भारतीय रेलवे में हर दिन लाखों यात्री ट्रेन टिकट बुक करते हैं। खासकर छुट्टियों और ज्यादा यात्रा वाले समय में टिकटों की मांग काफी बढ़ जाती है। इसका अंदाजा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 7 सितंबर को पहली बार एक दिन में ट्रेन टिकटों की बुकिंग 22 लाख का आंकड़ा पार कर गई थी।
यात्री अलग-अलग रिजर्वेशन विकल्पों के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं। इनमें एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) और तत्काल बुकिंग शामिल हैं।
हालांकि जब टिकटों की मांग ज्यादा होती है तो टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट देखने को मिलती है। लेकिन क्या रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के बाद उसी ट्रेन में टिकट चेक करें और उपलब्ध हो तो क्या आप बुकिंग कर सकते हैं?
इंडियनएक्सप्रेस डॉट कॉम से बात करते हुए रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेलवे में करंट बुकिंग (Current Booking) की सुविधा उपलब्ध है। इसके तहत रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के बाद ट्रेन में खाली बची सीटों पर टिकट बुक किया जा सकता है। IRCTC के मुताबिक, करंट बुकिंगं का मतलब चार्ट तैयार होने के बाद खाली बची सीटों के लिए टिकट बुक करना है।
क्या चार्ट तैयार होने के बाद ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं?
पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने का मतलब यह नहीं है कि उस ट्रेन के लिए टिकट बुकिंग पूरी तरह बंद हो गई है।
रेलवे अधिकारी के मुताबिक, अगर चार्ट तैयार होने के बाद भी ट्रेन में सीट या बर्थ खाली रहती है तो करंट बुकिंग के तहत उसे बुक किया जा सकता है। हालांकि यह सुविधा रेलवे के लागू नियमों और टिकट बुकिंग की समय सीमा के आधार पर मिलती है।
करंट बुकिंग और सामान्य एडवांस रिजर्वेशन में एक अहम अंतर है। करंट बुकिंग के तहत केवल कन्फर्म टिकट ही जारी किया जाता है। इस सुविधा में यात्री को RAC या वेटिंग लिस्ट का टिकट नहीं मिलता।
इसका मतलब है कि अगर कोई यात्री चार्ट तैयार होने के बाद सीट की उपलब्धता चेक करता है तो उसे कभी-कभी कन्फर्म सीट या बर्थ मिल सकती है। ऐसा तब भी हो सकता है जब पहले उसी ट्रेन में वेटिंग लिस्ट चल रही हो।
करंट बुकिंग के नियम
IRCTC के मुताबिक, चार्ट तैयार होने के बाद खाली सीटों पर करंट बुकिंग के तहत टिकट बुक किया जा सकता है। इसके लिए ये नियम लागू हैं:
-सभी यात्री टिकट बुक कर सकते हैं, यानी सामान्य यात्री और एजेंट दोनों।
-करंट बुकिंग के तहत सिर्फ ई-टिकट बुक किया जा सकता है।
-इस सुविधा में केवल कन्फर्म टिकट ही बुक होते हैं।
-सिर्फ वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांग यात्रियों को मिलने वाली छूट लागू होगी।
-चार्ट तैयार होने के बाद भी करंट बुकिंग की सुविधा रेलवे की तय बुकिंग समय सीमा के अंदर उपलब्ध रहती है।
-करंट बुकिंग में बोर्डिंग स्टेशन बदला नहीं जा सकता।
-करंट बुकिंग के PNR में नाम, उम्र या लिंग में बदलाव नहीं किया जा सकता।
-प्रीमियम और सुविधा ट्रेनों में टिकट बुक करने पर आखिरी बुकिंग के समय लागू किराया लिया जाएगा।
चार्ट तैयार होने के बाद सीट कैसे खाली हो सकती है?
रेलवे अधिकारी ने बताया कि टिकट बुकिंग की प्रक्रिया के दौरान ट्रेन में सीटों की उपलब्धता बदल सकती है।
चार्ट तैयार करते समय रिजर्वेशन सिस्टम इन बदलावों को ध्यान में रखता है। RAC और वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों की बुकिंग रेलवे के तय नियमों के अनुसार की जाती है। वहीं कैंसिलेशन या दूसरे बदलावों के कारण जो सीटें खाली होती हैं, उन्हें भी सिस्टम में शामिल किया जाता है।
इस प्रक्रिया के बाद भी किसी ट्रेन में यात्रा के किसी खास हिस्से के लिए कुछ सीट या बर्थ खाली रह सकती हैं। ऐसी खाली सीटों को करंट बुकिंग के तहत बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
रेलवे अधिकारी ने Indianexpress.com को बताया, ”इसका दोहरा फायदा है। आखिरी समय में यात्रा करने वाले यात्री को टिकट मिल सकता है और रेलवे ऐसी सीटों को खाली जाने से बचा सकता है। इसलिए जो ट्रेन पहले ‘Not Available’ दिख रही थी, वह बाद में बुकिंग के लिए उपलब्ध हो सकती है।”
उदाहरण के लिए अगर कोई यात्री ट्रेन चलने से कुछ घंटे पहले सीट की उपलब्धता चेक करता है और उसे लंबी वेटिंग लिस्ट दिखाई देती है। ऐसे में वह टिकट बुक नहीं करने का फैसला कर सकता है। लेकिन चार्ट तैयार होने के बाद कैंसिलेशन या सीटों में दूसरे बदलावों के कारण किसी खास यात्रा हिस्से के लिए कन्फर्म सीट या बर्थ खाली हो सकती है।
अगर यह सीट करंट बुकिंग के तहत उपलब्ध कराई जाती है तो यात्री उसे बुक कर सकता है।
हालांकि, सीटों की उपलब्धता लगातार बदलती रहती है। यह ट्रेन, यात्रा की तारीख और यात्रा के हिस्से पर निर्भर करती है। करंट बुकिंग से ट्रेन में नई सीटें नहीं बढ़तीं। इसके तहत सिर्फ वही सीट या बर्थ बुक की जा सकती है जो वास्तव में खाली उपलब्ध हो।
भारतीय रेलवे में करंट बुकिंग का समय
भारतीय रेलवे में पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के बाद और ट्रेन के रवाना होने से कुछ समय पहले तक खाली सीटों पर टिकट बुक करने की सुविधा होती है। हालांकि यह सुविधा रेलवे के लागू बुकिंग और चार्ट तैयार करने से जुड़े नियमों के तहत मिलती है।
रेलवे अधिकारी ने बताया, ”रेलवे के नियमों में पहले से ही पहले और अंतिम चार्ट के बीच रिजर्वेशन से जुड़ी प्रक्रिया का प्रावधान रहा है। अंतिम रिजर्वेशन प्रक्रिया ट्रेन के रवाना होने से कुछ समय पहले होती है। इसलिए यात्रियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि चार्ट तैयार होते ही टिकट बुकिंग पूरी तरह बंद हो जाती है। उन्हें लाइव सीट उपलब्धता जरूर चेक करनी चाहिए। करंट बुकिंग का सही समय ट्रेन के चार्ट तैयार होने और रिजर्वेशन के शेड्यूल पर निर्भर करता है।”
भारतीय रेलवे में चार्ट तैयार होने का समय
रेलवे में रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने के समय में भी बदलाव हुआ है। पहले आमतौर पर ट्रेन के रवाना होने से करीब चार घंटे पहले पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाता था। अब रेलवे ने इसे पहले तैयार करने की व्यवस्था की है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, पहले चार्ट तैयार करने का मकसद वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों की परेशानी कम करना है। इससे उन्हें समय रहते पता चल जाता है कि उनका टिकट कन्फर्म हुआ है या नहीं और जरूरत पड़ने पर वे दूसरी यात्रा की व्यवस्था कर सकते हैं।
नई व्यवस्था में ट्रेन के रवाना होने के समय के आधार पर पहला रिजर्वेशन चार्ट करीब 9 से 18 घंटे पहले तैयार किया जाता है।
इस वजह से पहला चार्ट तैयार होने के बाद टिकट चेक करने वाले यात्रियों के लिए करंट बुकिंग की सुविधा अहम हो जाती है।
उदाहरण के लिए, सुबह 5:01 बजे से दोपहर 2 बजे तक रवाना होने वाली ट्रेनों का पहला रिजर्वेशन चार्ट संभव हो तो पिछले दिन रात 8 बजे तक तैयार किया जाएगा। वहीं दोपहर 2:01 बजे से रात 11:59 बजे तक और रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक रवाना होने वाली ट्रेनों का पहला रिजर्वेशन चार्ट संभव हो तो ट्रेन के रवाना होने से कम से कम 10 घंटे पहले तैयार किया जाएगा।
हालांकि दूसरा रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन के तय प्रस्थान समय से करीब 30 मिनट पहले तैयार किया जाता है। इसलिए चार्ट तैयार होने का मतलब हमेशा टिकट बुकिंग पूरी तरह बंद होना नहीं है। अगर ट्रेन में सीट या बर्थ खाली है और बुकिंग की समय सीमा खुली है तो यात्री करंट बुकिग के तहत कन्फर्म टिकट बुक कर सकता है।
