West Bengal Election News: साल 2023 में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख शहीद दिवस रैली में समर्थकों के विशाल जनसमूह के सामने खड़ी एक युवती ने इतना प्रभावशाली भाषण दिया कि दिग्गज नेताओं को भी झुकना पड़ा। उनका लयबद्ध और जोशीला नारा, “ जुलमी जब जब जुलुम करेगा, चप्पा चप्पा गूंज उठेगा ममता दीदी के नारों से” तुरंत वायरल हो गया। इसने एक नई राजनीतिक शक्ति के उदय का संकेत दिया।

मार्च 2026 तक आते-आते उभरती हुई स्टार राजन्या हलदर ने बड़ा बदलाव कर लिया है। अब वह किसी पार्टी की वफादार कार्यकर्ता नहीं रहीं, बल्कि अपने जनसंग्राम मंच का चेहरा बन चुकी हैं और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो महत्वपूर्ण सीटों से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। उनका गृह क्षेत्र सोनारपुर दक्षिण और औद्योगिक केंद्र आसनसोल दक्षिण हैं।

सोनारपुर दक्षिण में, हलदर खुद को स्टार से भरी त्रिकोणीय लड़ाई में पाती हैं। उनका मुकाबला वर्तमान अभिनेता से नेता बनी टीएमसी की अरुंधति (लवली) मैत्रा और बीजेपी की कद्दावर नेता रूपा गांगुली से है। दोनों प्रमुख दलों की मजबूत मशीनरी के बावजूद, हलदर अविचल बनी हुई हैं। हलदर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हम जानते हैं कि हम 2026 में सरकार नहीं बना सकते, लेकिन सरकार गठन में हम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जीत हो या हार, हम जनता के लिए लड़ते रहेंगे।”

कौन हैं राजन्या हलदर?

हल्दर की राजनीतिक विचारधारा में सक्रियता की गहरी जड़ें हैं। उनका पालन-पोषण कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ। उनके पिता टीएमसी में शामिल होने और पश्चिम बंगाल कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर एसोसिएशन में सेवा देने से पहले छात्र परिषद के नेता थे। उन्होंने 10वीं क्लास तक जादवपुर विद्यापीठ में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल में दाखिला लिया। बाद में उन्होंने प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी से बंगाली में स्वर्ण पदक के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री भी ली। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी से बीएड की उपाधि भी पूरी की।

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उन्होंने पहली बार 2022 में सुर्खियां बटोरीं, जब एक पूर्व छात्रा के रूप में उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का झंडा लेकर राष्ट्रपति भवन के गेट पर चढ़ाई कर दी। उनका यह कदम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और वह चर्चा में आ गईं।

हलदर और टीएमसी के बीच कब बढ़ीं दूरियां

हालांकि, 2024 में हलदर और टीएमसी नेतृत्व के बीच दूरियां और बढ़ गईं। आरजी कर कांड के दौरान, टीएमसीपी के जादवपुर जिले की उपाध्यक्ष के रूप में काम करते हुए, उन्होंने ‘तिलोत्तमा’ विरोध प्रदर्शनों पर केंद्रित एक शॉर्ट फिल्म बनाई। इसके लिए उन्हें पार्टी के गुस्से का सामना करना पड़ा। बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया।

कासबा लॉ कॉलेज की घटना के बाद दरार एक गहरी खाई में बदल गई। इसमें हलदर ने सनसनीखेज आरोप लगाए कि टीएमसी के एक वर्ग ने पार्टी के कनिष्ठ सदस्यों की आपत्तिजनक एआई फोटों वायरल कीं। जनसंग्राम मंच के माध्यम से हलदर खुद को टीएमसी-बीजेपी के द्वंद्व के तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित कर रही हैं।

हलदर का चुनावी एजेंडा दो मुद्दों पर केंद्रित

हलदर ने कहा, “हम सात निर्वाचन क्षेत्रों से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। हमारा इरादा बिल्कुल स्पष्ट है। हम जानते हैं कि हम 2026 में सरकार नहीं बना सकते, लेकिन सरकार गठन में योगदान देकर हम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” उनका चुनावी एजेंडा दो स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है, पहला तो बेरोजगारी और दूसरा महिलाओं की सुरक्षा। घर-घर जाकर प्रचार करते हुए उन्होंने कहा, “यह सिर्फ आरजी कर की बात नहीं है; इसमें कस्बा लॉ कॉलेज, कुलतुली और अन्य क्षेत्र भी शामिल हैं।” उन्होंने स्थानीय बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति की ओर भी इशारा किया और सोनारपुर में लगातार जलभराव और साफ पानी की कमी को वादे पूरे न होने का सबूत बताया।

जैसे-जैसे वह दक्षिणी उपनगरों में आगे बढ़ती है, वह महज एक नया चेहरा नहीं रह जाती। वह एक राजनीतिक दिग्गज के रूप में उभरती है। सोनारपुर के एक स्थानीय मतदाता ने टिप्पणी की, “बंगाल की शोरगुल भरी और चुनौतीपूर्ण राजनीति में उन्होंने साबित कर दिया कि वह एक विद्रोही हैं जो उन आदेशों का पालन करने के बजाय अकेले लड़ना पसंद करती हैं जिन पर उन्हें विश्वास नहीं होता।”

कलिता माझी फिर लड़ेंगी चुनाव

कलिता माझी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए दिन-रात प्रचार कर रही हैं। वह 10 सालों से ज्यादा वक्त से राजनीति में सक्रिय हैं और यह दूसरी बार है जब भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पूर्वी बर्दवान जिले के औसग्राम से उम्मीदवार बनाया है। पढ़ें पूरी खबर…