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अब हर बार धुलेगा ट्रेनों में मिलने वाला कंबल, बदलेगा रंग, वजन भी होगा कम

अब ट्रेनों में मिलने वाले कंबलों की एक बार इस्तेमाल के बाद धुलाई होगी। इसके साथ ही मौजूदा कंबलों को सॉफ्ट फेब्रिक से बने हल्के वजन वाले कंबलों से बदला जा रहा है

Author नई दिल्ली | March 13, 2016 12:48 pm
भारतीय रेलवे (फाइल फोटो)

अब ट्रेनों में मिलने वाले कंबलों की एक बार इस्तेमाल के बाद धुलाई होगी। इसके साथ ही मौजूदा कंबलों को सॉफ्ट फेब्रिक से बने हल्के वजन वाले कंबलों से बदला जा रहा है, जिनकी एक बार यूज के बाद धुलाई हो सकेगी। अभी तक कंबलों की धुलाई दो महीने में एक बार होती थी, जबकि, चादरों, तकियों के खोलों को हर दिन साफ किया जाता था। गौरतलब है कि ट्रेनों में रेल यात्रियों को मिलने वाले चादरों, तकियों और कंबलों से दुर्गंध आने की शिकायतों के बीच रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा था कि कंबलों की धुलाई दो महीने में एक बार की जाती है।

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रेलवे के लिए नए कंबल राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) द्वारा डिजाइन किए जा रहे हैं, जिन्हें हर यूज के बाद धोया जा सकेगा। नए कंबल कॉटन और वूल से बनाए जाएंगे। इसके साथ ही नए कंबल नए रंगों के साथ भी दिखाई देंगे। एक सर्वे में सामने आया था कि रेल यात्री सफेद कंबल की बजाए रंगीन कंबल लेना पसंद करते हैं। ऐसे में नए कंबलों के रंगों पर भी काम करने का फैसला किया गया।

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सिन्हा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान फरवरी में विभिन्न सदस्यों के पूरक सवालों के जवाब में कहा था कि चादरों, तकियों के खोलों को हर दिन साफ किया जाता है जबकि कंबलों को दो महीनों में धोया जाता है। कुछ सदस्यों ने ट्रेनों में रेलवे द्वारा दिए जाने वाले चादरों, कंबलों आदि की सफाई को लेकर शिकायतें की थीं। इस पर सभापति हामिद अंसारी ने कहा कि अपना बिस्तरबंद ले जाने का पुराना चलन ही अच्छा था। सिन्हा ने कहा कि यह अच्छी सलाह है और रेलवे को कोई समस्या नहीं होगी अगर यात्री उस चलन को स्वीकार करना चाहते हैं।

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उन्होंने कहा कि यात्रियों से बेडरॉल की गुणवत्ता के संबंध में समय-समय पर पत्र प्राप्त होते रहते हैं। उन उचित कार्रवाई की जाती है। सिन्हा ने कहा कि इससे पहले आउटसोर्स की गई लांड्री सेवाओं के बारे में घटिया धुलाई को लेकर नियमित शिकायतें मिलती रहती थीं। इसलिए रेल ने अपने नियंत्रण में मशीनीकृत लांड्रियां स्थापित करने का निश्चिय किया। अब तक 41 ऐसी लांड्रियां स्थापित कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि अगले दो साल में 25 और ऐसी लांड्रियां चालू करने की योजना है। इसके बाद करीब 85 फीसद यात्रियों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।

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