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अशोक गहलोत को निर्देश, सचिन पायलट पर बदलें सुर; दोस्त के लिए राहुल गांधी खुला रखना चाहते हैं दरवाजा, 18 महीने सीएम का भी दिया था प्रस्ताव

राहुल गांधी और सचिन पायलट में कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही लेकिन सूत्र बताते हैं कि सचिन पायलट के बीजेपी न ज्वाइन करने के बयान के बाद कांग्रेस के रुख में बड़ा बदलाव आया है।

achin pilot, rajasthan, congressराहुल गांधी के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सूबे के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः रोहित जैन पारस)

राजस्थान के सियासी ड्रामे में सीएम अशोक गहलोत ने फिलहाल बाजी मार ली है और सचिन पायलट हाशिए पर जाते नजर आ रहे हैं लेकिन इस बीच कांग्रेस हाईकमान की तरफ से अशोक गहलोत को साफ संदेश भेजा गया है कि वो अपने पूर्व डिप्टी पर सियासी निशाना साधने से परहेज करें। गहलोत ने पायलट पर खुद विधायकों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपने दोस्त सचिन पायलट की घर वापसी के लिए रास्ता सुरक्षित रखना चाहते हैं। उन्होंने पायलट के लिए कांग्रेस का दरवाजा खुला रखा है। बुधवार को पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इसके संकेत दिए।

हालांकि, राहुल गांधी और सचिन पायलट में कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही लेकिन सूत्र बताते हैं कि सचिन पायलट के बीजेपी न ज्वाइन करने के बयान के बाद कांग्रेस के रुख में बड़ा बदलाव आया है। पिछले हफ्ते के अंत में राहुल गांधी की सचिन पायलट से बात हुई थी लेकिन प्रियंका गांधी तीन बार बात कर चुकी हैं। सूत्र बता रहे हैं कि राहुल गांधी ने अपने दोस्त को आखिर के 18 महीनों के लिए मुख्यमंत्री बनाने का वादा भी किया था लेकिन सचिन पायलट नहीं माने और वो बगावत पर उतर आए।

इधर, अशोक गहलोत ने तेजी से चाल चलते हुए सचिन पायलट समेत 19 विधायकों को स्पीकर से नोटिस जारी करवा दिया है। विधायकों के घर के बाहर ये नोटिस चिपका दिए गए हैं। इतना ही नहीं गुर्जर समुदाय से एक डिप्टी सीएम बनाने की भी कोशिशें हो रही हैं और नाराज विधायकों को मंत्री पद देकर फिर से पार्टी के अंदर लाने की कोशिशें भी हो रही हैं।

इधर, केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर पार्टी प्रवक्ता सुरजेवाला ने बुधवार को कहा कि सचिन पायलट अगर बीजेपी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं तो वो वापस आकर पार्टी फोरम में अपनी बात रखें और सरकार में वापसी करें। एक दिन पहले ही सुरजेवाला ने गरम रुख दिखाते हुए उन्हें न सिर्फ डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का एलान किया था बल्कि उन्हें यह भी बताया था कि पार्टी ने एक युवा नेता को कम समय में कितना कुछ दिया।

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