ताज़ा खबर
 

सावरकर पर सेमिनार: नाम से ‘वीर’ हटाने के बाद अब राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम के लिए जगह देने से किया इनकार

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च (आईसीएचआर) के उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया जिसमें वीडी सावरकर पर सेमीनार करने की अनुमति मांगी गई थी।

Author नई दिल्ली | Published on: November 12, 2019 9:39 AM
वीडी सावरकर को वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है। (फाइल फोटो)

राजस्थान में कार्यभार संभालने के छह महीने के भीतर ही सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने छात्रों के लिए स्कूल पाठ्य पुस्तकों में कई बदलाव किए। इसमें एक बदलाव राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंडरी कि किताबों में किया गया, जिसमें वीडी सावरकर (वीर सावरकर) के नाम के आगे से ‘वीर’ शब्द को हटा दिया गया है। ऐसा कक्षा 12वीं की इतिहास की किताब में सावरकर की भूमिका में संशोधन कर किया गया।

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने अब इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च (आईसीएचआर) के उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया जिसमें वीडी सावरकर पर सेमीनार करने की अनुमति मांगी गई थी। इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एक स्वायत्त शैक्षणिक निकाय है।

कार्यक्रम आईसीएचआर नियोजित मल्टी-सिटी टॉक सीरीज का हिस्सा था, जिसके तहत सोमवार (11 नवंबर, 2019) को ‘The truth about Savarkar’ लॉन्च किया गया। खास बात है कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर इस कार्यक्रम के आयोजन की योजना बनाई गई। भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिन पर हर साल यह दिवस मनाया जाता है।

मामले में आईसीएचआर के अधिकारियों ने बताया, ‘टॉक सीरीज में मुख्य रूप से ‘स्वतंत्रता संग्राम के 1857 के युद्ध पर सावरकर और उनके लेखन के बारे में झूठ का सामना’ पर केंद्रित होती। एक अंग्रेजी अखबार ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के जरिए इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘सावरकर के कुछ पहलु खासे विवादास्पद थे, जिसके चलते सेमिनार के लिए जगह के अनुरोध अस्वीकार कर दिया।’ सावरकर पर ICHR के अन्य सेमिनार जयपुर, गुवाहाटी, पोर्ट ब्लेयर, पुणे और कुछ अन्य शहरों में आयोजित किए जाने थे।

जानना चाहिए कि इससे पहले सावरकर से जुड़े पाठ्यक्रम में जो बदलाव किए गए उन नई किताबों में अब वीर सावरक का नाम विनायक दामोदर सावरकर है। जिसमे लिखा गया है कि कैसे जेल में बंद होने के दौरान सावरकर ने अंग्रेजों को चार बार दया याचिका के लिए पत्र लिखा। यही नहीं दूसरी दया याचिका में उन्होंने खुद को पुर्तगाली बताया और साावरकर ने भारत को हिंदू देश बनाने की दिशा में काम किया। इस किताबों में यह भी लिखा है कि सावरकर ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 आतिश तासीर बोले- चुनौती दूंगा मोदी सरकार के फैसले को, सही नहीं होगा यूं ही छोड़ देना
2 पूर्व आर्मी अफसर की मौत के चीन और 65 करोड़ के FD से जुड़े तार! खुफिया जानकारी चुराने में हुए थे गिरफ्तार
3 Shiv Sena पर भड़के गिरिराज सिंह- ‘हिंदुत्व विरोधियों संग जा रहे हैं, आज कराह रहे होंगे बालासाहेब ठाकरे’
जस्‍ट नाउ
X