किसानों के फोटो पर घिरे राहुल! BJP के पात्रा ने ‘पॉलिटिकल कूकू’ बता कहा- झूठ के सहारे करते हैं सियासत

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी आज की तारीख में जमीन पर किसी भी मुद्दे को उठाने में असमर्थ है। पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी भ्रम की राजनीति करते हैं और झूठी तस्वीरें शेयर करते हैं।

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बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। ( एक्सप्रेस फोटो)।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने एक ट्वीट को लेकर घिर गए हैं। दरअसल, बीजेपी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने रविवार को आयोजित की गयी मुजफ्फरनगर किसान पंचायत की गलत तस्वीर शेयर की और लोगों को गुमराह करने का काम किया। इससे पहले राहुल गांधी ने एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया था, ‘डटा है, निडर है, इधर है भारत भाग्य विधाता!’

मामले में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी आज की तारीख में जमीन पर किसी भी मुद्दे को उठाने में असमर्थ है। पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी भ्रम की राजनीति करते हैं और झूठी तस्वीरें शेयर करते हैं। संबित पात्रा ने यहां तक कह दिया कि राहुल गांधी आज के वक्त के पॉलिटिकल कूकू हैं।

संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी की आदत बन गयी है कि वे दूसरे के कंधे पर रखकर बंदूक चलाते हैं। वहीं, ट्विटर पर भी यूजर्स ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। ट्विटर यूजर हार्दिक (@BittuTuFanii) ने लिखा, ‘पुरानी तस्वीरे शेयर कर प्रोपगैंडा चलाएंगे, शर्म करो राहुल गांधी।’ टीना (@TinaRoy92936164) ने लिखा,’ राहुल गांधी हुए फिर से ट्रोल, सर्दी वाली पिक डालकर किया नकली किसानों का पोल खोल।’

वहीं, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इसी से संबंधित एक खबर का उल्लेख करते हुए दावा किया, ‘‘यही है देश कि सच्चाई। केवल, देश बेचने वाले शासकों को नहीं दिख रही।’ बता दें कि केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में रविवार को विभिन्न राज्यों के किसान मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में किसान महापंचायत के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए।

अगले वर्ष के शुरु में होने वाले, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘किसान महापंचायत’ का आयोजन संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से किया गया।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन को नौ महीने से अधिक समय हो गया है। किसान उन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं जिनसे उन्हें डर है कि वे कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था को खत्म कर देंगे, तथा उन्हें बड़े कारोबारी समूहों की दया पर छोड़ देंगे।

सरकार इन कानूनों को प्रमुख कृषि सुधार और किसानों के हित में बता रही है। सरकार और किसान संगठनों के बीच 10 दौर से अधिक की बातचीत हुई, हालांकि गतिरोध खत्म नहीं हुआ।

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