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राजस्थान में विधायक और पार्षद भी बनवाएंगे शौचालय

राजस्थान में शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी से अब विधायकों और पार्षदों को जोड़ा जाएगा। प्रदेश के शहरी इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को भागीदार बनाया जाएगा।

राजस्थान में विधायक और पार्षद भी बनवाएंगे शौचालय
राजस्थान में शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी से अब विधायकों और पार्षदों को जोड़ा जाएगा। प्रदेश के शहरी इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को भागीदार बनाया जाएगा। इससे पहले इसकी जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारी ही निभा रहे थे। जनप्रतिनिधियों के जुड़ने से आम लोगों को भी इस अभियान से प्रेरणा मिलेगी।
राज्य के शहरी निकायों का विभाग स्वायत्त शासन महकमा शौचालय निर्माण के अभियान को गति देने में लगा है। सरकारी अफसरों के भरोसे चल रहे इस काम में लोगों की रुचि नहीं होने के बाद अब जनप्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके लिए छोटे और बड़े नगरों में शौचालय बनाने के लिए तय किए गए स्थानों की सूची स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सौंपी जाएगी।
इनमें इलाके के विधायक के साथ ही नगर निकायों के वार्ड पार्षदों को भी सूची मुहैया कराई जाएगी। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत ही शहरों को खुले में शौच से मुक्त करने की मुहिम शुरू की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार पूरा आर्थिक सहयोग स्थानीय निकायों को मुहैया करा रहा है। स्वायत्त शासन विभाग का कहना है कि प्रदेश में सभी कस्बों और शहरों में शौचालय निर्माण के लिए स्थान तय कर लिए गए हैं। इन्हीं जगहों की सूची अब विधायक और पार्षदों को दी जाएगी।
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक पुरुषोत्तम बियाणी ने बताया कि जनप्रतिनिधियों की भागीदारी होने से शौचालय निर्माण का काम तेजी से हो सकेगा। इससे उन्हें भी पता रहेगा कि उनके इलाके में किस जगह पर शौचालय निर्माण हो रहा है। इसमें सार्वजनिक और सामुदायिक तौर पर बनाए जाने वाले शौचालयों के बारे में जनप्रतिनिधि अपनी राय भी दे सकेंगे।
विभाग ने तमाम नगर निकायों को इस काम को पहली प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। जनप्रतिनिधियों को इससे जोड़ने की मंशा से आम नागरिकों को सुविधा भी हासिल हो सकेगी। प्रदेश में पंचायतराज चुनाव के दौरान उम्मीदवार बनने वालों के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि उनके यहां शौचालय होना चाहिए।
इसका काफी अच्छा असर भी हुआ। प्रदेश में 17 अगस्त को होने वाले 129 नगर निकायों के चुनाव में भी उम्मीदवार बनने वालों के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ ही उनके घर पर शौचालय होना जरूरी किया गया है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों में बालिकाओं के लिए अलग से शौचालयों का नहीं होना गंभीर समस्या बना हुआ है।
प्रधानमंत्री के सफाई अभियान के बाद ग्रामीण इलाकों में विद्यालयों में शौचालयों को लेकर लोगों में खासी जागरूकता आई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रदेश के कई इलाकों में विद्यालयों शौचालयों का निर्माण होने लगा है। इसमें पंचायतराज के जनप्रतिनिधियों की सबसे ज्यादा भागीदारी सामने आई है। ग्राम पंचायतों के सरपंच और प्रधानों ने अपने-अपने इलाकों के विद्यालयों में जनसहयोग से शौचालय बनाने की मुहिम छेड़ रखी है।

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