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गाड़ी पर ‘जाट’, ‘पत्रकार’, ‘एडवोकेट’ दिखने पर अब जुर्माना! धर्म-पेशे के बारे में लिखवाने पर यहां कटेगा चालान

ट्रैफिक विभाग का यह आदेश सिविल राइट्स सोसायटी द्वारा इस मसले पर चिंता जाहिर करने के बाद आया है। दरअसल, नौ अगस्त 2019 को सोसायटी ने ट्रैफिक विभाग को एक खत लिखा था।

शहर के ट्रैफिक विभाग ने बुधवार को इस संबंध में एक आदेश भी जारी किया है। (क्रिएटिवः नरेंद्र कुमार)

गाड़ियों की नंबर प्लेट पर अपना धर्म जाति, पेशे या फिर संबंधित राजनीतिक पार्टी का ब्यौरा लिखवाने में गर्व समझते हैं तो जरा सावधान हो जाएं। अब जाट, गुर्जर, मीणा, पुलिस, पत्रकार, एडवोकेट, भाजपाई और कांग्रेसी जैसे तमाम शब्द गाड़ी पर दिखने के बाद आप पर जुर्माना हो सकता है। दरअसल, राजस्थान में परिवहन विभाग ने धर्म और पेशे के बारे में अपने वाहन पर लिखवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के तहत पेनाल्टी लगाने का फैसला लिया है।

तीन सितंबर को ट्रैफिक एसपी द्वारा जारी किए आदेश के मुताबिक, अगर वाहन चालकों ने इस संबंध में नियमों का उल्लंघन किया, तब उनके खिलाफ सख्त ऐक्शन लिया जाएगा। पत्र में यह भी कहा गया- गाड़ियों पर लिखे स्लोगन्स या ऐसे स्टिकर्स (खासकर विंड स्क्रीन पर) बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं, क्योंकि ये ड्राइविंग के दौरान अन्य राहगीरों का ध्यान सड़क, रास्ते और अन्य चीजों से भटकाते हैं, जिससे दुर्घटना होने की आशंका रहती है।

वरिष्ठ ट्रैफिक पुलिस अफसर ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, “नंबर प्लेट पर इस तरह क लिखना हमेशा से अवैध रहा है और ऐसा करने पर पांच हजार रुपए का जुर्माना है।” हालांकि, सूबे में वाहनों की बॉडी और विंडस्क्रीन पर ऐसे शब्दों के इस्तेमाल पर कितना जुर्माना लगेगा? फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है, पर विभाग इसके जरिए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गाड़ियों से इस तरह के शब्द, नाम, स्लोगन और चीजें हटें, ताकि अन्य ड्राइवर्स न भटकें।

वैसे, मोटर व्हीकल्स एक्ट 1988 के सेक्शन 177 के मुताबिक, “अगर अपराध पर किसी प्रकार की पेनाल्टी न हो, तब पहली बार गलती करने पर 100 रुपए अधिकतम जुर्माना लिया जाएगा, जबकि बार-बार उसे दोहराने पर यह रकम 300 रुपए तक भी जा सकती है।”

ट्रैफिक विभाग ने क्यों उठाया कदम?: ट्रैफिक विभाग का यह आदेश सिविल राइट्स सोसायटी द्वारा इस मसले पर चिंता जाहिर करने के बाद आया है। दरअसल, नौ अगस्त 2019 को सोसायटी ने ट्रैफिक विभाग को एक खत लिखा था, जिसमें कहा गया था, “गाड़ियों पर जाति, पद व गांव का नाम आदि लिखने का चलन तेजी से बढ़ा है। समाज में ऐसी चीजें सांप्रदायिकता और जातिवाद को बढ़ावा दे रही हैं।” संगठन ने यह भी दावा किया था कि सूबे में लोग गाड़ियों पर इसके अलावा अपने नामों के साथ तरह-तरह के स्लोगन भी लिखते हैं, जिसका संज्ञान लेते हुए ट्रैफिक विभाग ने यह कदम उठाया है।

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