राजस्थान हाईकोर्ट ने ‘जेन जी’, ‘जेन अल्फा’ और ‘जेन बीटा’ से जुड़े मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट अब अपने इस आदेश पर काफी सख्त है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने स्कूलों को यह निर्देश दिया है कि इस आदेश का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही हर स्कूल चार हफ्ते के भीतर स्कूल खाद्य सुरक्षा और पोषण समिति का गठन करें, जिसमें शिक्षक, अभिभावक और छात्र प्रतिनिधि शामिल हों।

हाईकोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि समितियों की जानकारी शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। आठ सप्ताह के अंदर स्कूल कैंटीन के लिए यह जरूरी है कि वे सभी अपने मेन्यू में ऐसे खानों को शामिल करें जिसमें कैलोरी कम हो और उस खाने में इस्तेमाल की गई सामग्री और पोषण तत्वों की जानकारी होनी चाहिए।

बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंतित हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने आजकल के बच्चों के साथ ‘जंक फूड’, अत्यधिक ‘स्क्रीन टाइम’, प्रश्न पत्र लीक, ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और AI के (एआई) के दौर में सीखने की बुनियादी क्षमताओं के कम होने संबंधी आशंका पर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में AI और ‘डिजिटल लर्निंग’ जरूरी है इसलिए प्रौद्योगिकी बुनियादी रूप से सीखने के कौशल का विकल्प नहीं बननी चाहिए।

कोर्ट ने पेपर लीक को लेकर जताई चिंता

हाईकोर्ट ने ‘डिजिटल लर्निंग’ और सीखने के पारंपरिक तरीकों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए हाथ से लिखने, किताबें पढ़ने, नोट्स बनाने, स्वतंत्र रूप से सोचने और लिखित परीक्षाओं को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। बेंच ने बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई-लिखाई की योजना पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही परीक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा भी कम होता है। इसने प्रश्नपत्र लीक को रोकने के लिए पूरी तरह त्रुटिरहित व्यवस्था का आह्वान किया।

‘स्कूलों में इन कमियों को किया जाए दूर’

अदालत ने अधिकारियों को ग्रामीण और दूर-दराज के सरकारी स्कूलों में नजर आने वाली कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। इनमें शिक्षकों के खाली पद, स्मार्ट कक्षाएं, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य जांच, शौचालय, पीने का पानी और खेल-कूद की सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा, इसने केंद्र और राज्य सरकारों से ‘जेन ज़ी’ से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक योजना तैयार करने को कहा। इन चुनौतियों में शिक्षा और रोजगार के बीच का अंतर, गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, किफायती हॉस्टल और आवास, ‘डिजिटल डिटॉक्स’ कार्यक्रम, डेटा निजता और साइबर सुरक्षा शामिल हैं।

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कॉकरोच जनता पार्टी के सह संयोजक आशुतोष रांका अपनी टीम के साथ ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत जयपुर के पास बागरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया, जिसको लेकर राजनीतिक बवाल काफी बढ़ गया। यहां पढ़ें पूरी खबर…