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खराब खाने की शिकायत करने वाले यात्री को रेलवे का जवाब, कहा- घर से लाया करो खाना

गौरतलब है कि बीती 21 जुलाई (2017) को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले खाने को लेकर चौंका देने वाली रिपोर्ट पेश की थी।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Express Photo by Tashi Tobgya)

यात्रियों को दिए जाने वाले खराब खाने की समस्या से गुजर रहे रेलवे के पास वर्तमान में इससे निपटने के लिए कोई पुख्ता समाधान नहीं है। हालांकि रेलवे ने अस्थाई रूप से यात्रियों को सुझाव दिया है कि वो घर से ही खाना लेकर आएं। गौरतलब है कि बीती 21 जुलाई (2017) को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले खाने को लेकर चौंका देने वाली रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दूषित खाद्य पदार्थों, रिसाइकिल किया हुआ खाना और डब्बा बंद व बोतलबंद सामान का इस्तेमाल एक्सपाइरी डेट के बाद भी किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश में एक एक्सप्रेस ट्रेन में मिले खाने के अंदर छिपकली मिली थी। जिस युवक के खाने में छिपकली मिली वह पूर्वा एक्सप्रेस में सवार था। युवक ने बाद में इसकी शिकायत के साथ रेल मत्री सुरेश प्रभू को भी इस बारे में ट्वीट किया। इससे पहले कैग अपनी रिपोर्ट में रेलवे को बेकार बताकर कहकर साफ कर चुका है कि वहां मिलने वाला खाना खाने लायक नहीं है।

सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एकके मित्तल ने अब युवक की शिकायत का जवाब देते हुए कहा है कि ट्रेन में खाना अपने घर से ही लेकर आएं। हालांकि रेलवे ने इसपर सफाई देते हुए कहा कि अभी रेलवे की किचन में निर्माण कार्य चल रहा है जिसे पूरा होने में करीब एक साल लग सकता है। इसलिए यात्रियों को खाना घर से ही लेकर आना चाहिए। बता दें कि रेलवे ने कैग की रिपोर्ट पर भी प्रतिक्रिया दी है। बोर्ड ने कहा कि भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) जल्द ही नई कैटरिंग पॉलिसी के तहत इसमें सुधार करने जा रहा है। जिसके बाद यात्रियों को सुनिश्चित स्वच्छ खाना मुहैया कराया जाएगा।

इसके अलावा सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में सुपरफास्ट ट्रेनों के लेट होने को लेकर भी एक रिपोर्ट पेश की थी। सीएजी ने रिपोर्ट में बताया है कि ‘सुपरफास्ट’ सरचार्ज के नाम पर रेलवे ग्राहकों से करोड़ों रुपए वसूलती है, लेकिन कुछ सुपरफास्ट ट्रेन ऑपरेशन्स के दौरान 95 फीसदी से ज्यादा बार लेट हुईं। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (NCR) और साउथ सेंट्र्ल रेलवे (SCR) ने ‘सुपरफास्ट’ सरचार्ज के नाम पर यात्रियों से 11.17 करोड़ रुपए वसूले, लेकिन यह सुपरफास्ट ट्रेनें 95 फीसदी से ज्यादा बार लेट हुईं।

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