कानून का उल्लंघन किया और स्वयं के प्रति भी लापरवाही बरती। इन उल्लंघनों के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी के कार्यालय को ध्यान दिलाया गया। इनके कार्यालय से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। गृह मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि राहुल गांधी आपदा राहत का जायजा लेने के बजाए वहां आपदा पर्यटन करने गए थे।

राजनाथ ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार और अन्य एजंसी ने सुरक्षा का पूरा प्रबंध किया था। लेकिन राहुल गांधी ने एसपीजी की बुलेट प्रूफ कार में बैठने की सलाह के बजाय गैर बुलेट प्रूफ कार में बैठने की अपने पीएस की सलाह को माना। राहुल गांधी लोगों से मिलने के लिए बार-बार कार से उतरते रहे, ऐसे स्थानों पर भी रुके जो पूर्व निर्धारित नहीं था। धनेरा गांव में उन्हें काले झंडे दिखाए गए और इसके बाद वे सात मिनट बाद ही वहां से रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि विदेश दौरे पर जाने के संबंध में भी राहुल गांधी कुछ घंटे पहले सूचित करते हैं। संसद के अधिनियम के तहत एसपीजी सुरक्षा प्रदान की जाती है। सुप्रीम कोर्ट में भी इस संबंध में निर्देश आ चुके हैं। एसपीजी सुरक्षा के बिना विदेश जाना कानून का उल्लंघन है।

इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने सवाल किया था कि जो लोग जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी करते हैं, उन्हें आतंकी कृत्य कहा जाता है, तो गुजरात में पत्थर फेंकने वालों को क्या कहा जाए। राहुल गांधी राष्ट्रीय नेता हैं और गुजरात में बाढ़ पीड़ितों से मिलने गए जहां 270 लोगों की जान जा चुकी है। गुजरात के मुख्यमंत्री उस स्थान पर पांच दिन बाद जाते हैं, लेकिन राहुल गांधी की गाड़ी पर पत्थर से हमला किया जाता है। हम पूछ रहे हैं कि मुख्यमंत्री पांच दिन कहां थे।  गृह मंत्री ने इसके जवाब में कहा कि क्या कारण है कि जिस पार्टी के नेता विपक्ष के हैं, वे वहां जाते हैं और लोग उन्हें काले झंडे दिखाते हैं, उनके खिलाफ नारेबाजी करते हैं, जबकि वहां के मुख्यमंत्री जाते हैं, तब ऐसी कोई घटना नहीं होती है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पत्थर फेंका, उन पर कार्रवाई हुई है, प्रदेश में राहुल गांधी की सुरक्षा में कहीं भी किसी भी प्रकार की कमी नहीं हुई। सुरक्षा की सारी व्यवस्था उस समय धरी की धरी रह जाती है जब सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति इसका उल्लंघन करते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि पत्थर किसी पर चले, राजनीतिक कार्यकर्ता पर चले, आम नागरिक पर चले अथवा सेना के जवान पर चले, इसे किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि राजनाथ सिंह ने सदन को गुमराह करने वाला बयान दिया है। उनकी इस बात का संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने कड़ा विरोध किया और कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं। कुमार ने कहा कि कांग्रेस बताए कि राहुल गांधी कहां-कहां जा रहे हैं और वे एसपीजी सुरक्षा कवर क्यों नहीं ले रहे हैं। एसपीजी सुरक्षा पर सरकार इतना खर्च करती है और सरकार उन्हें पूरी सुरक्षा दे रही है। इसके बावजूद वे एसपीजी सुरक्षा कवर क्यों नहीं ले रहे हैं? कांग्रेस सदस्य इस मुद्दे को लेकर फिर से आसन के समक्ष आकर पोस्टर दिखाने लगे। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने इसी बीच कहा कि राहुल गांधी पर हमला बेहद निंदनीय और गरिमा के खिलाफ है और साथ ही यह समाज में बढ़ती असहिष्णुता का भी परिचायक है। उन्होंने मांग की कि सदन को इस घटना की निंदा करनी चाहिए और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सदस्य भी आसन के समक्ष नारेबाजी कर रहे कांग्रेस सदस्यों के साथ शामिल होकर नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने इसके बाद शून्यकाल शुरू करवाया, लेकिन हंगामे को बढ़ता देख कुछ ही देर बाद सदन की बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी।

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