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कोरोना के नाम पर निकाला जा रहा रेल यात्रियों का तेल, पैसेंजर ट्रेन में किराया एक्सप्रेस वाला, दलील- भीड़ रोकने की

2019 में रेलवे ने यात्री राजस्व से 53 हजार करोड़ रुपये अर्जित किए थे। 2020 दिसंबर तक यात्री किराए से लगभग 4600 करोड़ ही राजस्व आ सका था। एक अनुमान है कि पिछले वित्तीय वर्ष के समाप्त होने तक भी इसमें लगभग 70 फीसदी का घाटा हुआ।

indian railभारतीय रेल (फोटो सोर्सः ट्विटर@RailAnalysis)

कोरोना संकट में अर्श से फर्श पर गिरे रेलवे ने अपने नुकसान की भरपाई के लिए आम आदमी को निचोड़ना शुरू कर दिया है। कोरोना काल के नाम पर रेलवे यात्रियों का तेल निकालने से भी बाज नहीं आ रहा है। आमदनी घटने के बीच महंगाई पहले से ही मुंह बाए खड़ी है। अब रेलवे ने पैसेंजर ट्रेनों में यात्री किराए में तीन गुना तक बढ़ोतरी कर दी है। रेलवे की दलील है कि कोरोना संकट के मद्देनजर ही यह फैसला लिया गया है। तर्क है कि किराया ज्यादा होगा तो कम लोग सफर के लिए निकलेंगे।

करोना संकट सभी के लिए न भूलने वाली विपदा रही, लेकिन अर्थव्यवस्था को जो इसने चोट दी, उसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी। रेलवे के यात्री राजस्व में भारी कमी आई है। 2019 में रेलवे ने यात्री राजस्व से 53 हजार करोड़ रुपये अर्जित किए थे। 2020 दिसंबर तक यात्री किराए से लगभग 4600 करोड़ ही राजस्व आ सका था। एक अनुमान है कि पिछले वित्तीय वर्ष के समाप्त होने तक भी इसमें लगभग 70 फीसदी का घाटा हुआ।

इससे उबरने के लिए रेलवे ने अनूठा तरीका इजाद किया। रेलवे ने कम दूरी के सफर पर किराया बढ़ा दिया। अब कम दूरी की यात्रा वाली ट्रेनों को मेल एक्सप्रेस के तौर पर चलाया जा रहा है। इस फैसले से ‘लोकल’ यात्रियों की जेब पर दो से तीन गुना तक असर पड़ेगा। जबकि सुविधा उन्हें पैसेंजर ट्रेन की ही मिलेगी। धीरे-धीरे रेलवे पैसेंजर सेवा को बहाल करना शुरू कर दिया गया है। पूर्व मध्य रेलवे ने 8 मार्च से 13 जोड़ी यानि 26 मेमू पैसेंजर स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की है। सीपीआरओ राजेश कुमार का कहना है कि इन ट्रेनों का किराया मेल\एक्सप्रेस के बराबर रखा गया है। इससे ट्रेनों में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ देखने को नहीं मिलेगी।

रेलवे का कहना है कि अभी कोरोना प्रोटोकाल के चलते यात्री ट्रेनों का नियमित परिचालन नहीं हो पा रहा। यात्री भी कम ही निकल रहे हैं। यात्री राजस्व में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी और उसे कोरोना काल से पहले की स्थिति में आने में समय लगेगा। ऐसे में माल भाड़ा राजस्व रेलवे का घाटा पूरा करने का काम करेगा। इसके लिए रेलवे ने इस साल अपने माल ढुलाई में उन तमाम चीजों को भी शामिल किया है जो अभी तक उसके दायरे से बाहर थीं। अब डीएफसी (पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर) पर परिचालन से उसे कई अन्य क्षेत्रों की माल ढुलाई में मौका मिलेगा। ऐसे में उसके मालभाड़ा राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकेगी।

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