Indian Railways Project: अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण कर रही राष्ट्रीय उच्च गति रेल निगम लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) बजट में पास हुए सात नई उच्च गति रेल (एचएसआर) परियोजनाओं को तैयार करेगा। सोमवार को हुए रेलवे बोर्ड की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। रेलवे अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने सोमवार को देश में नई उच्च गति रेल परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।

इस बैठक में निर्णय लिया गया कि बजट में प्रस्तावित मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी सात उच्च गति रेल गलियारे को लेकर जल्द प्रक्रिया शुरू होगी।

किसी मिली नए प्रोजेक्ट की जानकारी

इन सभी परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन की जिम्मेदारी एनएचएसआरसीएल को सौंपी गई है। रेलवे बोर्ड के निर्देश के तहत पहले से तैयार विस्तृत परियोजना रपट को वर्तमान लागत, परियोजना पूर्णता लागत सहित अन्य जरूरत के अनुरूप संशोधित किया जाएगा। इनके अतिरिक्त पूरे भारत में उच्च गति रेल के लिए एक समान तकनीकी और परिचालन मानक को औपचारिक रूप से अंतिम रूप देने का दायित्व भी एनएचएसआरसीएल को ही सौंपा गया है।

अधिसूचना में प्रत्येक एचएसआर परियोजना के लिए क्षेत्र में तैनात कोर टीम गठित करने, परियोजना-वार मुख्यालय निर्धारित करने, पूर्व-निर्माण गतिविधियों की सूची तैयार करने और अनुबंध दस्तावेजों की प्रक्रिया प्रारंभ करने को कहा गया है। साथ ही, विभिन्न उच्च गति रेल परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन की योजना बनाने का निर्देश दिया गया है।

जरूरत का किया जाएगा आंकलन

अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि सभी गलियारे के लिए परियोजना-वार मानव संसाधन का आकलन किया जाए। इससे भारतीय रेल से आवश्यक कार्मिकों की आवश्यकता को भी सम्मिलित किया जाएगा। इस पूरी कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। रेलवे के इस प्रयास की मदद से देश में आधुनिक, सुरक्षित और तीव्र रेल संपर्क के विस्तार को बढ़ावा दिया जा सकेगा। साथ ही क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत किया जा सकेगा। अधिकारी ने बताया कि परियोजना के निर्माण के दौरान आर्थिक विकास पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

माल ढुलाई के लिए कई परियोजनाओं पर मुहर

रेल मंत्रालय ने यात्री सेवाओं में तेजी लाने के साथ माल ढुलाई में सुधार के लिए सोमवार को देशभर में कई बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं की मदद से तमिलनाडु, केरल, असम, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब राज्य को सीधा फायदा होगा। रेल मंत्रालय के अनुसार सोमवार को दक्षिण रेलवे, उत्तर रेलवे और दक्षिण पूर्व रेलवे के विभिन्न मार्गों से जुड़े परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनकी मदद से यातायात को सुगम, सुरक्षित और अधिक दक्ष बनाने में सहायता मिलेगी।

इस बैठक में झारखंड राज्य के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत बारबेंदा-दमरुघुटू रेल खंड के दोहरीकरण और दमरुघुटू-बोकारो स्टील सिटी के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर 815.32 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। यह परियोजना ऊर्जा, खनिज और सीमेंट परिवहन गलियारे में गति लाएगी। इससे कोयला क्षेत्र, सीमेंट और इस्पात संयंत्रों तथा औद्योगिक क्षेत्रों का संपर्क बेहतर होगा।

वहीं उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त मार्ग के 34 स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग प्रणाली लागू करने को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर 421.41 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस परियोजना में दिल्ली मंडल के 21 स्टेशन पर 292.24 करोड़ रुपए और अंबाला मंडल के 13 स्टेशनों पर 129.17 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

ट्रेनों में होगी कवच टेक्नोलॉजी

यह व्यवस्था कवच रेल सुरक्षा प्रणाली के साथ मिलकर ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाएगी। साथ ही इस मार्ग पर सुरक्षा बढ़ने के बाद ट्रेनों की संख्या को भी बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा अंबाला-जालंधर खंड पर भीड़ कम करने के लिए 13.46 किमी लंबी राजपुरा बाइपास रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। इसकी लागत 411.96 करोड़ रुपए है। लाइन के बनने के बाद मालगाड़ियों को राजपुरा यार्ड से होकर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

केरल-तमिलनाडु पर विशेष ध्यान

रेलवे ने केरल में 324.16 करोड़ रुपए की लागत वाले 12.66 किमी लंबे अलप्पुझा-अंबलापुझा रेल खंड के दोहरीकरण को स्वीकृति दी गई है। लाइन के बनने के बाद ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। साथ ही माल ढुलाई तेज होगी। इसके अलावा केरल में ही 1.80 किमी लंबी पालक्काड नगर-पारली बाइपास रेल लाइन को भी मंजूरी दी गई है।

इसकी लागत 163.57 करोड़ रुपए है। इसके बनने के बाद पालक्काड जंक्शन पर इंजन बदलने की आवश्यकता खत्म होगी। इससे सफर तेज होगा। वहीं तमिलनाडु में 277.42 करोड़ रुपए की लागत वाले 10.77 किमी लंबे इरुगुर-पोदनूर रेल खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है। परियोजना के पूरा होने पर चेन्नई-कोयंबटूर-पोदनूर मार्ग चार रेल लाइन गलियारे में बदल जाएगा।

गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर शुरू हुई सुविधाएं

सोमवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आनलाइन माध्यम से सैरांग-सिलचर यात्री रेल सेवा को रवाना किया। इस दौरान मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा सहित अन्य उपस्थित रहे। रेल अधिकारी ने बताया कि नई सैरांग-सिलचर यात्री रेल सेवा से मिजोरम की राजधानी का सीधा संपर्क असम की बराक घाटी से होगा। साथ ही गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर आधुनिक यात्री सुविधाओं में विश्राम कक्ष, वातानुकूलित प्रतीक्षालय और बहु-व्यंजन भोजनालय की सुविधा शुरू हुई। इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 11486 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। क्षेत्र में करीब 72468 करोड़ रुपए की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बैराबी-सैरांग रेल लाइन मिजोरम की राजधानी को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। यह ऐतिहासिक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण परियोजना रही है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया। आने वाले समय में सेवाओं में विस्तार होगा। इसका फायदा मिजोरम, असम और अन्य क्षेत्रों को होगा। बांग्लादेश-नेपाल बॉर्डर के इलाकों वाली ट्रेनों के लिए रेलवे का खास प्लान, घुसपैठ रोकने के लिए चेक होगा ID कार्ड