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Rajasthan: शेखावत ने ठप्पा लगा दिया कि कांग्रेस सरकार गिराने में वो मिले हुए थे- गहलोत ने सचिन पायलट का नाम ले BJP को घेरा

बता दें कि अशोक गहलोत का एक वीडियो भी सामने आया है। जिसमें वो शेखावत को लेकर कह रहे हैं कि सबको मालूम है कि आप एक्सपोज हो गए हैं। दुनिया जानती है कि वॉइस आपकी है।

Rajasthan CM, Ashok Gehlot
Ashok Gehlot Jodhpur (Photo Credit : द इंडियन एक्सप्रेस)

राजस्थान में फोन टैपिंग का मामला एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल यह मामला दो साल पहले राज्य में आए सियासी संकट से जुड़ा हुआ है। मालूम हो कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में केंद्रीय मंत्री शेखावत को मिले नोटिस पर सीएम गहलोत ने निशाना साधा है। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो कहते नजर आ रहे हैं कि आप सरकार गिराने में मुख्य किरदार थे। आपने खुद ने सरकार गिराने का षड्यंत्र किया।

दरअसल राज्य सरकार के मुख्य व्हिप डॉ. महेश जोशी की तरफ से एसीबी में दर्ज एफआईआर के बाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को जांच एजेंसी ने नोटिस दिया है। नोटिस में वॉइस सैंपल के लिए तामील कराया गया है। ऐसे में सीएम अशोक गहलोत ने शेखावत पर निशाना साधते हुए कहा है, “आप सरकार गिराने में मुख्य किरदार थे। आपने खुद ने सरकार गिराने का षड्यंत्र किया, अब आप जो सचिन पायलट जी का नाम ले रहे हो कि उन्होंने चूक कर दी, इससे तो और साफ हो गया। आपने खुद ही ठप्पा लगा दिया कि आप उनके साथ मिले हुए थे।”

मालूम हो कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि था कि सचिन पायलट से चूक हो गई नहीं तो मध्यप्रदेश जैसे हालात राजस्थान में भी होते। सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ में मीडिया से बात करते हुए राजस्थान के सीएम ने कहा कि गजेंद्र सिंह शेखावत को कोर्ट का नोटिस मिला है। वो बचते रहे, बचते रहे, ये तो कानून अपना काम करे। उन्होंने कहा कि गजेंद्र सिंह शेखावत को अपनी आवाज का सैंपल देने में क्या दिक्कत है। वो एक्सपोज हो गए है।

केंद्रीय मंत्री को मिले नोटिस पर सीएम गहलोत ने कहा कि अब केंद्रीय मंत्री के ऊपर है कि वो वॉइस सैम्पल देंगे या नहीं। शिकायत को 2 साल से ज्याद हो चुके हैं। एसीबी ने इच्छा भी जाहिर की लेकिन किन्हीं कारणों के चलते कार्रवाई टलती रही। इस संबंध में कोर्ट ने कब और क्या आदेश दिया मुझे खुद जानकारी नहीं, मुझे तो मीडिया से पता चला।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की परिस्थिति सबके सामने है लेकिन यह अच्छी परंपरा नहीं है। पहले मध्यप्रदेश, राजस्थान और फिर महाराष्ट्र। लोकतंत्र के लिए ये बहुत ही अशुभ संकेत है। लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप होती है।

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