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मुख्य सचिव नहीं बनने पर लगाया जातीय भेदभाव का आरोप, इस्लाम कबूला

राजस्थान के वरिष्ठ आइएएस अफसर उमराव सालोदिया ने खुद के दलित होने के कारण सरकार पर भेदभाव बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दलित होने के कारण ही उन्हें मुख्य सचिव नहीं बनाया गया..

आइएएस अफसर उमराव सालोदिया

राजस्थान के वरिष्ठ आइएएस अफसर उमराव सालोदिया ने खुद के दलित होने के कारण सरकार पर भेदभाव बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दलित होने के कारण ही उन्हें मुख्य सचिव नहीं बनाया गया और मौजूदा मुख्य सचिव सीएस राजन को तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया। सालोदिया ने गुरुवार को कहा कि हिंदू धर्म में भेदभाव होता है इसलिए वे अब धर्म बदल कर इस्लाम धर्म अपना रहे है। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का एलान भी किया। सालोदिया के सेवा काल में अभी छह महीने शेष है।

सरकार ने सालोदिया के भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सेवा में रहते हुए सालोदिया ने मीडिया में जाकर सरकार की आलोचना की है। सालोदिया ने आल इंडिया सर्विस रूल्स के आचरण नियमों का उल्लघंन किया है। राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम रोडवेज के चेयरमैन आइएएस अफसर सालोदिया के इस फैसले से प्रदेश की पूरी नौकरशाही में हड़कंप मच गया। मुख्य सचिव स्तर के 1978 बैच के आइएएस अफसर सालोदिया ने गुरुवार को प्रेस कांफें्रस में जिस तरह से सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया, उससे सरकार और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। प्रदेश के मुख्य सचिव सीएस राजन को रिटायर होने वाले थे। पर मुख्यमंत्री की पसंद होने के नाते राजन को तीन दिन पहले ही तीन महीने का सेवा विस्तार मिल गया। राजन के ही बैच के अधिकारी उमराव सालोदिया को उम्मीद थी कि सरकार उन्हें मुख्य सचिव बना देगी। पर राजन को सेवा विस्तार मिलने से सालोदिया की उम्मीदों पर पानी फिर गया। सालोदिया ने गुरुवार को यहां राज्य सरकार पर जाति के नाम पर भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना था कि पहली बार किसी दलित अफसर को मुख्य सचिव बनने का मौका मिल रहा था। पर सरकार में बैठे लोगों को यह बर्दास्त नहीं हुआ। इसको लेकर सालोदिया ने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि वरिष्ठता के नाते मुझे मुख्य सचिव बनाया जाना चाहिए था पर मौजूदा मुख्य सचिव को सेवा विस्तार देने के कारण मुझे मौका नहीं मिला।

सालोदिया का कहना है कि वीआरएस लेने का उन्हें अधिकार है। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को तीन महीने का नोटिस भी दे दिया है। उनके वीआरएस के आवेदन के तहत उन्हें इसकी मंजूरी 31 मार्च, 2016 को मिल जाएगी। उन्होंने हिंदू धर्म छोड़ कर मुसलिम बनने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब उन्हें उमराव खान नाम से जाना जाए। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकार के तहत ही उनकी मुसलिम धर्म में आस्था है और वे इसे अपना रहे हैं। उनका कहना है कि इस्लाम धर्म में जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है और उसमें एक ही ईश्वर को माना जाता है।

सालोदिया के इस्लाम कबूल करने पर मंत्री राठौड़ ने कहा कि सालोदिया भयमुक्त रहें। सरकार उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई नहीं करेगी। उनका इस्लाम कबूल करना व्यक्तिगत कारण है। भेदभाव के कारण इस्लाम कबूल करने की बात कहना उचित नहीं।

इस पूरे मामले में विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि सालोदिया के आरोप, वीआरएस की अर्जी और उनका धर्म परिवर्तन भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। यहां जारी एक बयान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली से व्यथित व प्रताड़ित होकर आइएएस अधिकारी सालोदिया ने स्वैच्छिक सेवानिवृति का निर्णय किया है। चिंता की बात यह है कि सरकारी व्यवस्था की उदासीनता के कारण उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है।

संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने मीडिया के सामने सरकार का पक्ष का रखा। राठौड़ का कहना है कि सरकार किसी भी तरह से कोई भेदभाव नहीं करती है। सालोदिया ने जिस तरह से सरकार के प्रशासनिक फैसलों की आलोचना की है वो सेवा नियमों के आचरण के खिलाफ है। मुख्य सचिव किसे बनाया जाए, यह सरकार का अधिकार है। इस मामले में सरकार अफसर की कार्यशैली और उसकी प्रशासनिक दक्षता का आकलन करती है। राठौड़ का कहना है कि सालोदिया ने सेवा में रहते हुए जिस तरह का आचरण किया है, उसे ठीक नहीं ठहराया जा सकता है। अफसरों की वरिष्ठता सूची में सालोदिया अभी तीसरे स्थान पर है। इसलिए उन्हें तीन महीने तक इंतजार करना चाहिए।

राठौड़ ने कहा कि सालोदिया के खिलाफ राजस्व मंडल में रहते हुए पिछली तिथि में सरकारी टिप्पणी लिखने का एक मुकदमा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज है। हमें नहीं मालूम कि वरिष्ठ अधिकारी किसके इशारे पर ऐसा कर रहे हैं। लेकिन सेवानिवृत्ति से छह महीने पहले इस तरह के मिथ्या आरोप लगाना उन्हें शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि कैलाश मेघवाल राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष हैं और ललित के पंवार राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं और ये सभी एससी-एसटी हैं।

सालोदिया 1978 बैच के आइएएस अफसर हैं और फिलहाल वरिष्ठता सूची में तीसरे स्थान पर हैं। उनसे पहले इसी बैच के राजीव महर्षि दो साल के सेवा विस्तार के कारण अभी केंद्र सरकार में गृह सचिव हैं। उनके बाद सीएस राजन भी तीन महीने के सेवा विस्तार के कारण अभी प्रदेश के मुख्य सचिव हैं। महर्षि और राजन के बाद ही सालोदिया हैं। सालोदिया का रिटायरमेंट जून, 2016 में होना है पर उन्होंने अब वीआरएस के लिए अर्जी दे दी है।

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