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राजस्थानः सेंट्रल जेल में कैदियों से वसूली रैकेट चलवाते थे अफसर, ACB ने किया भांडाफोड़

आईजी दिनेश एमएन के हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया कि भ्रष्ट आचरण में पाए गए आरोपी जेल कर्मचारी संजय सिंह, कैसा राम, प्रधान बाना अजमेर जेल में तैनात हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

राजस्‍थान के अजमेर में जेल अफसरों द्वारा वसूली रैकेट चलाने का मामला सामने आया है। वह भी जेल के भीतर। पुराने कैदी नए कैदियों से चौथ वसूली करते थे। इसका हिस्‍सा जेल कर्मचारियों को भी जाता था। एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो (एसीबी) ने इसका भांडाफोड़ किया है। एसीबी की कार्रवाई पर चार जेल अफसरों सहित सात को गिरफ्तार किया गया है।

सूत्रों के हवाले से स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि एसीबी ने कार्रवाई के दौरान अजमेर जेल के तीन कार्मिक और जयपुर जेल के एक कर्मचारी समेत तीन दलालों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, कथित गिरोह जेल के कैदियों को धमकाता था और सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर वसूली करता था, जबकि इस रैकेट के जरिए वसूली में मिलने वाली रकम पुराने कैदी और जेल अफसरों-कर्मचारियों के बीच बंट जाती थी।

आईजी दिनेश एमएन के हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया कि भ्रष्ट आचरण में पाए गए आरोपी जेल कर्मचारी संजय सिंह, कैसा राम, प्रधान बाना अजमेर जेल में तैनात हैं। वहीं, चौथे जेलकर्मी अरुण सिंह चौहान की पोस्टिंग जयपुर सेंट्रल जेल में है।

जेल कर्मचारियों के अलावा दलालों की शिनाख्त सागर, पोलू और दीपक ऊर्फ सनी के तौर पर हुई है। सनी मौजूदा समय में परोल पर है, जबकि एसीबी ने उसके अजमेर स्थित आवास पर छापा भी मारा।

डीजी आलोक त्रिपाठी व आईजी दिनेश एमएन के निर्देशन में एसपी एसीबी अजमेर के डॉ. राजीव पचार के नेतृत्व में एसीबी की हालिया कार्रवाई जयपुर, अजमेर और भीलवाड़ा के सात अधिकारियों की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

आईजी दिनेश एमएन के अनुसार, आरोपियों में कैसाराम और संजय सिंह इन दिनों अजमेर के जेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।

इसी बीच, खबर है कि सेंट्रल जेल में बैन चीजों, मोबाइल और बाकी डॉक्यूमेंट्स की सूचना पर एसीबी ने तलाशी अभियान चलवाया और उस दौरान कई प्रतिबंधित चीजें बरामद की गईं।

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