राजनाथ सिंह ने इंदिरा गांधी की तारीफ करते हुए कही ये बात, पाकिस्तान के साथ हुई जंग का भी किया जिक्र

राजनाथ सिंह ‘सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे, इसी दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।

Rajnath Singh
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले प्रतिभा पाटिल भारत की राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर थीं। (फोटो- PTI)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तारीफ की है। शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन के एक सेमिनार में उन्होंने इंदिरा गांधी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ 1971 की जंग के दौरान इंदिरा गांधी ने अपनी लीडरशिप का परिचय दिया।

इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले प्रतिभा पाटिल भारत की राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर थीं।

सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी जब पीएम थीं तो भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 1971 की जंग जीती थी और एक नया देश, बांग्लादेश बना। सदियों से महिलाएं पालक और रक्षक की भूमिका निभाती आ रही हैं।

दरअसल राजनाथ सिंह ‘सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे, इसी दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि महिलाओं को पहले ही सैन्य पुलिस कॉर्प्स में शामिल किया जा चुका है। अगले साल से महिलाएं हमारी प्रमुख तीनों सेवाओं के लिए पूर्व-कमीशन प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हो सकेंगी। इस वेबिनार में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने भी हिस्सा लिया।

सिंह ने कहा कि युद्ध के नजरिए से पुरुषों और महिलाओं की भूमिका के बीच का अंतर बहुत धुंधला होता जा रहा है। महिलाओं ने अपनी क्षमताओं को साबित किया है।

बता दें कि इससे पहले राजनाथ सिंह सावरकर पर दिए गए बयान की वजह से चर्चा में थे। उन्होंने कहा था कि सावरकर ने महात्मा गांधी के कहने पर दया याचिका दाखिल की थी।

राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वीर सावरकर के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया था। इसी दौरान उन्होंने कहा था कि सावरकर को लेकर कई तरह के झूठ फैलाए गए।

राजनाथ ने कहा था कि ये कहा जाता रहा है कि सावरकर ने अंग्रेजों के सामने कई बार दया याचिका दाखिल की, जबकि सच ये है कि उन्होंने ऐसा गांधीजी के कहने पर किया था। उन्होंने कहा कि सावरकर बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने हमेशा देश और राष्ट्र के लिए काम किया।

उन्होंने कहा कि कम्यूनिस्ट और फांसीवादी विचारधारा के इतिहासकारों ने सावरकर को बदनाम करने की कोशिश की और सावरकर के प्रति देश में नफरत फैलाई।

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