ताज़ा खबर
 

रेल मंत्री सुरेश प्रभु के 3 मंत्र: उधारी, पीपीपी, संपत्ति

भारतीय रेल को संकटों से बाहर निकालने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 8.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के संसाधन जुटाने के तीन मंत्र- बाजार से उधारी जुटाना, सार्वजनिक-निजी साझीदारी (पीपीपी) और संपत्तियों से कमाई अपनाए हैं। प्रभु ने भारतीय रेलवे के ‘निजीकरण’ की संभावना खारिज की। रेल मंत्री ने जोर दिया कि उन्होंने […]

Author Updated: February 27, 2015 8:31 AM

भारतीय रेल को संकटों से बाहर निकालने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 8.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के संसाधन जुटाने के तीन मंत्र- बाजार से उधारी जुटाना, सार्वजनिक-निजी साझीदारी (पीपीपी) और संपत्तियों से कमाई अपनाए हैं। प्रभु ने भारतीय रेलवे के ‘निजीकरण’ की संभावना खारिज की।

रेल मंत्री ने जोर दिया कि उन्होंने यात्री किराए में बढ़ोतरी नहीं की या परियोजनाओं के विकास के लिए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने यह आशंका भी खारिज की कि माल ढुलाई भाड़े में बढ़ोतरी से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर कोई खास असर पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि पीपीपी माध्यम के अंतर्गत क्षमता निर्माण के लिए निवेश आकषिर्त करने के वास्ते नीतिगत बदलाव करने की जरूरत है।

उन्होंने भरोसा जताया कि भारत से एलआईसी जैसे संस्थान और विदेशों से सावरेन फंड, ऋण के जल्द पुनभरुगतान पर जोर दिए बगैर दीर्घकालीन रिण उपलब्ध कराएंगे।
प्रभु ने कहा, ‘ढांचागत विकास के लिए रिण ही आगे का रास्ता है। अमेरिका, चीन जैसे देशों ने अपने ढांचागत विकास के लिए रिण ले रखे हैं।’ रेल मंत्री ने कहा कि रेल बजट में आगामी पांच वषरें के लिए एक रूपरेखा पेश की गई है जिसमें 8,56,020 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। वित्त वर्ष 2015-16 के लिए निवेश का आंकड़ा 1,00,011 करोड़ रुपये है।

इससे पहले रेल बजट पेश करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में प्रभु ने कहा कि माल ढुलाई भाड़े में वृद्धि का जिंसों के परिवहन पर मामूली असर होगा और खाद्यान्न, उर्वरक एवं यूरिया जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इससे प्रभावित नहीं होंगी। रेल बजट में माल ढुलाई भाड़ा में वृद्धि से रेलवे को अतिरिक्त 4,000 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।

प्रभु ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो रेलवे संकट में है और हमें एक ऐसा समाधान तलाशना है जो पूरी तरह से रेलवे के अनुकूल हो। हम आर्थिक समस्याओं का एक राजनीतिक समाधान नहीं खोज सकते। रेलवे की समस्या यह है कि हमें क्षमता निर्माण करने की जरूरत है, यही एक रास्ता है।’ रेल बजट पेश किए जाने के बाद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए.के. मित्तल ने कहा कि माल ढुलाई भाड़ा तर्कसंगत किए जाने की वजह से भाड़े की दरों में औसतन 3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि होगी और इसका आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर कोई असर नहीं होगा।

 

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories