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तत्काल टिकटों के नए नियम से रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

प्रतिभा शुक्ल नई दिल्ली। रेलवे में सीटों के आरक्षण के मामले में तत्काल सेवा की 50 फीसद सीटों का प्रीमियम के नाम पर दाम बढ़ाने के बाद से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। रेलवे आरक्षण केंद्रों पर रोज ही मारपीट की नौबत हमेशा बनी रहती है। किराया बढ़ने से यात्री पहले से ही […]

Author October 19, 2014 10:11 AM
तत्‍काल बुकिंग चार्ज बढ़ाने से पहले रेलवे यात्रियों पर और भी कई बोझ डाल चुका है।

प्रतिभा शुक्ल

नई दिल्ली। रेलवे में सीटों के आरक्षण के मामले में तत्काल सेवा की 50 फीसद सीटों का प्रीमियम के नाम पर दाम बढ़ाने के बाद से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। रेलवे आरक्षण केंद्रों पर रोज ही मारपीट की नौबत हमेशा बनी रहती है। किराया बढ़ने से यात्री पहले से ही त्रस्त थे अब तत्काल की सीटें प्रीमियम में बदलने से उनकी तकलीफ और बढ़ गई है। आरक्षण की लाइन में खड़े यात्रियों की सांसें समय खिसकने के साथ ही अटकी रहती हैं।

अब आए दिन आरक्षण केंद्रों पर लाइन में लगे यात्रियों के बीच तनाव और मारपीट की नौबत आ जाती है क्योंकि हर यात्री शुरू के 50 फीसद सीटों के दायरे में आने की कोशिश करता है ताकि उसको तत्काल का तीन चार गुणा अधिक किराया न चुकाना पड़े। जैसे-जैसे नंबर आगे बढ़ता है वैसे-वैसे यात्रियों के बीच धक्कामुक्की बढ़ती जाती है। यात्री टिकटों के दाम बढ़ने और यात्री सुविधाओं में सुधार की बजाय गिरावट से और अधिक गुस्से में हैं। ट्रेनों की लेट लतीफी भी बदस्तूर जारी है।

नई सरकार ने आते ही पहले रेलवे के किराए में बढ़ोतरी कर दी। इसके बाद कई ट्रेनें प्रीमियम सेवा के नाम पर चलाकर इसके एवज में सामान्य किराए से तीन चार गुणा अधिक किराया वसूलने लगी। सरकार का वसूली अभियान यहीं नहीं थमा। और अब वह लोगों की मजबूरी का फायदा भी उठाने लगी है। अधिकतर यात्री बहुत इमरजंसी की ही सूरत में तत्काल सेवा में टिकट कराते हैं। दूसरे यात्री तो दो महीने पहले ही टिकट करा लेते हैं। अब तत्काल सेवा में भी सरकार यात्रियों की जेबें हल्की करने लगी है। मुंबई जाने के लिए टिकट लेने वाले यात्री ने बताया कि आम तौर से एसी थ्री का किराया करीब 18 से 24 सौ रुपए होता है लेकिन उनको इसके लिए करीब छह हजार रुपए चुकाने पड़े। यह बताने के साथ ही उनका दर्द भी इन लफ्जों में बयां हो गया कि मेरे तो आंख-कान ही निकल आए।

यों तो तत्काल की 50 फीसद टिकटें ही काउंटर से बेची जा रही हैं। लेकिन आम यात्रियों को इसकी जानकारी नहीं है इसलिए भी वे हड़बड़ाए रहते हैं कि जितनी जल्दी हो वे आगे पहुंच जांए नहीं तो उनको एक का चार खर्च करना पड़ेगा। इसी बात को लेकर सरोजनी नगर टिकट काउंटर पर यात्रियों में हाथापाई भी हो गई। इसी तरह नई दिल्ली पर यात्री नरेश बिहार के लिए टिकट खरीदने के लिए लाइन में लगे थे। इसके लिए वे काफी सुबह से घर से निकले थे। धक्कामुक्की करते-करते जैसे ही उनका नंबर आया तो तत्काल का टिकट खत्म हो गया। काउंटर से बताया गया कि प्रीमियम के दाम पर वे इंटरनेट से टिकट ले सकते हैं। इसी बात पर वे लाइन में लगे पहले यात्री से झगड़ पड़े। इसमें दोनों काफी देर तक उलझे रहे। तीन गुणा अधिक किराया चुकाने में असमर्थ यह यात्री बिना आरक्षण के ही सफर करने की विवशता जाहिर कर चला गया।

पहले ही तत्काल के टिकट काउंटर खुलते ही खत्म हो जाते थे। अब इसमें 50 फीसद टिकटें और कम कर दी गईं। जिससे एक ओर आम आदमी इस सेवा का लाभ लेने से वंचित हो रहा है तो दूसरी ओर बाकी 50 फीसद टिकटों के दाम बढ़ने से इसकी मांग भी कम हो गई है। लिहाजा सीटें खाली रह रही हैं। इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि ट्रेन जाने से कुछ देर पहले भी टिकट की उपलब्धता रहती है। प्रयागराज एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक परिवार ने अपना दर्द यों बयां किया कि जो टिकट नौ सौ रुपए में मिल जाता था, वे वही टिकट वे 26 सौ से अधिक कीमत पर खरीदने को विवश हुए। एक अन्य यात्री विनीत ने कहा कि यह तो मजबूरी का सरकार फायदा उठा रही है। वे बोले कि यह बात तब और खलती है जबकि इसके एवज में सुविधा कोई नहीं। पांच अक्तूबर को इलाहाबाद से सफर कर रहे इस परिवार के लिए 26सौ रुपए प्रति व्यक्ति देना इसलिए भी खला कि ट्रेन के कोच में खराबी के कारण पहले कानपुर तक ही तीन घंटे देरी से पहुंची और गाजियाबाद तक पहुंचते में गाड़ी सात घंटे लेट हो गई। रास्ते मे ट्रेन का पानी भी खत्म हो गया था। ट्रेन लेट और शौचालय तक में पानी नहीं था। रास्ते में एक अन्य गाड़ी पटरी से उतर गई थी।

इसी तरह चार अक्तूबर को मिर्जापुर से मगध से दिल्ली जा रही यात्री सरिता ने बताया कि ट्रेन मिर्जापुर तक आने में ही 11 घंटे की देरी कर चुकी थी। सारी रात जाग कर बार-बार गाड़ी का समय पता करते रहे। इतनी अव्यवस्था और अधिक किराया यात्री पचा नहीं पा रहे हैं। इस बारे में उत्तर रेलवे के मुख्य प्रवक्ता नीरज शर्मा ने कहा कि दलालों पर अंकुश लगाने और यात्रियों के सहूलियत के लिए प्रयोग के तौर पर यह सेवा शुरू की गई है। उन्होंने दावा किया कि इससे लोगों को अब टिकट मिलने लगे हैं। टिकट की उपलब्धता बढ़ी है। यात्री सेवाओं के लिए उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे यह काम भी आगे बढ़ रहा है।

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