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राजीव गांधी फाउंडेशन को रिलायंस इंडस्ट्रीज से लेकर मेहुल चौकसी, टीवीएस मोटर तक ने दिए डोनेशन, देखें- दानदाताओं की लिस्ट

मेहुल चौकसी की कंपनी ने भी राजीव गांधी फाउंडेशन को चंदा दिया है। बीते शनिवार को भाजपा ने भी आरोप लगाया कि मेहुल चौकसी ने राजीव फाउंडेशन को भारी रकम दी।

RGF donationsकांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और साथ में हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी। (PTI)

केंद्र सरकार ने बुधवार (8 जुलाई, 2020) को एक अंतर-मंत्रालयी टीम गठित की जो राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) एवं नेहरू-गांधी परिवार से संबंधित दो अन्य न्यासों द्वारा धनशोधन और विदेशी चंदा सहित विभिन्न कानूनों के कथित उल्लंघन के मामलों की जांच करेगी। इस बीच वो कथित लिस्ट भी सामने आई है जिसमें आरजीएफ को डोनेशन देने वालों के नाम हैं।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स नाऊ द्वारा साझा की गई इस लिस्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, सतलुज टेक्सटाइल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इंडियन मेल्टिंग एंड रिफाइनिंग कंपनी लिमिटेड, टीवीएस मोटर कंपनी और यूनिटेक वायरलेस ने आरजीएफ को डोनेशन दिया। यूनिटेक के पूर्व एमडी संजय चंद्रा यूनिटेक द्वारा घर खरीदारों के पैसे की कथित तौर पर धोखाधड़ी से संबंधित मामले में साल 2017 से जेल में बंद थे। हालांकि माता-पिता के बीमार होने और उनके हॉस्पिटल में भर्ती होने के चलते सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी।

इसी तरह आरजीएफ को जीवीके इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड, नेशनल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट मिशन और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने डोनेशन दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मेहुल चौकसी की कंपनी ने भी राजीव गांधी फाउंडेशन को चंदा दिया है। बीते शनिवार को भाजपा ने भी आरोप लगाया कि मेहुल चौकसी ने राजीव फाउंडेशन को भारी रकम दी। यह रकम मेहुल के स्वामित्व वाली कंपनी नविराज इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दी गई थी।

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फ‍िलहाल कितनी रकम दी गई थी इसका पता अभी नहीं चल पाया है। चोौकसी 13000 करोड़ रुपए के बीएनबी घोटाले का आरोपी और देश छोड़कर फरार हो चुका है। इस घोटाले का मास्टरमाइंड हीरा कारोबारी नीरव मोदी है, जो परिवार के साथ देश छोड़कर फरार हो गया।

इधर आरजीएफ के खिलाफ जांच पर भाजपा ने कहा कि केंद्र सरकार यह आदेश हाल ही में सार्वजनिक हुई जानकारी का ‘स्वाभाविक’ परिणाम है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक अंतर-मंत्रालयी टीम का नेतृत्व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक विशेष निदेशक करेंगे।

प्रवक्ता ने ट्वीट कर कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), आय कर कानून, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किए जाने के मामलों में जांच में समन्वय के लिए एक अंतर-मंत्रालयी टीम गठित की है।’

इधर कांग्रेस ने सरकार के कदम को ‘दुर्भावनापूर्ण साजिश’ करार देते हुए कहा कि वह एवं उसका नेतृत्व इन धमकाने वाले प्रयासों से डरने वाले नहीं हैं।

बता दें कि राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना 1991 में ‘पूर्व प्रधानमंत्री के आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के उद्देश्य से की गई थी। इस फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। अन्य न्यासियों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, भूतपूर्व योजना आयोग के पूर्व उपप्रमुख मोंटेक सिंह अहलुवालिया, सुमन दूबे, अशोक गांगुली और संजीव गोयनका शामिल हैं।

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