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सिद्धू से मिलने को तैयार नहीं थे राहुल, प्रियंका ने घर जाकर मनाया तो हुई मुलाकात

प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद राहुल गांधी और सिद्धू के बीच मुलाकात हो सकी।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू।(Twitter/@SherryOnTopp)

2022 पंजाब चुनाव में कांग्रेस के अभियान को पार्टी की अंदरूनी कलह के खतरे से बचाने के लिए पार्टी नवजोत सिंह सिद्धू को राज्य में पार्टी प्रमुख बना सकती है। यही नहीं मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल में भी जल्द ही फेरबदल की संभावना है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने अभी तक उस योजना का समर्थन नहीं किया है जिसे उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की मंजूरी मिली है। दरअसल प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद ही राहुल गांधी और सिद्धू के बीच मुलाकात हो सकी थी। सूत्रों ने यह भी कहा कि प्रियंका गांधी ने “पहल की और राहुल गांधी को सिद्धू से मिलने के लिए मना लिया”।

सिद्धू, जो पिछले कुछ महीनों से पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाते रहे हैं, गांधी परिवार से मिलने के लिए मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। लेकिन राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए किसी भी मुलाकात से इनकार किया था। कल सिद्धू ने कथित तौर पर तीन घंटे तक चली बैठक के बाद प्रियंका गांधी के साथ एक तस्वीर ट्वीट की थी। बाद में शाम को, खबरें सामने आईं कि वह राहुल गांधी के साथ भी मुलाकात कर रहे थे। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा कि यह 45 मिनट की “सुलह की बैठक” थी।

पंजाब के कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने एएनआई को बताया, “राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ नवजोत सिद्धू की मुलाकात एक अच्छा संकेत है, और इससे इस मुद्दे को सुलझाने में मदद मिलेगी। मुझे लगता है कि जल्द ही एक समाधान हो सकता है।” जबकि प्रियंका गांधी को कांग्रेस के कुछ नेताओं ने संकटमोचक के रूप में पेश किया।

पंजाब में कांग्रेस नेताओं को लगता है कि नवजोत सिद्धू को शांत करना सबसे अच्छा तरीका नहीं हो सकता है। कुछ का तो यहां तक ​​कहना है कि पंजाब में पार्टी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अमरिंदर सिंह और सिद्धू दोनों ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से परामर्श करने और समाधान की सिफारिश करने के लिए सोनिया गांधी द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल के साथ बैठक की थी। पैनल के एक सदस्य ने कहा, “सिद्धू सोचते हैं कि वह हम में से किसी से भी ऊपर हैं और गांधी परिवार तक उनकी सीधी पहुंच है।”

मालूम हो कि 2017 के पंजाब चुनावों में कांग्रेस के स्टार प्रचारक रहे सिद्धू अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री बने थे लेकिन दो साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लंबे समय तक चुप्पी और पार्टी मामलों से अलग रहने के बाद, सिद्धू ने हाल के महीनों में एक बार फिर अमरिंदर सिंह को निशाना बनाना शुरू कर दिया, यह एक ऐसी समस्या बन गई है जिसे पंजाब चुनावों के मद्देनजर पार्टी के लिए नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।

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