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कलक्‍टरी छोड़ भाजपा में शामिल हुए ओम प्रकाश चौधरी, राजनीति में चमक चुके हैं आईएएस छोड़ने वाले ये नाम

ओम प्रकाश चौधरी पहले आईएएस अफसर नहीं हैं जिन्होंने सिविल सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति की राह पकड़ी हो। इससे पहले भी कई आईएएस और आईपीएस अफसर नौकरी छोड़कर पॉलिटिक्स ज्वाइन कर चुके हैं।

Author August 28, 2018 6:41 PM
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के साथ पूर्व आईएएस अफसर ओम प्रकाश चौधरी। (फोटो- ट्विटर)

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के कलक्टर ओम प्रकाश चौधरी ने तीन दिन पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की नौकरी छोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली। माना जा रहा है कि वो बीजेपी के टिकट पर रायगढ़ के खरसिया सीट से किस्मत आजमा सकते हैं। सूत्र बता रहे हैं कि राज्य के सीएम रमन सिंह की तरफ से ही चौधरी को चुनाव लड़ने का ऑफर मिला है। बहरहाल ओम प्रकाश चौधरी पहले आईएएस अफसर नहीं हैं जिन्होंने सिविल सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति की राह पकड़ी हो। इससे पहले भी कई आईएएस और आईपीएस अफसर नौकरी छोड़कर पॉलिटिक्स ज्वाइन कर चुके हैं।

अजीत जोगी को छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल है। उन्होंने भी आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति की राह पकड़ी थी। वो मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। शुरुआत में उनका चयन आईपीएस में हुआ था। बाद में वो आईएएस बने फिर सिविल सेवा की नौकरी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए।

के जे अल्फोंस मोदी सरकार में पर्यटन मंत्री हैं और राज्यसभा के सांसद हैं। उन्होंने भी आईएएस की 26 साल पुरानी नौकरी छोड़कर साल 2006 में राजनीति में एंट्री ली थी। अल्फोंस शुरुआत में कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता थे लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर लिया। केरल के कोट्टयम को 100 फीसदी साक्षर बनाने का रिकॉर्ड अल्फोंस के नाम है।

यशवंत सिन्हा पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने कुछ महीने पहले ही बीजेपी छोड़ने और चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा की है। इन्होंने भी आईएएस की नौकरी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। सिन्हा का चयन 1960 में आईएएस में हुआ था। 24 साल की नौकरी के बाद उन्होंने नवगठित जनता पार्टी ज्वाइन किया था। वो वाजपेयी सरकार में देश के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी रह चुके हैं।

जय प्रकाश नारायण आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं और लोकसत्ता पार्टी के अध्यक्ष हैं। वो फिजिशियन हैं। मेडिकल डिग्री के बाद इन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की और 1980 में देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया। करीब 16 साल तक सिविल सेवा की नौकरी के बाद जयप्रकाश ने इस्तीफा दे दिया और राजनीति का रास्ता अपना लिया। उन्होंने अपनी पार्टी बनाई। 2009 से 2014 तक वो कुक्कटपल्ली से विधायक रहे।

देबब्रत कांठा ने राहुल गांधी के आह्वान पर साल 2008 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी थी और पॉलिटिक्स ज्वाइन कर ली थी। कांठा आंध्र प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर थे जो ओडिशा में तैनात थे।

जेसुदासु सीलम कांग्रेस के नेता हैं। राजनीति में आने से पहले वो आईएएस अफसर थे। उन्होंने 1984 से 1999 तक सिविल सर्विस की नौकरी की। इसके बाद आईएएस की नौकरी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। वो आंध्र प्रदेश से दो बार राज्यसभा के सांसद भी चुने गए। पिछली यूपीए सरकार में वो वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बतौर सलाकार भी काम कर चुके हैं।

जे सुंदरा शेखर भी आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं और 1983 बैच के आईएएस अफसर रहे हैं। उन्होंने साल 2013 में पष्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के सीईओ पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर राजनीति में पदार्पण कर लिया था। शेखर ने 2014 के आंध्र प्रदेश विधान सभा चुनाव में गुंटूर जिले की तडिकोंडा सीट से इंडियन क्रिश्चन सेक्यूलर पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन वो जीत नहीं सके।

के पी रमैया बिहार कैडर के 1986 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। उन्हें सीएम नीतीश कुमार का नजदीकी समझा जाता रहा है। इसी वजह से उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर जनता दल यूनाइटेड ज्वाइन कर लिया था और साराराम सुरक्षित संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं सके। नीतीश के महादलित आयोग के वो अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

इनके अलावा कई आईपीएस. आईएफएस और आईआरएस अफसर रहे हैं जिन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति में एंट्री ली है। लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर भी आईएफएस अफसर थे जिन्होंने नौकरी छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा था।

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