HPCL Refinery Fire Accident: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राजस्थान के पचपदरा में स्थापित देश की सबसे बड़ी HPCL की ऑयल रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे लेकिन सोमवार को अचानक इसी रिफाइनरी एक यूनिट में भीषण आग लग गई। आग लगने के बाद रिफाइनरी से धुंए के तेज गुबार उठाने लगे उसके बाद कर्मचारियों ने फायर सेफ्टी सिस्टम को चालू कर आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया और अग्निशमन टीम और कंपनी के विशेषज्ञों की घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

इस अग्निकांड को लेकर भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के परिसर में कच्चा तेल डिस्टिलेशन इकाई के पास आग लग गई थी लेकिन इस आग पर काबू पा लिया गया है। आग लगने की इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि आग लगने के कारणों का पता लगाने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

उद्घाटन का कार्यक्रम कैंसिल

रिफाइनरी के उद्घाटन को लेकर मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि उद्घाटन कार्यक्रम की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में कहा कि आज एचआरआरएल रिफाइनरी में क्रूड डिस्टिलेशन इकाई के आसपास आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण प्रधानमंत्री द्वारा 21 अप्रैल को प्रस्तावित उद्धाटन कार्यक्रम को स्थगित किया गया है। आग पर काबू पा लिया गया है और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

79,450 करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को इस रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। उनका बालोतरा के पचपदरा में स्थित भारत के पहले नए एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोरसायन परिसर राष्ट्र को समर्पित करने का कार्यक्रम था। यह परियोजना 79,450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से विकसित की गई है।

यह भारत के ऊर्जा और पेट्रोरसायन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित की गई है। इसकी सालाना क्षमता 90 लाख टन होगी।

बात सिर्फ आय की नहीं, दिहाड़ी मजदूरों की चुनौतियां बेशुमार हैं

नोएडा की एक गारमेंट फैक्ट्री में एक कुर्ता या शर्ट बनाने के काम को तय कामों के एक क्रम में बांटा जाता है। मजदूर घंटों तक एक ही काम दोहराते हैं। 38 साल के दिनेश श्रीवास्तव इसी लेबर चेन का हिस्सा हैं। दिनेश सिलाई मशीन चलाते हैं और आस्तीन-कॉलर सिलते हैं। वह अपनी टेबल पर झुके हुए बैठते हैं क्योंकि उनकी पीठ को आराम देने या सीधे होने के लिए भी कोई सहारा नहीं है। पढ़िए पूरी खबर…