राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। इस सप्ताह की शुरुआत में छुट्टी पर गए न्यायमूर्ति शर्मा ने आरोप सामने आने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है।
सोमवार को न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की। इसके बाद वह न्यायमूर्ति शर्मा की जगह राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल सकते हैं।
न्यायमूर्ति शर्मा ने हिंदी में जारी किया बयान
न्यायमूर्ति शर्मा ने हिंदी में जारी अपने बयान में कहा, “मीडिया और सोशल मीडिया में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं इन सभी आरोपों से इनकार करता हूं। सभी आरोप बेबुनियाद हैं और इन्हें माननीय न्यायाधीश ने व्यक्तिगत रंजिश के कारण लगाया है।”
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी स्थिति सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के सामने रख दी है। न्यायमूर्ति शर्मा के अनुसार, न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने अपने पत्रों में जो आरोप लगाए हैं, वे झूठे, बेबुनियाद और तथ्यों से रहित हैं और उन्होंने इन आरोपों का सबूतों के साथ खंडन किया है।
दरअसल, इसी महीने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप मेहता की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भेजे गए पत्र सार्वजनिक हुए थे। न्यायमूर्ति मेहता ने 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजे थे। इन पत्रों की प्रतियां सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम के अन्य सदस्यों को भी भेजी गई थीं।
इन पत्रों में न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति शर्मा पर “शक्तियों के दुरुपयोग” का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। उनके अनुसार, इन शिकायतों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की “ईमानदारी और निष्पक्षता” को लेकर सवाल खड़े होते हैं। न्यायमूर्ति मेहता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का किसी दूसरे हाई कोर्ट में तबादला करने और राजस्थान हाई कोर्ट में नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग भी की थी।
अपने बयान में न्यायमूर्ति शर्मा ने मीडिया, वकीलों और अन्य लोगों से अपील की कि वे न्याय के सिद्धांतों का सम्मान करें और तब तक धैर्य रखें, जब तक भारत के मुख्य न्यायाधीश इस मामले में कोई फैसला नहीं लेते। उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने यह भी कहा कि जब सही समय आएगा और मुख्य न्यायाधीश इसकी अनुमति देंगे, तब वह खुद मीडिया के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने लोगों से तब तक धैर्य रखने की अपील की।
इस बीच, राजस्थान में वकीलों के संगठनों ने भी न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। इस सप्ताह की शुरुआत में जयपुर में कुछ वकील 31 अगस्त को उनके न्यायालय के बाहर बैठ गए और उनके खिलाफ नारे लगाए।
वहीं, जोधपुर में दोनों वकील संगठनों ने हड़ताल की घोषणा की। इन संगठनों की मांग है कि न्यायमूर्ति शर्मा को उनके न्यायिक और प्रशासनिक दोनों कार्यों से मुक्त किया जाए।
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जयपुर में वकीलों के एक समूह ने सोमवार को राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इसके अलावा जोधपुर में वकीलों के संगठन ने हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन की वजह की बात करें तो संजीव प्रकाश शर्मा कथित तौर पर सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा लिखे गए पत्र के बाद से विवादों में घिरे हुए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
