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राहुल गांधी का पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज- स्विट्जरलैंड से कुछ काला धन लाए या नहीं, युवा कर रहे इंतजार!

दावोस में हुई विश्व आर्थिक मंच की बैठक के बाद पीएम मोदी की स्वदेश वापसी पर राहुल गांधी ने पूछा है कि स्विटजरलैंड से लौटते वक्त वह कुछ काला धन लाए या नहीं, देश में युवा उस कालेधन का इंतजार कर रहे हैं।

राहुल गांधी और पीएम मोदी। (फाइल फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एकबार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कालेधन को लेकर तंज कसा है। दावोस में हुई विश्व आर्थिक मंच की बैठक के बाद पीएम मोदी की स्वदेश वापसी पर राहुल गांधी ने पूछा है कि स्विटजरलैंड से लौटते वक्त वह कुछ काला धन लाए या नहीं, देश में युवा उस कालेधन का इंतजार कर रहे हैं। बुधवार (24 जनवरी) को राहुल गांधी ने ट्वीट कर पीएम पर यह ताना मारा। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को उन वादों की याद दिलाई जिनमें सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर विदेशों से कालाधन वापस लाने की बात कही गई थी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यहां तक आश्वासन दिया था कि सरकार बनने के बाद 15-15 लाख रुपये भारतीयों के खाते में जमा कराए जाएंगे।

राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा- प्रिय प्रधानमंत्री, स्विटजरलैंड से वापस आने पर आपका स्वागत है। आपके कालेधन के वादे की याद दिला दूं। ”भारत में युवाओं को आश्चर्य होगा अगर आप अपने साथ विमान में कालाधन लेकर आ रहे हैं।”

मंगलवार (23 जनवरी) को राहुल गांधी ने ऑक्सफेम सर्वे का हवाला देते हुए पीएम मोदी से भारत में बढ़ती असमानता को दुनिया के सामने रखने की भी बात कही थी। हालांकि बीजेपी ने भी राहुल गांधी की बातों का जवाब देने में कसर नहीं छोड़ी। बीजेपी की तरफ से कहा गया कि ‘नेहरू के गरीबी कायम रखने के शासन के मॉडल’ की वजह से कांग्रेस की नीतियों से भारत में असमानता पनपी। ओक्सफेम की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई और बड़ी हुई है, जो मोदी सरकार के लिए गले की हड्डी सरीखी है।

2014 में देश के कुल धन के 49 फीसदी की कमान 1 फीसदी अमीरों के हाथों थी। 2016 में यह आंकड़ा 58 फीसदी और 2017 में 73 फीसदी हो गया। कांग्रेस ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की भारत में रोजगार की आलोचनात्मक भविष्यवाणी करती एक रिपोर्ट का भी हवाला देते हुए एक लेख अपनी वेबसाइट पर छापा है।

आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2019 तक 77 फीसदी कामगारों के रोजगार कमजोर रहने वाले हैं। कमजोर रोजगार से तात्पर्य काम करने की उनकी खराब स्थिति, अपर्याप्त तनख्वाह और कमजोर अधिकारों से है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में साढ़े 53 करोड़ कामगारों में से 39 करोड़ 86 लाख लोगों को पास कमजोर नौकरियां होंगी। लगभग एक चौथाई (23.4 फीसदी) भारत की कामकाजी आबाधी गरीबी में जी रही है।

कांग्रेस ने यह मुद्दा ऐसे समय उठाया है जब पीएम मोदी ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में दावा किया कि देश में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में इजाफा बताता है कि रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरव्यू में सड़क में पकोड़ा बेचने को भी एक रोजगार बताया था, जो कि आईएलओ के मुताबिक कमजोर रोजगारों में आता है।

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