भारतीय रेलवे ने सेना के साथ मिलकर एक नया “सहयोग ढांचा” (Framework of Cooperation) तैयार किया है, जिससे रिटायर्ड सैनिकों और अग्निवीरों को रेलवे में नौकरी के अवसर मिल सकें। इसका मकसद सेना से रिटायर होने वाले जवानों को सिविल सेवा में नौकरी देने और रेलवे में उनके लिए आसान रास्ता तैयार करना है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, देश के 70 रेलवे डिवीजनों में से 9 डिवीजनों ने अब तक सेना के साथ समझौते (MoU) किए हैं, ताकि पूर्व सैनिकों को ‘पॉइंट्समैन’ के रूप में काम पर रखा जा सके। पॉइंट्समैन वह कर्मचारी होते हैं जो रेलवे ट्रैक के स्विच ऑपरेट करते हैं और ट्रेनों को एक लाइन से दूसरी लाइन में सुरक्षित तरीके से भेजते हैं। यह काम शंटिंग और यार्ड ऑपरेशन के लिए बहुत जरूरी है।

मंत्रालय ने बताया कि रेलवे और सेना के बीच यह सहयोग ढांचा इसलिए बनाया गया है ताकि रिटायर सैनिकों को तुरंत रोजगार मिल सके और खाली पदों को भरा जा सके। इसके तहत जोनल और डिविजनल स्तर पर 5,000 से ज्यादा लेवल-1 की नौकरियों की प्रक्रिया चल रही है।

पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए आरक्षण तय

रेलवे में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए अलग-से आरक्षण भी तय किया गया है। लेवल-1 पोस्ट में 20% और लेवल-2/ऊपरी पोस्ट में 10% आरक्षण पूर्व सैनिकों के लिए रखा गया है। वहीं, अग्निवीरों के लिए लेवल-1 में 10% और लेवल-2/ऊपरी पोस्ट में 5% आरक्षण तय है। 2024 और 2025 में कुल 14,788 पदों को पूर्व सैनिकों के लिए रिजर्व किया गया है, जिसमें 6,485 लेवल-1 और 8,303 लेवल-2/ऊपरी पोस्ट शामिल हैं। ये भर्तियां रेलवे भर्ती केंद्र (RRC) और रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षा के जरिए की जाती हैं।

रेल मंत्रालय ने बताया कि सेना और रेलवे दोनों में जो अनुशासन, तकनीकी कौशल और नेतृत्व क्षमता होती है, वह देश के निर्माण में बहुत योगदान देती है। अधिकतर सैनिक अपेक्षाकृत कम उम्र में रिटायर होते हैं और उनके पास ऑपरेशन और मैनेजमेंट का अनुभव भी होता है। ऐसे जवानों का रेलवे में रोजगार उन्हें नई जिम्मेदारियों और राष्ट्र सेवा का अवसर देता है।

साथ ही रेलवे और सेना के सहयोग से लॉजिस्टिक्स और जवानों की तैनाती भी तेज हुई है। उदाहरण के तौर पर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और उधमपुर-श्रीनगर-बरामूला रेल लिंक जैसी स्ट्रेटेजिक परियोजनाओं ने सैनिकों और उपकरणों की त्वरित तैनाती को आसान बनाया है। पूर्व सैनिकों के कौशल साझा करने के लिए गतिशक्ति विश्वविद्यालय के साथ भी एमओयू पर साइन किए गए हैं।

रेल मंत्रालय का मानना है कि यह पहल पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए न केवल नौकरी का अवसर है, बल्कि उनके अनुशासन और अनुभव का उपयोग करके राष्ट्रीय ढांचा और सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का भी अवसर है। यह कदम सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जिसमें सेना से रिटायर होने वाले युवाओं के अनुभव और क्षमताओं का लाभ लिया जा रहा है। इस तरह, रेलवे और सेना का यह सहयोग पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को नई राह दिखाने के साथ-साथ देश के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा में भी योगदान देगा।

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पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली की सरकार ने गुड न्यूज दी है। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद अब दिल्ली पुलिस में आरक्षी के पद में 20% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोमवार को दिल्ली पुलिस नियुक्ति व भर्ती नियम 1980 के नियम-9 में संशोधन को मंजूरी दे दी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक