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रेलवे को टिकट कैंसिलेशन से साल 2016-17 में हुई 1,400 करोड़ रुपये की कमाई

टिकट कैंसिलेशन से कमाई में वित्त वर्ष 2016-17 में सीधे 25 फीसद का इजाफा हुआ है।
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

रेलवे को इस साल टिकट कैंसिलेशन से 1,400 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। टिकट कैंसिलेशन से कमाई में वित्त वर्ष 2016-17 में सीधे 25 फीसद का इजाफा हुआ है। राज्य सभा में रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन ने लिखित जवाब देते हुए इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा, “रेलवे की टिकट कैंसिलेशन से कमाई में लगभग 25 फीसद की बढ़ोतरी हुई है।” माना जा रहा है कमाई में यह इजाफा नवंबर 2015 में कैंसिलेशन की रकम बढ़ाने के कारण हुआ है। टिकट कैंसिलेशन के लिए चार्जिस रेलवे पैसेंजर्स (कैंसिलेशन ऑफ टिकट एंड रीफंड ऑफ फेयर के तहत तय किए जाते हैं।) रूल्स, 2015 के तहत तय होते हैं। इलके अलावा रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन ने और भी कई बातें कही। उन्होंने बताया कि दक्षिणी रेलवे को 103.27 रुपये की कमाई कैंसिलेशन से हुई। बता दें नवंबर 2015 से टिकट कैंसिलेशन के दामों में इजाफा किया गया था।

इसके तहत AC 3-tier की कन्फर्म्ड टिकट की कैंसिलेशन फीस 90 से बढ़ाकर 180 रुपये कर दी गई। ऐसे ही AC 2-tier की फीस 100 से 200 रुपये कर दी गई थी। वहीं स्पीकर क्लास के लिए कैंसिलेशन फीस 60 से 120 रुपये और सेकेंड क्लास की 30 से 60 रुपये कर की गई। पहले यात्रियों को टिकट कैंसल कराने के लिए ट्रेन निकलने से 6 घंटे पहले और ट्रेन निकल जाने के बाद 2 घंटे की समय सीमा होती थी। इस समय सीमा के अंतरगत टिकट पर रीफंड मिल जाया करता था। वहीं नए नियमों के अनुसार अब ट्रेन निकलने से पहले सिर्फ 4 घंटे की समय सीमा तय की गई है जबकि ट्रेन के निकलने पर कोई रीफंड नहीं होता।

रेलवे नियमों की अहम जानकारियां।

-साल 2015 में तत्काल टिकटों की बुकिंग के समय में बदलाव किए गए। AC क्लास की तत्काल टिकट बुकिंग के लिए सुबह 10 बजे, वहीं Non-AC के लिए तत्काल टिकट बुकिंग का समय सुबह 11 बजे का है। इस नियम में कोई बदलाव नहीं है।

-तत्काल टिकट के रीफंड नियमों में कोई बदलाव नहीं है। कन्फर्मड तत्काल टिकट/डुप्लिकेट तत्काल टिकट को रद्द कराने पर कोई रीफंड नहीं मिलेगा।

-रेलवे के रीफंड नियम नवंबर 2015 की नोटिफिकेशन के हिसाब से ही बरकरार रहेंगे। इनमें कोई ताजा बदलाव नहीं हुआ है।

-वेटिंग टिकट की ऑनलाइन (e-ticket) और काउंटर (PRS) बिक्री में भी कोई बदलाव नहीं है। वेटिंग टिकटों की बिक्री इन दोनों माध्यमों से जारी रहेगी।

-सुविधा क्लास ट्रेनों की बात करें तो इनके तय नियमों में भी कोई बदलाव नहीं है। इन ट्रोनों के लिए वेटिंग टिकटों की सुविधा पहले से उपलब्ध है। वहीं आधी रकम रीफंड की सुविधा भी बरकरार है। सुविधा क्लास ट्रेनों से जुड़े किसी नियम में बदलाव नहीं किया गया है।

-राजधानी और शताब्दी ट्रेनों के लिए पेपर टिकट जारी रहेंगे, इन्हें बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। एसएमएस के जरिए मिलने वाले e-tickets भी पहले की तरह ही यात्रा के लिए मान्य होंगे।

-टिकट में रियायत लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य करने का कोई प्रस्ताव या नियम नहीं है। इसके अलावा डुप्लिकेट ट्रेन चलाने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है।

-रेलवे ने ‘VIKALP’ या एल्टरनेटिव ट्रेन एकोमोडेशन स्कीम (ATAS) 1 नवंबर 2015 को लॉन्च किया था। यह सुविधा नई दिल्ली-जम्मू, नई दिल्ली-लखनऊ, दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-चेन्नई, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली सिकंदराबाद सर्किटों से शुरू की गई थी। इस स्कीम को 22 मार्च 2017 को बाकी सेक्टरों तक एक्सपैंड करने का काम किया गया है।

 

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