भारतीय रेलवे ने नए दंड नियम 2026 के तहत यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाने के प्रयासों के तहत ट्रेनों में प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामान ले जाने पर जुर्माना राशि को बढ़ा दिया है। रेलवे ने नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों पर अब भारी जुर्माना लगाकर अपने नियमों को और सख्त बनाया है।
रेल मंत्रालय ने 19 जून को जारी एक नोटिफिकेशन में कहा, “जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम 2026 (2026 का 8) की धारा 1 की उप-धारा (2) से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने इस नोटिफिकेशन के जारी होने की तारीख को उस तिथि के रूप में नियुक्त करती है जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान रेलवे अधिनियम 1989 (1989 का 24) क्रमश: लागू होंगे।”
कितना देना होगा अब जुर्माना?
नए जन विश्वास अधिनियम 2026 के प्रावधानों के तहत, धारा 165 के तहत आने वाले अपराधों के लिए, ट्रेनों में आपत्तिजनक या प्रतिबंधित वस्तुओं को लाने या पहुंचाने पर न्यूनतम 10000 रुपये का जु्र्माना तय किया गया है। इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति रेलवे को हुई किसी भी हानि या क्षति के लिए उत्तरदायी होगा। जुर्माना न भरने पर एक साल की कैद या न्यूनतम 10,000 रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।
पहले देना पड़ता था कितना जुर्माना?
इससे पहले रेल अधिनियम 1989 की धारा 67,154,164 और 165 के तहत ट्रेनों में ज्वलनशील और विस्फोटक सामान ले जाना दंडनीय अपराध है। पहले, उल्लंघन करने पर तीन साल की कैद, 1000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता था। इसके अलावा, उन्हें अपराध के कारण हुई किसी भी हानि, चोट या क्षति के लिए मुआवजा भी देना पड़ता था।
ट्रेन में क्या नहीं ले जा सकते यात्री?
रेलवे के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति आग लगने की संभावना के कारण यात्री कोच में स्टोव, गैस सिलेंडर, केरोसिन तेल, पेट्रोल, आतिशबाजी, चुनावी पोस्टर, माचिस, सिगरेट, धारदार हथियार, बंदूक आदि जैसी चीजें नहीं ले जा सकता है।
मिल सकती है ये सजा
जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम- 2026 के अनुसार, धारा 165 के तहत, रेलवे पर गैर-कानूनी रूप से खतरनाक/हानिकारक वस्तुएं लाना प्रतिबंधित है। ऐसे व्यक्तियों पर निम्न कार्रवाई की जा सकती है—
(1) यदि कोई व्यक्ति, धारा 67 का उल्लंघन करते हुए, अपने साथ कोई खतरनाक/हानिकारक वस्तु ले जाता है या ऐसी वस्तुओं को रेलवे प्रशासन को ढुलाई के लिए सौंपता है, तो वह रेलवे से ऐसी वस्तुओं को हटाने और ऐसी वस्तुओं को रेलवे पर लाने के कारण होने वाले किसी भी नुकसान, चोट या क्षति के बराबर जुर्माना भरने के लिए उत्तरदायी होगा, लेकिन यह जुर्माना 10 हजार रुपये से कम नहीं होगा।
(2) अगर कोई व्यक्ति, जिस पर उप-धारा (1) के तहत रेलवे से ऐसा सामान हटाने और जुर्माना भरने की जिम्मेदारी है, इस धारा के तहत मांग किए जाने पर ऐसा करने में नाकाम रहता है या मना कर देता है, तो अधिकृत रेलवे कर्मचारी देय राशि की वसूली के लिए अधिकार-क्षेत्र वाली सक्षम अदालत में आवेदन कर सकता है। अगर अदालत इस बात से संतुष्ट हो जाती है कि राशि देय है, तो वह इसकी वसूली का आदेश देगी और यह भी आदेश दे सकती है कि भुगतान के लिए जिम्मेदार व्यक्ति भुगतान न करने पर एक साल तक की जेल की सजा भुगते, या उस पर कम से कम दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए, या दोनों सजाएं दी जाएं।”
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रेल मंत्रालय यात्रियों के लिए लगातार सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसी के तहत मंत्रालय स्टेशन मास्टर की पावर बढ़ाने की प्लानिंग कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्टेशन मास्टर के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। साथ ही मंत्री ने सुरक्षित, ज़्यादा कुशल और पैसेंजर-सेंट्रिक रेल संचालन पक्का करने के मकसद से एक बड़े फ्रेमवर्क का रिव्यू किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
