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नौकरशाही को कसने में जुटी वसुंधरा सरकार

राजस्थान में प्रशासनिक लापरवाही का खमियाजा भुगतने वाली वसुंधरा सरकार अब नौकरशाही को कसने में जुट गई है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जिलों के प्रशासन और पुलिस...

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

राजस्थान में प्रशासनिक लापरवाही का खमियाजा भुगतने वाली वसुंधरा सरकार अब नौकरशाही को कसने में जुट गई है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जिलों के प्रशासन और पुलिस महकमे की खामियों को दूर करने की कोशिश में है। जिलों में प्रशासन तंत्र की मजबूती से ही सरकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने की कवायद की तैयारी की गई है। इसके लिए ही बुधवार से यहां सभी जिलों के कलक्टर और एसपी की तीन दिन की कांफे्रस के जरिए वसुंधरा सरकार नौकरशाही से रूबरू हो रही है।

राज्य में डेढ़ साल से शासन कर रही भाजपा की वसुंधरा सरकार को अब जिलों के प्रशासनिक तंत्र को जनता के मुताबिक काम करने की नसीहत देनी पड़ रही है। प्रदेश में हाल में कई इलाकों में घटी घटनाओं के कारण सरकार को खासी बदनामी भी झेलनी पड़ी थी। इनमें नागौर जिले में जमीन विवाद के कारण दबंगों ने चार दलितों को मार डाला था। इनके अलावा पिछले समय में किसानों की आत्महत्याओं के कई मामले सामने आने से भी सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी का सामना करना पड़ा था।

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इसके अलावा जयपुर में मंदिर तोड़ने के मसले पर भी नौकरशाही की कार्यप्रणाली के कारण सरकार को अपने ही समर्थक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इन सबको देखते हुए ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्देश पर बुधवार से यहां प्रदेश के सभी 33 जिलों के कलक्टर और पुलिस अधीक्षकों का साझा सम्मेलन किया जा रहा है। यह तीन दिन तक चलेगा और इसमें जनसमस्याओं को सुलझाने के साथ ही आम आदमी से जुड़ाव की पहल को आगे बढ़ाया जाएगा। इस कांफे्रंस में प्रदेश के तमाम आला प्रशासनिक और पुलिस अफसरों के साथ सभी मंत्री भी हिस्सा ले रहे हैं। जनता से जुड़े विभागों के प्रमुख सचिव इसमें अपने महकमों की कार्ययोजना भी पेश कर रहे है।

जिला कलक्टरों की कॉन्फ्रेंस के पहले दिन बुधवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कई मुद्दों पर नौकरशाही के रवैए को लेकर अपनी नाराजगी भी जताई। राजे ने जनप्रतिनिधियों के पत्रों के जवाब नहीं देने की कलक्टरों की कार्यशैली को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि मैं जब मुख्यमंत्री होते हुए 5 हजार पत्रों का जवाब दे सकती हूं तो कलक्टर कैसे नहीं दे सकते। फोन नहीं उठाने की कलक्टरों की आदत पर भी मुख्यमंत्री खासी खफा दिखीं। उन्होंने कहा कि मैं खुद फोन नहीं उठाने पर बाद में बात करती हूं और कलक्टरों को जनप्रतिनिधियों से बात करनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कलक्टर और एसपी के आम जन के प्रति व्यवहार में भी सुधार लाने की नसीहत दी। मुख्यमंत्री को पिछले कुछ समय से विधायक लगातार शिकायतें कर रहे थे कि कलक्टर और एसपी उनके पत्रों का जवाब नहीं देते हैं और फोन तक नहीं उठाते हैं। विधायकों की शिकायतों के बाद ही मुख्यमंत्री ने बुधवार को सबसे ज्यादा हिदायत इसी बात को लेकर दी।

मुख्यमंत्री ने जिलों की विकास योजनाओं को लेकर भी कलक्टरों को निर्देश दिया कि स्थानीय जरूरतों और हालात के मुताबिक योजनाएं बनाई जाएं। उन्होंने नवंबर में होने वाले रिसर्जेंट राजस्थान को देखते हुए जिलों में औद्योगिक भूमि के आरक्षण के साथ ही उद्योगों के लिए तय की गई भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के निर्देश भी दिए। प्रदेश को 2018 तक खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान की प्रभावी निगरानी करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने अफसरों को बगैर इजाजत के मुख्यालय नहीं छोड़ने की हिदायत भी दी। उनका कहना था कि इससे सरकारी काम के साथ आम आदमी को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

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