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नहीं रहे जस्‍टिस राजेन्‍द्र सच्‍चर, इन कारणों से हमेशा रखे जाएंगे याद

जस्टिस राजेन्द्र सच्चर संसद में महिलाओं को आरक्षण देने के समर्थक भी थे। उनका मानना था कि महिलाओं को संसद में आरक्षण देने से कानूनी मामलों में लैंगिक भेदभाव खत्म हो सकता है।

rajinder sachar दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर। (Express Photo/Arul Horizon/File)

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सच्चर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस राजेन्द्र सच्चर का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 94 साल के थे और फिलहाल बीमार चल रहे थे। पूर्वाह्न 11 बजे उन्होंने एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है। आज शाम करीब 5 बजे उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा। जस्टिस राजेन्द्र सच्चर की पहचान एक न्यायाधीश के साथ ही शीर्ष मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है, जिन्होंने अल्पसंख्यकों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर बहुचर्चित रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सच्चर कमेटी रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। अपनी इस रिपोर्ट में जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने भारत में मुस्लिम समुदाय के सामने आ रही परेशानियों का जिक्र किया था। साथ ही इस रिपोर्ट में उन्होंने देश में मुस्लिमों की स्थिति सुधारने के उपाय भी सुझाए थे। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भारत में मुस्लिमों की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजाति से भी बदतर बतायी गई थी।

जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने अपना न्यायिक करियर साल 1950 में शिमला में एक वकील के तौर पर शुरु किया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सिविल, आपराधिक और राजस्व संबंधी मामलों की प्रैक्टिस की। साल 1972 में राजेन्द्र सच्चर को दिल्ली हाईकोर्ट में 2 साल के लिए एडिशनल जज नियुक्त किया गया। जज राजेन्द्र सच्चर ने राजस्थान हाईकोर्ट के जज के तौर पर भी काम किया। साथ ही वह सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश के तौर पर भी काम कर चुके थे। जज राजेन्द्र सच्चर अपने न्यायिक करियर के दौरान ही सामाजिक मुद्दों पर काफी मुखर रहे। 1990 में रिपोर्ट ऑन कश्मीर सिचुएशन के लिए भी वह चर्चा में रहे। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजीज मुशाबेर अहमदी द्वारा मानवाधिकार के मुद्दों पर गठित की गई एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी नियुक्त किए गए। इस कमेटी की अध्यक्षता खुद मुख्य न्यायाधीश ने की थी।

जस्टिस राजेन्द्र सच्चर संसद में महिलाओं को आरक्षण देने के समर्थक भी थे। उनका मानना था कि महिलाओं को संसद में आरक्षण देने से कानूनी मामलों में लैंगिक भेदभाव खत्म हो सकता है। साल 2003 में जज राजेन्द्र सच्चर और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने इराक में अमेरिका द्वारा किए गए हमले की आलोचना की थी। मानवाधिकार के क्षेत्र में किए गए काम के लिए जस्टिस राजेन्द्र सच्चर हमेशा याद किए जाएंगे। देश में मुसलमानों की स्थिति पर उन्होंने 403 पेज की बहुचर्चित सच्चर कमेटी रिपोर्ट पेश की थी। सच्चर कमेटी का गठन साल 2005 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा किया गया था। इसके अगले साल यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई। 7 सदस्यीय सच्चर कमेटी ने देश में मुसलमानों की तरक्की में आने वाली रुकावटों का बखूबी वर्णन किया था और उनके समाधान का रास्ता भी सुझाया।

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