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ट्रेनों के स्लीपर कोच बनेंगे इकोनॉमी एसी क्लास, पूरी तरह AC रेल चलाने की है तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, स्लीपर कोच को एसी कोच में बदलने की जिम्मेदारी कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री को दी गई है, जो कि पहले इसका प्रोटोटाइप तैयार करेगी।

Indian Railway, AC Sleeper Coachकपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में एसी स्लीपर कोच का निर्माण होगा। (एक्सप्रेस फोटो)

भारतीय रेलवे अब आम नागरिकों को भी कम से कम खर्च पर एसी डिब्बों में सफर करने की सुविधा मुहैया कराना चाहता है। इसके लिए रेलवे ने स्लीपर और गैर-आरक्षित श्रेणी (अनरिजर्व्ड) के डिब्बों को एसी कोच में बदलने की योजना तैयार की है। रेलवे इसके जरिए देशभर में एसी ट्रेनों को लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिससे यात्रियों की जेब पर बिना अतिरिक्त भार डाले उन्हें बेहतर सफर कराया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, अपग्रेड किए हुए स्लीपर कोच को इकोनॉमिकल एसी 3-टियर कहा जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला को स्लीपर कोच के एसी कोच में बदले रूप का प्रोटोटाइप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। बताया गया है कि इकोनॉमिकल एसी 3-टियर में 72 बर्थों की जगह 83 बर्थ होंगी। शुरुआत में इन कोच को एसी-3 टियर टूरिस्ट क्लास भी कहा जाएगा। एक अफसर ने बताया कि यह एसी-3 टियर का ही सस्ता प्रारूप होगा। इससे पूरी एसी ट्रेन को यात्रियों के लिए वहन योग्य बनाया जा सकेगा।

पहले फेज में इस तरह के 230 डिब्बों का उत्पादन किया जाएगा। हर कोच को बनाने में 2.8 से 3 करोड़ रुपए तक का अनुमानित खर्चा आएगा, जो कि एसी 3-टियर को बनाने के खर्च से 10 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, ज्यादा बर्थ और मांग के चलते रेलवे को इकोनॉमिकल एसी 3-टियर से अच्छी कमाई की उम्मीद है।

इसके अलावा अनआरक्षित जनरल क्लास के डिब्बों को भी 100 सीट के एसी डिब्बों में बदला जाएगा। इनके लिए डिजाइन को अंतिम प्रारूप दिया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती डिजाइन में हर जनरल कोच में 105 सीटों के लिए जगह बनाई जा रही है।

बता दें कि आखिरी बार यूपीए-1 (2004-09) ने इकोनॉमिकल एसी 3-टियर क्लास डिब्बों को तैयार करने के बारे में योजना तैयार की थी। तब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। उनके नेतृत्व में गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनें लॉन्च हुई थीं, जिन्हें एसी इकोनॉमी क्लास कहा गया। इसमें साइड मिडल बर्थ की भी शुरुआत की गई थी, जिससे डिब्बों की क्षमता और रेलवे की कमाई को भी बढ़ाया गया। हालांकि, यात्रियों ने इसमें सफर के दौरान परेशानी की बात कही। साथ ही ट्रेन में भीड़भाड़ की स्थिति भी पैदा होने लगी। बाद में इस तरह के कोच का उत्पादन बंद कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, नए डिब्बों में इलेक्ट्रिकल यूनिट्स को शिफ्ट किया जाएगा और कंबल-चादर रखने के कंपार्टमेंट को भी खत्म किया जाएगा, जिससे डिब्बे के अंदर ज्यादा जगह बनेगी। बता दें कि रेलवे पहले ही ट्रेनों में कंबल और अन्य सुविधाएं बंद करने का फैसला कर चुका है।

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