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विशेष: रेत का इत्र और सावन की लोर

अंग्रेजी में ‘लोर’ यानी परंपरा पर राजस्थान में ‘लोर’ यानी सावन का संगीत। धूप की सिगड़ी से सिकी मिट्टी के सीने में ठंडक पहुंचाने वाले पहले छींटे जो मिट्टी का इत्र बिखेरते हैं उसका अपना विज्ञान भी है, अपनी भाषा भी।

Author Published on: July 8, 2020 2:43 AM
Rajasthan, Rainy Season, Loreराजस्थान की बारिश में लोर शब्द का प्रचलन बहुत है। यह शब्द संगीत और बारिश में सुनाई देता है।

वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ क्षिप्रा माथुर अपनी एक शोधपूर्ण रपट में बताती हैं कि राजस्थान में सावन में बरसने वाली बारिश को ‘लोर’ कहते हैं। अंग्रेजी में ‘लोर’ यानी परंपरा पर राजस्थान में ‘लोर’ यानी सावन का संगीत। धूप की सिगड़ी से सिकी मिट्टी के सीने में ठंडक पहुंचाने वाले पहले छींटे जो मिट्टी का इत्र बिखेरते हैं उसका अपना विज्ञान भी है, अपनी भाषा भी।

पहली बारिश की सोंधी खुशबू यानी ‘पेट्रीकोर’। ग्रीक भाषा का शब्द। सूखे का सामना कर रहे पौधे खास तरह का तेल मिट्टी पर छिड़कते हैं ताकि आसपास के पौधों को पानी की जरूरत कम पड़े। यह द्रव है पाल्मिटिक या स्टीयरिक ऑयल।

इस तेल और सूखी मिट्टी में पल रहे एक्टिनोमाइसिन जीवाणु पर जब हल्की फुहारें बुलबुले बनाती हैं तो ये फटते जाते हैं और हवा में बिखरे इन महीन बुलबुलों से तेल और जीवाणु के मेल से बना असल इत्र बिखरता है- ‘जिओस्मिन’। सावन खूब जोर बरसता है, फिर ‘लोर’ भादो में झड़ी बनकर आती है और सूखी रेत का इत्र हवा हो जाता है।

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